हरियाली पर्व पर किसानों ने अच्छी फसल के लिए की पूजा-अर्चना, मांगी सुख - समृद्धि

हरियाली पर्व पर किसानों ने अच्छी फसल के लिए की पूजा-अर्चना, मांगी सुख - समृद्धि

Deepak Sahu | Publish: Aug, 12 2018 03:00:00 PM (IST) | Updated: Aug, 13 2018 12:07:39 PM (IST) Kanker, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ में किसानों ने हरेली पर्व पर शनिवार को कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर अच्छी फसल की कामना की।

कांकेर/सरोना. छत्तीसगढ़ में किसानों ने हरेली पर्व पर शनिवार को कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर अच्छी फसल की कामना की।गांव वालों ने क्षेत्रों में गेड़ी दौड़ व विभिन्न प्रतियोगिताएं भी हुई।इस दिन किसान नए फसल में उगने वाली भांजी, कुटकी और कुछ अन्य फसल को ईष्टदेव को अर्पण कर खाना शुरू करते हैं। किसानों ने यह त्यौहार गांव के शीतला मंदिर में मत्था टेककर सुख-समृद्धि के लिए किया।हरियाली पर्व को लेकर अंचल के सभी गांवों में उत्साह देखा गया।युवक-युवतियां, महिला व पुरुष टोली बनाकर एक-दूसरे को बधाई देते नजर आए। अंचल में हरियाली का पर्व अमावस्या पर धूमधाम से मनाई गई।

ऐसे हुई पूजा अर्चना
सुबह किसान अपने कृषि उपकरणों की साफ-सफाई कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर चिल्ला रोटी का प्रसाद चढ़ाए। खेतों में भी जाकर किसान ने पूजा-अर्चना की। ग्राम पुसवाड़ा, पटौद, माकड़ी सहित अन्य ग्रामीण अंचलों में लोगों में उत्साह दिखा। ग्राम पुसवाड़ा में हल व कृषि औजारों का पूजा कर रहे योगेश पटेल, मंहगू राम जैन ने बताया कि इस पर्व पर कृषि औजारों की पूजा अर्चना की जाती है। इस पर्व के साथ ही छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरूआत होती है। किसान इस दिन भगवान से अच्छी फसल की प्रार्थना करते हैं।

कृषि कार्य रहा बंद
ग्रामीण क्षेत्रों में पूजा-अर्चना के बाद बच्चों ने गेड़ी में चढक़र मनोरंजन करते हैं। यह परंपरा धीरे-धीरे लुप्त होते जा रही है। इससे अब कुछ ही गांवों में यह देखा जा सकता है। हरियाली के दिन इसकी शुरुआत होती है। पर्व को लेकर कांकेर क्षेत्र के पटौद, बेवतरी, पुसवाड़ा सहित कुछ ही ग्रामीण अंचलों में उत्साह देखने को मिला। शहर सहित कई ग्रामों में हरियाली पर्व को लेकर उत्साह नहीं दिखा। लोग सामान्य तौर अपने-अपने कामों में व्यस्त नजर आए। पर्व को लेकर किसान कृषि कार्य बंद रखकर औजारों की पूजा की। परंपरानुसार कुछ ग्रामीण क्षेत्र में इस दिन किसान सुबह अपने खेतों में पहुंचकर भेलवा की शाखा लगाते हैं। इसके बाद उन्हें घर के आंगन में रखकर विधिवत पूजा की गई।

 

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