अपनी मांगों को लेकर रेल की पटरी पर बैठ किसानों ने किया प्रदर्शन

Deepak Sahu

Publish: Mar, 14 2018 09:25:28 AM (IST)

Kanker, Chhattisgarh, India
अपनी मांगों को लेकर रेल की पटरी पर बैठ किसानों ने किया प्रदर्शन

अपनी प्रमुख मांगों को लेकर भानुप्रतापपुर क्षेत्र के किसानों ने रेल की पटरी पर बैठकर किया प्रदर्शन।

कांकेर. रावघाट रेल परियोजना से प्रभावित किसानों की लड़ाई अब भी जारी है। मंगलवार को टेस्ट के लिए ट्रेन भानुप्रतापपुर पहुंची, लेकिन किसानों के धरना-प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे उससे पहले ही स्थानीय प्रशासन ने ट्रेन वापस भेज दिया, प्रदर्शन चलता रहा। इससे पहले किसानों और जिला प्रशासन से कलक्टर टामन सोनवानी, एस पी के एल धु्रव, एएसपी जय प्रकाश बढ़ाई,एसडीओपी एवं एसडीएम के समक्ष लंबे समय तक चर्चा चली, किन्तु किसानों और प्रशासन में समांजस्य नहीं बैठा और धरना जारी रखा गया।


प्रभावित किसानों ने करो या मरो की रणनीति अपनाई हुई है। भानुप्रतापपुर कॉलेज के पास रेलवे ट्रैक पर धरना देने बैठ गए हैं। आंदोलनकारी फुलबासन बाई, सुशीला दुग्गा, चंद्रशेखर यदु, नंदलाल जायसवाल, सांहग राम कांगे, गंगाराम देहारी ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को मान नहीं लेती है, तब तक सभी किसान दिन-रात रेलवे ट्रैक पर ही धरनारत रहेंगे। इन किसानों ने बताया कि अंतागढ़ व भानुप्रतापपुर तहसीलों के रेलवे प्रभावित ऐसे किसान जिनके पास वन भूमि अधिकार पत्र हैं। उन्हें रेलवे द्वारा न तो कोई मुआवजा दिया गया है और न ही नौकरी दी गई है। इसके अलावा अन्य 415 किसानों को भी इतने वर्ष बीत जाने के बावजूद नौकरी नहीं मिली है।

यह है किसानों की प्रमुख मांग
सभी रेलवे प्रभावित किसानों को रेलवे अथवा बीएसपी में तुरंत नौकरी पर लगाया जाए। रेलवे के द्वारा लगातार तकनीकी प्रशिक्षण लेने के उपरांत नौकरी देने की बात कही जाती रही है परंतु हम किसान इस पर सहमत नहीं है। सभी प्रभावितों को पहले नियुक्ति पत्र दिया जाए उसके बाद चाहे तो वह किसी भी तरह का प्रशिक्षण दिलवा सकते हैं। इसके अलावा नौकरी के लिए रेलवे ने जो भी मापदंड तय किया है उसे भी बदलने की मांग शामिल है।

रेलवे का कहना है कि स्वयं भूमि स्वामी उसकी पत्नी,पुत्र,पुत्री को ही नौकरी पर रखा जा सकता है। परंतु कई रेलवे प्रभावित किसान ऐसे हैं जिनके घर में बुजुर्गों के नाम पर जमीन हैं तथा उनके नाती-पोते ही नौकरी करने लायक हैं। ऐसे में रेलवे द्वारा निर्धारित मापदंड सही नहीं है अब जब तक हम किसानों की मांगों को पूर्ण कर इसी रेलवे ट्रैक पर आकर नियुक्ति पत्र नहीं दिया जाता है तब तक हम इस ट्रेक से हिलेंगे भी नहीं।

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