2 साल से स्कूल का हैण्डपम्प पड़ा है खराब, पीने के पानी के लिए बच्चों को हो रही परेशानी

2 साल से स्कूल का हैण्डपम्प पड़ा है खराब, पीने के पानी के लिए बच्चों को हो रही परेशानी

Deepak Sahu | Publish: Aug, 12 2018 06:05:01 PM (IST) Kanker, Chhattisgarh, India

जिले में आज भी ऐसे स्कूल हैं जहां के बच्चे अनेक परेशानियों से जूझ रहे हैं।

कांकेर/श्यामनगर. छत्तीसगढ़ में एक तरफ शासन द्वारा लाखों रुपए खर्च कर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं।वही दूसरी ओर देखा जा रहा कि जिले में आज भी ऐसे स्कूल हैं जहां के बच्चे अनेक परेशानियों से जूझ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला पखांजूर मुख्यालस से सटा गांव श्यामनगर पीव्ही 14 के माध्यमिक एवं प्राथमिक शाला में देखने को मिला।जहां के बच्चे पीने के पानी के लिए काफी मशक्कत उठा रहे हैं।

दो सालों से खराब है नल
यहां के बच्चे मध्यान्ह भोजन के बाद स्कूल प्रांगण से काफी दूर जाकर हैण्डपंप से पानी पीते हैं। जिसके चलते उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।इस संबंध में जब प्रधान पाठक दिलीप डे से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने बताया कि उनके स्कूल का नल पिछले दो वर्षों से खराब है। उन्होंने बताया कि वहां से पानी तो निकलता है लेकिन वह पीने योग्य ही नहीं है।

लिखित में कर चुके है शिकायत
उन्होंने बताया कि कई बार इसकी शिकायत पीएचई विभाग को लिखित रूप से कर चुके हैं। बावजूद समस्याओं का निराकरण नहीं किया जा रहा है। स्कूल आने वाले छोटे-छोटे बच्चों को पानी के लिए दूसरों के नलों का सहारा लेना पड़ रहा है। मध्याह्न भोजन करने के बाद बच्चों को अपनी-अपनी थालियों को साफ करने के लिए काफी दूर हैण्डपंप तक जाना पड़ रहा है। स्कूल में बच्चे पानी के लिए परेशान हैं।

शासकीय स्कूल में स्वच्छता अभियान फेल
बता दें कि इस प्राथमिक और माध्यमिक शाला में कुल 61 बच्चे अध्यनरत हैं। पीने के पानी के साथ-साथ यहां शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। लगभग 10 वर्षों से यहां का शौचालय जर्जर स्थिति में पड़ा है। चौकने वाली बात यह भी है कि इसी स्कूल प्रांगण में आंगनबाड़ी केन्द्र भी संचालित किया जाता है।

क्षेत्र के समस्त जनप्रतिनिधियों की यहां की समस्या से अवगत कराया गया है उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। बावजूद इस ओर ध्यान नहीं देना ग्रामीणों के समझ से परे है, जिसके चलते ग्रामीणों ने मांग किया है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए। स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से इस तरह की समस्या दूर नहीं हो रही है।

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