अजीब परंपरा है यहां, कुत्ते की मौत पर विधि विधान से निकली शव यात्रा, ग्रामीण बोले तेरहवीं संस्कार भी होगा

अजीब परंपरा है यहां, कुत्ते की मौत पर विधि विधान से निकली शव यात्रा, ग्रामीण बोले तेरहवीं संस्कार भी होगा

Arvind Kumar Verma | Publish: Sep, 11 2018 05:00:02 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर देहात के इस मुरीदपुर गांव में आश्चर्यजनक घटना हुयी, जहाँ कुत्ते की मौत पर मातम छा गया। ग्रामीणों ने फिर विधि विधान से यमुना नदी में अंतिम संस्कार किया। तेरहवीं संस्कार भी होगा।

कानपुर देहात-श्यामलाल पूरे गांव का दुलारा था, मनुष्य नहीं था लेकिन मनुष्य को इंसानियत की सीख दे गया। आप भी हैरत में पड़ गए होंगे कि आखिर किसकी बात हो रही। दरअसल ये एक कुत्ते का वाकया है, जिसकी मौत होने पर ग्रामीणों ने एक नई पहल की शुरुवात की है। उसका मनुष्य की तरह विधि विधान से अंतिम संस्कार किया गया। उसे पूरा गांव श्यामलाल के नाम से पुकारता था। कुत्ता होकर भी कभी कुत्तों के साथ नहीं रहता था। आज जब उसकी मौत हुई तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। लोगो की आंखे नम हो गयी। वैसे तो ये परंपरा मनुष्यों के लिए ही लोग अपनाते हैं लेकिन जनपद के मुरीदपुर गांव के ग्रामीणों ने इस कुत्ते की मौत के बाद अर्थी बनाकर उसकी शव यात्रा निकाली और हिंदू रीति-रिवाज और ढोल नगाड़े बजाते हुए उसका यमुना नदी में ले जाकर अंतिम संस्कार किया है।

 

कुत्ते की निकाली गई शव यात्रा

ये हैरत अंगेज दास्तान कानपुर देहात के मुरीदपुर गांव की है, जहां लगभग 12 वर्षों से एक कुत्ता सभी का दुलारा बना हुआ था। लोगों ने प्यार से इसका नाम श्यामलाल रख दिया था। गांव के ग्रामीणों की माने तो बताया जा रहा है कि कभी कुत्तों के साथ रहता ही नहीं था। हमेशा किसी ना किसी के घर या चबूतरे पर ही रहता था। ना किसी को भौंकना ना किसी को काटता था। कोई कुछ भी खाने दे, वही खा लेता था। कुत्ता होने के बावजूद कुत्तों की आदतों से भिन्न था। दरअसल बीते 5 सितम्बर को बाइक की टक्कर से वह जख्मी हो गया था। तब से लगातार उसका इलाज कराया जा रहा था।

 

ग्रामीण बोले तेरहवीं संस्कार भी होगा

कई पशु चिकित्सकों से उसका उपचार कराया गया लेकिन आज सुबह उसकी मौत हो गई, इससे पूरा गांव उदास हो गया। बेहद लगाव होने के चलते गांव वालों ने विधि विधान से उसकी अर्थी बनाई, फूल, दक्षिणा चढ़ाई। इसके बाद ग्रामीणों की भीड़ के साथ शव यात्रा निकालते हुए युमना नदी कालपी में उसका जल प्रवाह कर दिया। यहां के ग्रामीण ने बताया कि श्याम लाल की मौत होने से गांव में मातम सा छा गया है। अंतिम संस्कार करने के बाद उसका तेहरवीं संस्कार भी किया जाएगा।

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned