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306 स्कूलों में 5 कक्षाएं पढ़ा रहे एक-एक शिक्षक, 68 में सिर्फ दो-दो गुरुजी

जिले में शिक्षकों का पद रिक्त होने के बाद भी भर्ती काफी दिनों से नहीं हो रही है। शिक्षकों की कमी के चलते अंचल में पठन पाठन प्रभावित हो रहा है। गत साल 304 शालाओं में एकल शिक्षक थे। इस साल यह संख्या बढ़कर 306 हो चुकी है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस बात को खुद स्वीकार कर रहे कि शिक्षकों की कमी के चलते शिक्षा पर असर पड़ रहा है। प्राथमिक शालाओं में एक ही शिक्षक के भरोसे पांच-पांच कक्षाएं लगती हैं।

कांकेर

Published: June 29, 2022 12:25:07 pm

कांकेर. शिक्षकों के अभाव में शालाओं में पठन-पाठन प्रभावित होते जा रहा है। शिक्षकों की कमी के चलते 306 प्राथमिक शालाओं में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य एक शिक्षक पर टिका है। रिक्त पदों के बाद भी शिक्षकों की भर्ती नहीं हो रही है। जिस कारण इन स्कूलों में पांच कक्षाओं का संचालन एक ही शिक्षक के भरोसे किया जा रहा है। वहीं जिले के 68 शालाओं में एक-एक अतिथि शिक्षकों के साथ दो-दो शिक्षक सेवा दे रहे हैं। सबसे अधिक शिक्षकों की कमी अंतागढ़ और कोयलीबेड़ा में देखने को मिल रही है।

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शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 1591 प्राथमिक शाला संचालित हो रही है। शिक्षा सत्र 2021-22 में जिले में 304 ऐसे प्राथमिक शाला संचालित हो रहे थे जिसमें एक शिक्षक पदस्थ किया गया था। इन एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और बच्चों के भविष्य को देखते हुए लगातार ग्रामीण शिक्षकों की मांग शासन-प्रशासन से करते आ रहे हैं। बावजूद रिक्त पदों पर भर्ती नहीं हो रही है। शिक्षा सत्र 2022-23 के प्रारंभ होने से पहले इस समस्या को देखते हुए 68 शिक्षकों की भर्ती किया गया लेकिन उसके बाद भी यह समस्या जस की तस बनी है। अब भी 306 प्राथमिक शालाओं में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य एक शिक्षक के भरोसे है। प्राथमिक शाला में पांच कक्षाएं संचालित की जाती है लेकिन शिक्षक के अभाव में एक ही शिक्षक को पांच कक्षाओं को संभालना करना पड़ रहा है। यदि शिक्षक को किसी शासकीय काम से बाहर जाना पड़ गया या कभी बीमार हो गया तो ऐसे हालात में स्कूल की छुट्टी कर दी जाती है।

यह समस्या प्रत्येक एकल शिक्षकीय स्कूलों में देखने को मिल रही है, उसके बाद भी रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा रही है। शिक्षा की इस बद्तर व्यवस्था से पालक व ग्रामीण परेशान हैं जो अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षक की मांग कर रहे हैं पर शासन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। सबसे अधिक परेशानी अंतागढ़ और कोयलीबेड़ा ब्लॉक में है। शिक्षकों की कमी से परेशान अंतागढ़ ब्लाक के आमाबेड़ा क्षेत्र और कोयलीबेड़ा क्षेत्र के पालक बार बार आंदोलन कर रहे हैं। बावजूद शिक्षकों की तैनानी नहीं हो रही है। शासन प्रशासन को भी ज्ञापन भेजकर अवगत करा चुके हैं। वैसे तो अतिथि शिक्षकों की तैनाती कुछ शालाओं की जाती है लेकिन वह भी सेवा देने नहीं आते हैं। ऐसे में बच्चों का भविष्य चौपह हो रहा है।

अधिकतर शालाओं का संचालन प्रभारी भरोसे
प्राथमिक शालाओं में बच्चों को बुनियादी शिक्षा दी जाती है ताकि उनका भविष्य बेहतर हो सके। लेकिन प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों का भविष्य अंधेरे में दिखाई दे रहा है। कई प्राथमिक शाला में शिक्षक पदस्थ नहीं होने पर दूसरे स्कूल के शिक्षकों को प्रभार दिया जाता है लेकिन उन स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा रही है। कई प्राथमिक स्कूलों में ऐसे शिक्षकों की भर्ती किया गया है जो शराब के नशे में धुत्त रहते हैं। शराब के नशे में कभी स्कूल आते हैं तो कभी नहीं आते, ऐसे शिक्षकों पर कोई कार्रवाई भी नहीं की जाती है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अधिक स्थिति खराब
जिले में 1591 प्राथमिक शाला संचालित है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अधिक परेशानी हो रही है। नगरीय क्षेत्रों में तो दो से तीन शिक्षकों के भरोसे प्राथमिक शाला का संचालन हो रहा ह। यहां कोई परेशानी नहीं है लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित स्कूलों में एकल शिक्षक पदस्थ हैं जो कभी आते हैं तो कभी नहीं। कोयलीबेड़ा विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे ग्राम राजमुंडा और कोपिनगुंडा प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षकों की मनमानी के चलते बच्चों का भविष्य अंधकार मय हो गया है।

गत वर्ष जिले में करीब 304 शाला एकल शिक्षक के थे। इस साल बढ़कर यह संख्या 306 हो चुकी है। अतिथि शिक्षकों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने की कोशिश हो रही है।
टीआर साहू, डीईओ कांकेर.

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