84 के दंगे की खुली फाइल और जिंदा हो गई तारीख

84 के दंगे की खुली फाइल और जिंदा हो गई तारीख

Vinod Nigam | Updated: 04 Jul 2019, 01:57:27 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

एसआईटी ने वादीपक्ष को किया तलब, मांगे दस्तावेज और ये 12 लोग देंगे गवाही, सिख समाज ने कहा इंसाफ की उम्मीद जगी।

कानपुर। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कह हत्या के बाद 1984 में दिल्ली में दंगा भड़का और सैकड़ों सिखों का कत्लेआम कर दिया गया। इसकी आग कानपुर में भी फैली और यहां भी सिखों को मौत के घाट उतारा गया। सिख समाज पिछले 35 साल से इंसाफ की जंग लड़ते हुए कोर्ट के चक्कर लगा रहा था। पर अब उन्हें इंसाफ की उम्मीद जगी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के चलते अलमारी में बंद हिंसा की फाइल बाहर निकल आई है और सुनवाई भी शुरू हो गई है।

एसआईटी ने शुरू की जांच
35 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कानपुर में दंगे के दौरान सैकड़ों सिख समाज के लोगों का कत्लेआम किया गया था। पीड़ितों ने बजरिया और कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया, पर पुलिस ने अधिकतर मामलों में एफआर लगा फाइल बंद कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश की योगी सरकार ने 1984 दंगे की फिर से जांच कराए जाने के लिए एसआईटी का गठन किया। जिसका कार्यालय कोतवाली में खोला गया। बुधवार को बुधवार को जांच के लिए नियुक्त सदस्य सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुभाषचंद्र अग्रवाल से सिख समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। जज को बताया गया कि 12 लोग गवाही देंगे और इन्हीं में से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सिक्योरिटी अफसर अंशदीप सिंह भाटिया के पिता दविंदर पाल सिंह भी शामिल है।

127 लोगों की हत्या
दिल्ली के बाद कानपुर में सिख दंगे सबसे भयावह थे। कानपुर के दंगों में 300 से ज्यादा सिखों के मारे जाने और सैकड़ों घर तबाह होने के आरोप लगे थे। हालांकि, सिख दंगों की जांच करने वाले रिटायर्ड जस्टिस रंगनाथ मिश्रा आयोग ने दंगों में 127 मौतें होने की बात कही थी। सिख दंगों की जांच के लिए गठित एसआईटी ने 1254 एफआईआर में इन 35 मामलों को आगे की विवेचना के लिए चुना है। कानपुर की शहर कोतवाली के प्रथम तल पर एसआईटी का दफ्तर बनाया गया है। एसआईटी के जज से मुलाकात के बाद सरदार मोहकम सिंह ने बताया कि बजरिया थाने में दर्ज मुकदमो में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। जिनकी भी जांच एसआईटी करेगी। बताया, केस डायरी कोर्ट ने मांगी है।

सौंपे एवीडेंस
एसआईटी के जज से मुलाकात के बाद सरदार मोहकम सिंह ने बताया कि दंगे में शहर में मारे गए सभी 127 लोगों के नाम व पते सहित लिस्ट सौंप दी गई है। पीपुल यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज संस्था की पुस्तक ‘दोषी कौन’ भी दी गई है। दंगे के बाद प्रकाशित इस किताब में मोहल्लेवार पीड़ितों और दंगा करवाने वालों के नामों का उल्लेख है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के सिक्योरिटी अफसर के पिता 1984 में केडीए कॉलोनी बर्रा में रहते थे। उनके सामने उनके भाई अंगद सिंह और मविंदर सिंह की हत्या की गई थी। वह भी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से गवाही देने को तैयार हैं।

उम्मीद की जगी किरण
बता दें कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख दंगे भड़क गए थे। दरअसल इंदिरा गांधी की हत्या करने वाले उनके अंगरक्षक ही थे। और दोनों ही अंगरक्षक सिख थे, जिसके बाद देश में लोग सिखों के खिलाफ भड़क गए थे। इस घटना के बाद देश में खून की होली खेली गई थी। माना जाता है कि इन दंगों में पांच हजार लोगों की मौत हो गई थी। अकेले दिल्ली में करीब दो हजार से ज्यादा लोग मारे गये थे। दशकों की लड़ाई के बाद सिख समुदाय में एसआईटी की जांच के बाद खुश है। उन्हें उम्मीद है कि सिखों का कत्ल करने वालों को सजा जरूर मिलेगी।

 

Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned