वंश का अंत कर श्रीदेवी के घर की देहरी उखाड़ ले गई थी ‘फूलन देवी’

6 जनवरी को कोर्ट सुनाएगी भारत के इतिहास के सबसे बड़े नरसंहार का फैसला, पीड़ित पक्ष की महिलाओं ने कहा डकैतन को मिले फांसी का सजा।

By: Vinod Nigam

Published: 06 Jan 2020, 09:36 AM IST

कानपुर। 14 फरवरी 1981 को करीब शाम चार बजे एकाएक गोलियों की गंूज यमुना के इस से लेकर उस पर तक सुनाई दी। पांच मिनट के बाद गांव का लालू नाम की युवक दौड़ता हुआ आया और बोला भाभी, बेहमई में फूलनबाई ने धावा बोल दिया था और बाबा, ताऊ और भईया के सीने में गोली दाग दी है। ये सुनकर हम खेत से गांव की सरहद पर पहुंची, तभी झाड़ियों के पीछे छिपे ग्रामीणों ने हमें पकड़ लिया और जब फूलन चली गई तो भागकर मौके वारदात पर पहुंची। पति, जेठ और ससुर के शव खून से लथपथ पड़े थे और हमारी तीन बेटियां रानी (9) लज्जो (7) लवली (5 ) रो रही थीं, जबकि दो साल की चैथे नंबर की बेटी घर के बाहर गली पर बैठी थी। फूलन ने मर्दो को मार दिया, घर में रखे जेवरात, कपड़े और गृहस्थी के सामान को आग के हवाले कर घर के बाहर लगी देहरी उखाड़ कर लेकर चली गई थी। ये शब्द 39 साल पहले हत्याकांड में अपने परिवार को गवांने वाली श्रीदेवी के हैं।

खेत में थी श्रीदेवी
श्रीदेवी बताती हैं कि 14 की सुबह सुबह पूरे परिवार ने भोजन किया। पति, ससुर और जेठ के साथ अपनी चारों बेटियों को लेकर हम खेत चले गए। दोपहर के वक्त ससुर, जेठ और पति बेटियों को लेकर घर लौट आए हमें खेत की रखवाली के लिए छोड़ आए। हमारे साथ गांव के मास्टर वीरन सिंह की पत्नी विट्टन भी अपने ढाई साल के बेटे के साथ खेत पर थीं। तभी पता चला कि फूलन ने गांव के 20 लोगों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया, जबकि छह लोग घायल हुए। भागकर आए और देखा कि हमारा पूरे वंश का अंत डकैतन ने कर डाला।

घसीटकर ले गई थी टीले पर
श्रीदेवी बताती हैं कि हमारा घर कच्ची मिट्टी का बना था और पति ने पड़ोस के घोसी गांव से हसन मिस्त्री, रामकुमार और अमर कुशवाहा बुलवाया था। फूलन ने हमारे परिवार के सदस्यों के अलावा इन तीनों लोगों की भी हत्या कर दी थी। श्रीदेवी बताती हैं कि फूलन देवी को शक था कि हमारे घर पर लालाराम और श्रीराम छिपे हुए हैं। इसी वजह से सबसे पहले उसने हमारे घर पर धावा बोला। सभी को घसीटते हुए डकैत ठीले तक ले गए और कुछ घर के अंदर रखे जेवरात, पकड़े और राशन का सामन ले गए और फिर गेहूं सहित अन्य अनाज को आग के हवाले कर दिया। फूलन ने खड़े होकर हमारी देहरी खुदवाई और उसे अपने साथ ले गई। फिर जमुना में बहा दिया।

24 साल की उम्र में देखी लाशें
65 साल की श्रीदेवी कहती हैं, अब इतने साल बाद अगर केस का फैसला आ रहा है तो इससे क्या फायदा मिलेगा? घर में ससुर, जेठ और पति को सरेआम फूलन और उसके साथियों ने गोलियों से भून दिया था। 24 साल की उम्र में मैंने परिवार के पुरुषों की लाशें देखीं तो कुछ समझ नहीं आ रहा था। अकेले ही पूरा परिवार चलाना था। मायके वालों और गांव वालों ने साथ दिया तो जिंदगी पटरी पर लौटी। अब 4 बेटियों की शादी हो चुकी है। श्रीदेवी कहती हैं कि फूलन अब इस दुनिया में नहीं है, फिर भी हम चाहती हैं कि उसे कोर्ट सख्त से सख्त सजा दे।

वे तो टीचर थे फिर भी मार दी गोली
विट्टन देवी गांव के बाहर स्कूल के पास बैठी थीं। जब उनसे बातचीत की गई तो वह फूट-फूट कर रो पड़ी। बताया, पति स्कूल में टीचर थे। उनका अपराध व अपराधियों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। पति वीरन स्कूल से आने के बाद खेत आए। हमारे कहने पर वह घर लौट गए और कुछ ही देर के बाद खबर आई कि फूलन ने मास्टर साहब का कत्ल कर दिया। विट्टन बताती हैं कि उस वक्त हमारे बेटे की उम्र ढाई साल की थी। सरकार ने नौकरी देने का वादा किया, पर मिली नहीं। योगी सरकार आने के बाद अब पेंशन मिलनी शुरू हुई है। विट्टन चाहती हैं कि 6 जनवरी को फूलन देवी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई जाए।

इन लोगों को उतारा था मौत के घाट
विट्टन देवी के बेटे कहते हैं कि फूलन देवी ने जगन्नाथ सिंह, तुलसीराम, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, लाल सिंह, रामाधार सिंह, वीरेंद्र सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिव बालक सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, बनवारी सिंह, हिम्मत सिंह, हरिओम सिंह, हुकुम सिंह समेत 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जबकि जंटर सिंह समेत आधा दर्जन ग्रामीण गोली लगने से घायल हुए थे। बताते हैं गांव के राजाराम सिंह ने दस्यु सुंदरी फूलन देवी समेत 35-36 डकैतों के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

6 को आएगा फैसला
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि वर्ष 2012 में डकैत फूलन, भीखा, पोसा, विश्वनाथ, श्यामबाबू और राम सिंह पर आरोप तय किए गए थे। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित की अदालत में चल रही है। राज्य की ओर से अभियोजन पक्ष ने वर्ष 2014 में गवाही पूरी कर ली थी। इसके बाद से अभियुक्तों की ओर से बचाव पक्ष ने बहस शुरू की। डीजीसी ने बताया कि 8 दिसंबर को बचाव पक्ष की बहस पूरी हो गई है। फैसला सुनाने के लिए विशेष अदालत ने छह जनवरी की तारीख मुकर्रर की थी।

2012 में पहली गवाही
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि बेहमई हत्याकांड में आरोपी भीखा, श्यामबाबू व विश्वनाथ उर्फ पूतानी जमानत पर हैं। आरोपी पोसा अभी भी जेल में बंद है। डकैत विश्वनाथ उर्फ अशोक और रामकेश फरार चल रहे हैं। गवाही के दौरान अभियोजन के पत्र पर मान सिंह को भी आरोपी बनाया गया है और वह फरार चल रहा है। डीजीसी ने बताया कि 24 अगस्त 2014 को आरोप तय हुए थे। 21 सितंबर 2012 को पहली बार गवाही शुरू हुई। पहले वर्ष में 12 लोगों की गवाही हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 15 गवाह पेश किए गए। इनमे से सात तथ्य के साक्षी हैं।

इन आरोपी की हो चुकी है मौत
पुलिस रिकार्ड के अनुसार बेहमई कांड की प्रमुख आरोपी दस्यु सुंदरी फूलन देवी की नई दिल्ली में हत्या हो चुकी है। जालौन के कोटा कुठौंद के राम औतार, गुलौली कालपी के मुस्तकीम, बिरही कालपी के लल्लू बघेल, बलवान, कालपी के लल्लू यादव, कोंच के रामशंकर, डकोर कालपी के जग्गन उर्फ जागेश्वर, महदेवा कालपी के बलराम, टिकरी के मोती, चुर्खी के वृंदावन, कदौली के राम प्रकाश, गौहानी सिकंदरा के रामपाल, मेतीपुर कुठौद के प्रेम, धरिया मंगलपुर के नंदा उर्फ माया मल्लाह की मौत हो चुकी है।

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