एक्शन मोड पर आया प्रशासन, शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना के 409 अपात्रों से होगी एक करोड़ की वसूली

-शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना के 409 अपात्रों से वसूली की तैयारी,
-प्रशासन ने योजनाओं में 409 लोगों को माना है अपात्र,
-योजनाओं में छह करोड़ से अधिक का घोटाला आया सामने,

By: Arvind Kumar Verma

Published: 12 Jul 2021, 01:41 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. प्रदेश सरकार की शादी अनुदान (Marriage Grant Scam) और पारिवारिक लाभ योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया था। जिसमें ताबड़तोड़ कार्यवाही की गई। वहीं अब अपात्र पाए गए लोगों से वसूली (Marriage Grant Recovery) की जाएगी। बताया गया योजना में वैसे तो 1806 लोग गलत पते वाले हैं। साथ ही करीब पांच सौ अपात्र हैं, लेकिन प्रशासन फिलहाल 409 लोगों को ही अपात्र मानकर अधिकारियों, कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई कर रहा है। अब यह तय किया जाएगा कि गलत तरीके से लाभ लेने वाले इन लाभार्थियों से भू राजस्व की तरह वसूली की जाए या फिर उन्हें सामान्य नोटिस देकर धनराशि जमा करने के लिए कहा जाएगा।

छह करोड़ से अधिक का हुआ योजनाओं में घोटाला

फिलहाल शादी अनुदान के 211 लाभार्थियों से 42.20 लाख रुपये तो पारिवारिक लाभ योजना के 198 लाभार्थियों से 59.40 लाख रुपये की वसूली की तैयारी प्रशासन ने की है। बताया गया कि शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में हुए फर्जीवाड़े में छह करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। शादी अनुदान में तो 706 लोगों के पते ही नहीं मिले हैं और करीब ढाई सौ लोग अपात्र पाए गए। इसी तरह पारिवारिक लाभ योजना में 1106 लोगों के पते नहीं मिले हैं और 204 अपात्र हैं। इनमें से दो की वार्षिक आय अधिक होने पर भी लाभ दिया गया। चार ऐसे हैं जिनकी मौत हो चुकी फिर भी लाभ दिया गया।

पते न मिलने पर एड्रेस की सही जांच करा रहा प्रशासन

इनमें से जिनके पते नही मिले हैं। प्रशासन उनकी जांच कराने जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि उनमें से कितने वास्तव में फर्जी पते वाले हैं और कितने किराए पर थे। हालांकि जो किराए पर रह रहे थे उन पर तो कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन वास्तव में जो फर्जी पते वाले हैं उनके विरुद्ध कार्रवाई के साथ ही आय और जाति प्रमाण पत्र भी रद किए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। उधर समाज कल्याण विभाग की स्पेशल आडिट टीम भी अपने स्तर से जांच कर रही है। जल्द ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की आडिट टीम भी शहर आ सकती है।

Arvind Kumar Verma
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