जब नहीं मिल सकी 108 एंबुलेंस, तो पति होने का निभाया फर्ज और पत्नी को गोद में लेकर पहुंचा अस्पताल

दर्द से तड़पती पत्नी की हालत देख पति से नहीं रहा गया तो वह उसे गोद में उठाकर पैदल ही चल पड़ा।

By: Arvind Kumar Verma

Published: 28 May 2020, 05:07 PM IST

कानपुर देहात-विवाह के समय अग्नि के सात फेरे लेते समय पति द्वारा साथ निभाने का जो वचन लिया जाता है, उसे कानपुर देहात के गहिलू गांव में एक पति ने बखूबी निभाया। जब छत से गिरकर एक महिला घायल हो गई। इसमें उसके दोनों पैर टूट गए और वह बुरी तरह असहाय हो गई। पति के लिए शायद परीक्षा की घड़ी थी। पति ने उसे अस्पताल लेे जाने के लिए 108 एंबुलेंस को लगातार फोन किया लेकिन उस एंबुलेंस नहीं मिल सकी। दर्द से तड़पती पत्नी की हालत देख पति से नहीं रहा गया तो वह उसे गोद में उठाकर पैदल ही चल पड़ा। हालांकि रास्ते में बाइक से लिफ्ट मिलने पर वह रसूलाबाद कस्बे के आरपीएस कालेज के समीप उतरा और सीएचसी पहुंचा। यहां हालत गंभीर देख चिकित्सकों द्वारा उसे कानपुर रेफर कर दिया गया।

कानपुर देहात के रसूलाबाद क्षेत्र के गहिलू गांव के अनुज कुमार की पत्नी रंगोली छत पर गई थी। बताया गया कि तभी अचानक छत पर उसे चक्कर आ गया। छत किनारे कोई रेलिंग न होने से वह छत से नीचे आ गिरी। उसकी चीख सुनकर दौड़े पति ने घायल पत्नी को अस्पताल ले जाने के लिए कई बार 108 नंबर डायल कर एंबुलेंस मांगी, लेकिन सभी एंबुलेंस द्वारा व्यस्त होने की बात कहते हुए मदद से इंकार कर दिया गया। थक हारकर पत्नी की पीड़ा देख उससे रहा नहीं गया और फिर वह पत्नी को गोद में लेकर ही सीएचसी की तरफ चल पड़ा।

रास्ते में बाइक सवारों की मदद से वह आरपीएस इंटर कॉलेज तक पहुंचा। अभी अस्पताल की दूरी बाकी थी, लेकिन उसकी गंभीर हालत देख उसने फिर से गोद में लेकर एक किमी की दूरी तय कर सामुदायिक स्वास्थ केंद्र रसूलाबाद पहुंचा। यहां डॉ. आशीष मिश्रा ने उसे देखा तो दोनों पैर टूटे होने के साथ ही कमर में चोट की बात कहते हुए कानपुर के लिए रेफर कर दिया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लोकेश शर्मा ने बताया कि एंबुलेंस का संचालन लखनऊ कंट्रोल रूम से होता है। इस कारण से एंबुलेंस नहीं मिली, हालांकि पता कराया जाएगा।

Arvind Kumar Verma
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