सांड के उत्पात से हो सकता है प्रदेश में राजनीतिक उथल-पुथल

शहर के ज्योतिष से जुड़े विद्दवानो का मनना है कि सावन के अवसर पर यदि सांड़ किसी तरह का उत्पात मचता है तो ये संकेत अच्छे नहीं कहे जाते है। शहर के जाने माने ज्योतिष शास्त्री संजय दीक्षित का कपना है कि सांड़ और नन्दी को भगवान शिव का वाहन कहा गया है और ऐसे में यदि नन्दी किसी तरह का उत्पात मचाता है तो इसका असर शास्त्रो में मार्ग भ्रमित करने के रूप में लिया जाता है।

कानपुर। शहर के लालबंगला क्षेत्र में सावन के शुरू होने वाले दिन में जबरदस्त अफरा-तफरी फैल गयी। जब एक सांड़ ने बाजार में उत्पात मचाना शुरू कर दिया। लोग अपनी गाड़ी छोड़ कर भागने को मजबूर हो गये। सावन के शुरूआत के दिन पर साड़ की इस धमाचौकड़ी से कई लोगों में भय भर गया तो कई इश्वर भक्त लोगों ने इसको सावन के अशुभ संकेत के रूप में लिया है।

हलांकि इस घटना के बाद लोगों में सावन की मान्यताओं को लेकर कई तरह की चर्चा से बाजार गर्म रहा। लेकिन इसके बीच एक महिला जब सांड़ के इस उपद्रव में फंस गयी तो उसके कई चोटें आयी है।

मान्यता है कि, सावन में सांड़ के उत्पात से राजनीतिक उथल पुथल रहता है और मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का वाहन होने के कारण कई तरीकों से ये मौसम और राजनीति की दिशा को भ्रमित करने की क्षमता रखता है।

नन्दी के ऊत्पात से लोग घायल

लाल बंगला क्षेत्र में सांड़ के उत्पात में हालांकि कई लोगों को चोटे आयी और कई लोगों के वाहन क्षतिग्रस्त हो गये। लालबंगले के व्यापारी नेता सूरज गुप्ता ने बताया कि, सावन के महिने के पहले दिन की तैयारियां जोरों पर थी कि, शाम तीन बजे एक सांड़ आपे से बाहर होकर लोगों को दौड़ाने लगा।

सांड़ की इस हरकत से क्षेत्र के केडीए कालोनी में रहने वाली दीप्ती बुरी तरह घायल हो गयी। दीप्ती के मुताबिक वो बाजार में सावन की खरीद्दारी के सिलसिले में आयी थी। लोगों ने किसी तरह दीप्ती के घर फोन करके परिवारवालों को सूचना दी और उनको पास के नर्सिंग होम में इलाज के लिए भेजा।

पंड़ितों और ज्योतिष शास्त्रियों का ये मानना है

शहर के ज्योतिष से जुड़े विद्दवानों का मनना है कि, सावन के अवसर पर यदि सांड़ किसी तरह का उत्पात मचता है तो ये संकेत अच्छे नहीं कहे जाते हैं। शहर के जाने माने ज्योतिष शास्त्री संजय दीक्षित का कहना है कि, सांड़ और नन्दी को भगवान शिव का वाहन कहा गया है और ऐसे में यदि नन्दी किसी तरह का उत्पात मचाता है तो इसका असर शास्त्रों में मार्ग भ्रमित करने के रूप में लिया जाता हैं।

मार्ग भ्रमित करने के असर

संजय दीक्षित के अनुसार यदि मार्ग में भ्रम की स्थित आती है तो इसका सीधा असर राजनीति की दिशा पर पड़ता है। जानकारों के मुताबिक सावन के महिने की शुरुआत में सांड़ के उत्पात मचाने पर देश और प्रदेश की राजनीति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उपलव की स्थित भी बन सकती है।

भगवान शिव की सवारी कहे जाने वाला सांड़ अपने स्वभाव से कई बातों को जन्म देता है और इससे राजनीतिक संघर्ष की स्थित पैदा होती है।

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आकांक्षा सिंह Desk/Reporting
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