किडनी रैकेट की जांच कर रही एसआईटी रिश्वत लेने के आरोप में घिरी

किडनी रैकेट की जांच कर रही एसआईटी रिश्वत लेने के आरोप में घिरी

Alok Pandey | Updated: 12 Jun 2019, 03:10:38 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

 

चार पुलिस अफसरों पर एसएसपी ने की कार्रवाई
एक डॉक्टर से दो करोड़ रुपए लेने का भी आरोप

कानपुर। किडनी कांड की जांच कर रही पहली एसआईटी पर करोड़ों रुपये लेकर जांच में खेल करने का आरोप लगा है। टीम में शामिल चार पुलिस अफसरों पर कार्रवाई की गई है। आरोप है कि एसआईटी ने दिल्ली के एक पद्मश्री डॉक्टर से रुपये लेकर उन्हें जांच के दायरे से बाहर कर दिया। इसके अलावा कई अन्य कई डॉक्टरों और नामचीन हस्तियों को पैसे देकर बचाया गया। प्राथमिक जांच में आए इन तथ्यों के आधार पर ही एसएसपी ने पहली एसआईटी पर कार्रवाई की है।

दो करोड़ रुपए लेने का आरोप
किडनी रैकेट की जांच में लगी एसआईटी के खुलासे के बाद दिल्ली के एक नामचीन हॉस्पिटल के पद्मश्री डॉक्टर का नाम आया था। जांच के लिए पहली एसआईटी टीम दिल्ली भी गई थी। लेकिन एसआईटी ने कार्रवाई के बजाए अस्पताल व डॉक्टर का नाम जांच के दायरे से ही बाहर कर दिया। इस मामले में डोनर प्रोवाइडर गिरोह के मुख्य आरोपियों में शामिल लखीमपुर खीरी के मैगलगंज निवासी गौरव मिश्रा ने एसआईटी पर आरोप भी लगाया था कि पद्मश्री डॉक्टर ने दो करोड़ रुपये दिए हैं। इसी वजह से उनको जांच से बाहर किया गया है। इसके अलावा कई और बड़े लोगों से लाखों वसूलने का आरोप है।

सबूत जुटाने का दिया था हवाला
किडनी रैकेट की जांच के दौरान पुलिस और एसआईटी ने एक-एक करके डोनर और प्रोवाइडरों को जेल भेज दिया था मगर नामजद पीएसआरआई हॉस्पिटल की कोऑर्डिनेटर सुनीता प्रभाकरण और मिथुन समेत अन्य किसी बड़े आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की थी। एसआईटी जब फरवरी में दिल्ली गई थी तो पीएसआरआई हॉस्पिटल के दोनों आरोपी कोऑर्डिनेटरों से पूछताछ भी की थी मगर बगैर गिरफ्तारी लौट आई थी। उस समय पूछे जाने पर एसआईटी का कहना था कि सुबूत जुटाए जा रहे हैं, जिसके बाद ही गिरफ्तारी होगी।

यहां भी बरती ढिलाई
इस मामले में कर्रही निवासी मोहित निगम भी आरोपी है। एसआईटी के अधिकारी कई सप्ताह तक उसको लेकर इधर-उधर घूमते रहे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं एचसीपी के बेटे जुनैद की गिरफ्तारी भी काफी दिनों बाद की थी। डोनर वरदान और वादिनी संगीता की जांचें सर गंगाराम अस्पताल में कराई गईं थी। अचानक पुलिस ने सर गंगाराम अस्पताल को क्लीन चिट दे दे गई। एसआईटी की इस कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हुए हैं। एसएसपी ने इस मामले में बर्रा इंस्पेक्टर, एसएसआई और नौबस्ता के सब इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया है, जबकि सीओ गोविंदनगर को पुलिस कार्यालय से संबद्ध किया गया है।

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