चार दशक बाद भी दुधावा कैनाल से 2223 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए नहीं मिला पानी

करोड़ों रुपए खर्च होने के चार दशक बाद भी दुधावा कैनाल से 2223 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए किसानों को पानी नहीं मिल रहा है। चार दशक में कैनाल में पानी नहीं आया तो किसान पाटकर खेती करने को मजबूर हो रहे हैं।

By: Ashish Gupta

Published: 17 Sep 2021, 12:44 AM IST

कांकेर. करोड़ों रुपए खर्च होने के चार दशक बाद भी दुधावा कैनाल से 2223 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए किसानों को पानी नहीं मिल रहा है। चार दशक में कैनाल में पानी नहीं आया तो किसान पाटकर खेती करने को मजबूर हो रहे हैं। जबकि सरोना कैनाल से 2875 हेक्टेयर में सिंचाई होनी थी लेकिन अभी 1725 हेक्टेयर में पानी मिल रहा है। उसी तरह से दाईं तट कैनाल से 1214 हेक्टेयर में सिंचाई के स्थान पर 141 हेक्टेयर में अपासी हो रही है।

पड़ताल में बताया जा रहा कि दुधावा डेम का निर्माण भिलाई उद्योग को पानी देने के लिए वर्ष 1971-72 में कराया गया था। क्षेत्र के किसानों को अपासी के लिए पानी नहीं मिला तो आंदोलन शुरू कर दिए। किसानों के आक्रोश को देखते हुए सबसे पहले सरोना होते हुए कोदाभाट तक कैनाल का सर्व कराया गया और 48 किमी कैनाल तैयार किया गया। इस नहर से 2875 हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया। कैनाल कच्चा होने के कारण पानी आगे नहीं बढ़ा तो पक्का बनाने पर करोड़ों रुपए खर्च किया गया। अभी तक सिर्फ 21 किमी पक्का कैनाल बना है। 27 किसी कैनाल को उसी हाल में छोड़ दिया गया है। डंवरखार, बेवरती होते हुए कोदागांव तक पानी अभी नहीं आया तो कुछ किसानों ने कैनाल को खेत में मिला लिया है। किसान सिंचाई की आस कैनाल से छोड़ चुके हैं।

बेवरती निवासी किसान आशाराम नेताम ने कहा कि चार दशक बाद भी खेतों तक पानी नहीं पहुंचा तो ऐसे कैनाल की क्या जरूरत है। किसान बड़ी उम्मीद से अपनी जमीन नहर के लिए दिए लेकिन आज तक जल संसाधन विभाग अपासी के लिए किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचा पाए तो हम कैसे उम्मीद करें। चार दशक पहले दुधावा से कैनाल निकाले जाने के लिए किसानों ने आंदोलन किया था। आज तक किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचा है। किसान नेता

केशरी चंद जैन ने कहा कि सरोना कैनाल से अंतिम छोर तक पानी आज तक नहीं पहुंचा, उधर 27 किमी दाईं तट कैनाल का निर्माण करा दिया गया। दाईं तट कैनाल से 1214 हेक्टेयर में अपासी करने का लक्ष्य रखा गया। दो दशक बाद भी इस कैनाल से मात्र 141 हेक्टेयर में अपासी हो रही है। अब दाईं तट नहर से चारामा तक पानी पहुंचाने की योजना बनी है। विभाग के आलाधिकारियों ने चार दशक पहले जिन किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखे उसे पूरा नहीं कर पाए अब चारामा तक कैनाल तैयार करने बात कर रहे हैं। किसान मजबूरी में कैनाल को समतल करने मजबूर हैं। कोदाभाट-बेवरती के किसान तो कैनाल से पानी पहुंचने की उम्मीद छोड़ चुके हैं।

पांच साल पहले दुधावा दाईं तट कैनाल के लिए मिला 20 करोड़
पांच साल पहले दाईं तट कैनाल के लिए शासन से 20 करोड़ की स्वीकृति मिली लेकिन अभी तक माइनर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। कैनाल फर्शीकरण के लिए 17 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया लेकिन अधर में लटका पड़ा है। जल संसाधन विभाग की अनदेखी के चलते दुधावा दाईं तट कैनाल का निर्माण कार्य पूरा होने के दो दशक बाद भी किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है।

चार दशक में सरोना कैनाल सिर्फ 21 किमी पक्का, 27 किमी कच्चा
सरोना कैनाल (बाईं तट) कोदाभाट तक बना है। चार दशक में सिर्फ सरोना से कुछ आगे 21 किमी कैनाल को पक्का किया गया। शेष 27 किमी कैनाल आज भी कच्चा है। ऐसे में सरोना तक किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है। 1725 हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है। शेष 1150 हेक्टेयर में चार दशक बाद भी पानी नहीं पहुंचा है। कैनाल में पानी नहीं आने के कारण किसानों में आक्रोश है।

जल संसाधन विभाग के ईई आरआर बैष्णव ने कहा, दुधावा दाईं तट कैनाल के लिए 17 करोड़ रुपए और सरोना कैनाल को और आगे तक पक्का बनाने के लिए शासन को प्रशासकीय स्वीकृति के लिए 10 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही कैनाल पक्कर होगा तो किसानों को पानी मिलने लगेगा।

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