लॉक डाउन के चलते इत्रनगरी में फूल किसानों की बढ़ी मुसीबत

लॉक डाउन के बीच इत्र नगरी में फूल किसान की मेहनत की खुशबू दिनों दिन फीकी पड़ रही है। लॉकडाउन में इत्र फैक्ट्रियों पर ताला पड़ने से इनकी मेहनत को खरीददार नहीं मिल रहे हैं।

By: Abhishek Gupta

Updated: 18 Apr 2020, 10:32 PM IST

कन्नौज. लॉक डाउन के बीच इत्र नगरी में फूल किसान की मेहनत की खुशबू दिनों दिन फीकी पड़ रही है। लॉकडाउन में इत्र फैक्ट्रियों पर ताला पड़ने से इनकी मेहनत को खरीददार नहीं मिल रहे हैं। जिससे गुलाब, गेंदा और मेहंदी की फसल खेत में खड़े खड़े ही झड़ रही है। नतीजतन किसानों को औने पौने दामों में फूल बेचने पड़ रहे हैं, लेकिन इन्हें भी खरीददार नहीं मिल रहे। फूल किसान के दर्द को देखते हुए सपा ने बंद पड़े इत्र कारखानों को शुरू कराने के लिए डीएम राकेश कुमार मिश्रा से मिलकर फूल किसान को राहत देने की मांग राखी।

बताते चलें कि कन्नौज जिले में करीब 670 हेक्टेयर में फूलों की खेती होती है। गुलाब के साथ-साथ बेला चमेली मेहंदी व गेंदा कन्नौज में ही होता है। इत्र फैक्ट्रियां बंद होने से किसानों की मेहनत इस बार खेत में ही दम तोड़ रही है। करीब तीन साल में 70, 80 हजार रुपए की लागत में तैयार होने वाली गुलाब की फसल खराब कगार पर है। आपको बता दें कि करीब 30 हेक्टेयर में गुलाब फूलों की खेती ही होती है। जिसका रूह गुलाब इत्र के साथ साथ गुलाब जल और गुलकंद बनाने में भरी मात्रा में प्रयोग किया जाता है। इसके आलावा यह सीजन गुलाब, गेंदा, बेला और मेहँदी का होता है, लेकिन लॉक डाउन के कारण इत्र कारखाने बंद हैं और फूल की खेती करने वाले किसान का भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि करीब 90 प्रतिशत इन फूलों की खपत इत्र के कारखानों में ही है। इस समय गुलाब, गेंदा, बेला और मेहंदी का सीजन चल रहा है। जिससे करीब 300 किसान जुड़ा हैं।

लॉक डाउन के कारण परेशान किसान और आढ़ती दोनों का ही कहना है की सरकार को कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे की उनके परिवार का भरण पोषण हो सके। लॉक डाउन के कारण बहुत परेशानी उठानी पड रही है। खेतों में फूल तैयार खड़े हैं, लेकिन कोई ख़रीददार नहीं मिल है।

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Abhishek Gupta Desk/Reporting
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