Kisan Karz Mafi Yojna 2017: कर्ज है 62 हजार का, लेकिन चेक में माफ हुए सिर्फ 315 रुपए

Kisan Karz Mafi Yojna 2017 की लिस्ट बनाने में हुई इस तरह की गड़बड़ी कहीं न कहीं बैंक कर्मियों की लापरवाही को उजागर करती है।

कन्नौज. कन्नौज के जिला प्रभारी मंत्री व प्रदेश के शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने स्थानीय केके इण्टर कॉलेज के खेल मैदान में आयोजित फसली ऋण मोचन योजना के तहत मौजूद लाभार्थी कृषकों को प्रमाण पत्र वितरित करते हुए कहा कि केन्द्र व प्रदेश की बीजेपी सरकार जो कहती है, वह करती है। दोनों सरकारें गांव, गरीब, किसान और निर्बल वर्ग के उत्थान के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना देश को विकसित कर विश्व गुरु बनाने का है। उन्होंने कहा कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लोग स्वच्छता, चिकित्सा व शिक्षा पर ध्यान देने को आगे बढ़कर जिम्मेदार नागरिक बन जाएं। जागरूकता बढ़ने के साथ बदलाव दिखेगा।

 

सरकार पूरा कर रही अपना वादा

जिला कन्नौज की सदर तहसील क्षेत्र के बोर्डिंग मैदान में आयोजित फसली ऋण मोचन योजना के स्वीकृति पत्र वितरण समारोह में राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले किसानों का एक लाख तक ऋण माफ करने का वादा किया था। उसको पूरा किया जा रहा है। प्रदेश में 36 हजार करोड़ रुपये फसल ऋण मोचन योजना पर खर्च किए जा रहे हैं। इसमें कन्नौज में पहले चरण में 16,460 लघु व सीमांत कृषकों को फायदा मिला है। रविवार को 5,030 किसानों को बुलाया गया है। इसमें सदर तहसील क्षेत्र के 1,010, तिर्वा के 1,510 व छिबरामऊ के 2,510 किसान शामिल हैं। राज्य मंत्री ने कहा कि स्वच्छता की मुहिम में दिसंबर तक प्रदेश को खुले में शौच मुक्त करने की कोशिश है।

 

कन्नौज हो सकता है अव्वल

शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि अच्छे ढंग से सरकारी काम व लोगों की सहभागिता से प्रदेश में कन्नौज अव्वल रह सकता है। इसके लिए ग्रामीण व किसान आगे आएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल जरूर भेजें। यह भी देश को विकसित करने की अहम कड़ी है। तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत ने कहा कि कई अफसर पूरी मेहनत व लगन से कार्य कर रहे हैं। वहीं कुछ प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्रों से धन उगाही कर रहे हैं। प्रशासन इन पर कार्रवाई करे। जिले के प्रभारी मंत्री ने 30 पात्र किसानों को मंच पर स्वीकृति पत्र दिए। इसके बाद प्रकोष्ठ व पंक्ति प्रभारी अफसरों ने बाकी किसानों को स्वीकृति पत्र बांटे।

 

कर्ज था 62 हजार, माफ किए सिर्फ 315 रुपए

वहीं दूसरी तरफ ऋण मोचन कार्यक्रम में आए कुछ किसानों ने प्रमाण पत्र में दर्ज कर्ज की रकम पर भी सवाल उठाए। एक किसान ने बैंक पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि उसका कर्ज 62 हजार था, लेकिन प्रमाण पत्र केवल 315  रुपए की माफी का ही मिला है। जिसको लेकर किसानों में काफी नाराजगी भी देखने को मिली। आपको बता दें कि लिस्ट बनाने में हुई इस तरह की गड़बड़ी कहीं न कहीं बैंक कर्मियों की लापरवाही को उजागर करती है। जो भविष्य में सरकार के लिए ही बड़ी मुसीबत साबित हो सकती है। अब देखना ये होगा कि ऐसे मामलों का योगी सरकार किस तरह निपटारा करती है।

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नितिन श्रीवास्तव
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