नरक से बाहर निकले ये युवा अब दूसरों की जिंदगी से निकाल रहे जहर

५० युवाओं का समूह नशेड़ी लोगों को ला रहा एआरटी सेंटर
नाको से अधिकृत केन्द्र से दवा खिलाकर हो रहा सुधार

कानपुर। नशे के आदी इन युवाओं की जिंदगी नर्क बन चुकी थी। भविष्य नशे के धुंए में खो गया था, लेकिन इन्होंने हिम्मत कोशिश की और खुद से लड़े। आखिरकार नशे पर जीत हासिल कर इस नर्क से खुद को निकाला। तब जाकर इन्हें पता चला कि नशे में फंसी जिंदगी लगभग मौत के बराबर है। इसलिए नशा छोड़ चुके ५० युवाओं का यह समूह अब शहर के दूसरे युवाओं को भी सुरक्षित जीवन में वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।

सार्वजनिक स्थानों पर रखते नजर
नशे से दूर हुआ युवाओं का यह समूह रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और पार्कों पर सक्रिय रहता है। ये लोग नशा लेने वालों को खुद बुलाकर संक्रामक रोग अस्पताल के एआरटी सेंटर ला रहे, जहां इंजेक्शन की जगह उन्हें दो टेबलेट सुबह-सुबह खिलाई जा रही। दो टेबलेट रोज लेने से यह नशा अपने आप छूट जाएगा। इंजेक्शन से टेबलेट पर आने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) ने संक्रामक रोग अस्पताल में ओरल सप्लीमेंट ट्रीटमेंट सेंटर (ओएसटीसी) खोला है, जहां इंजेक्शन के विकल्प के तौर पर टेबलेट दिए जा रहे हैं।

एचआईवी बांट रहे नशेड़ी
शहर में इंजेक्शन से नशा लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इस समय लगभग ११५० लोग नशे का इंजेक्शन ले रहे हैं, इनमें ४५० नशेड़ी एचआईवी पॉजिटिव हैं। यह लोग खुद का जीवन खतरे में डाल चुके हैं और अब दूसरों को एचआईवी बांट रहे हैं। इनमें कुछ तो गंभीर हालत में पहुंच चुके हैं।

स्थिति के अनुसार दी जाती डोज
ओएसटीसी सेंटर के डाटा मैनेजर आकाश का कहना है कि नशे के आदी हो चुके लोगों की गम्भीरता को देखकर दवाओं की डोज बनाई जाती है। सुबह 9:30 बजे सेंटर खुल जाता है। सुबह ही दवा की डोज खिला दी जाती है। दवाओं का चुनाव नेशनल ड्रग डिपेंडेस सेंटर गाजियाबाद और नाको की देखरेख में होता है। एक महीने खुराक लेने के अंदर ही बदलाव दिखने लगता है। सेंटर पर प्रभावित व्यक्ति अपने दूसरे साथी को भी लेकर आते हैं। वैसे कुछ मरीजों में एक वर्ष तक इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

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आलोक पाण्डेय
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