कुछ ऐसे हैं भईया अखिलेश, झूठ से दूर और सच से प्यार

अखिलेश यादव जब यूपी के सीएम थे तो कई ऐतिहासिक फैसले किए...

By: Vinod Nigam

Published: 20 Jul 2018, 09:40 AM IST

कानपुर. जून 1973 का आखरी सप्ताह चल रहा था। मुलायम सिंह किसानों और मजदूरों के लिए लड़ रहे थे, तो सैफई स्थित उनके घर के अंदर-बाहर चहल-कदमी बढ़ गई। जुलाई की सुबह मुलायम की पत्नी माल्ती देवी ने एक बच्चे को जन्म दिया। पूरे गांव में ढोल नगाड़े बजने लगे। नेता जी के घर आनंद भैयों, जय कन्यैया लाल के गीत से पूरी गलियां सराबोर हो गईं। दूसरे दिन मुलायम सिंह अपनी पत्नी और बेटे को देखने आए और उसी वक्त उनके एक ज्योतिषी ने कहा था कि नेता जी लल्ला कुछ अलग करेगा और जो ठान लेगा उसे पूरा कर के ही दम लेगा। 2012 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली जीत के बाद जब अपने टीपू को यूपी की सत्ता मुलायम सिंह ने सौंपी तो उन्होंने उस वक्त कहा था कि अखिलेश अपने को कमजारे नहीं होने देना। राजनीति के मैदान में तुम्हें तूफानों से भिड़ना पड़ेगा पर झुकने के बजाए सच के साथ खड़े रहना। अखिलेश अपने पिता की बात मान उन्हीं के बताए रास्ते पर चल पड़े और एक वक्त ऐसा आया कि उन्हें सुल्तान के साथ दो-दो हाथ करने को मजबूर होना पड़ा। पर वो झूठ के बजाए सच के साथ खड़े रहे और अपने ही पिता को सियासत में मात देकर सिद्ध कर दिया कि वो आने वाले वक्त में देश के एक बड़े नेता के रूप में पहचान बनाएंगे।

 

कार रोक कर पहुंचाया अस्पताल

अखिलेश यादव जब यूपी के सीएम थे तो कई ऐतिहासिक फैसले किए, जिसमें उन्हें सियासत में नुकसान भी उठाना पड़ा पर वह झुके नहीं, बल्कि डट कर सामना किया। तीन दिन पहले उन्होंने ऐसा काम किया, जिसे आज के वक्त कोई और जनप्रतिनिधि नहीं कर सकता।। मंगलवार सुबह 10 बजे करीब लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे पर हसनगंज थाना क्षेत्र के ताला सरांय गांव के सामने टायर फटने से तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई। हादसे में कार सवार वृंदावन के एक आश्रम के महंत आनंदेश्वरदास, प्रभाकरदास और कर्नाटक निवासी धीरा उर्फ माधवदास पुत्र सुरेश कुमार कार में फंस गए। इसी बीच आगरा की ओर जा रहा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का काफिला गुजरा। मदद के लिए छटपटाते घायलों को देखकर पूर्व मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवा कर सभी को कार से बाहर निकलवाया। महंत आनंदेश्वरदास और प्रभाकरदास की हालत गंभीर देख उनको अपने एस्कॉर्ट वाहन से उनको लखनऊ भिजवाया।

 

खजांची का मनाया जन्मदिन

अखिलेश यादव ने नोटबंदी के दौरान बैंक की कतार में जन्मे बच्चे का नाम खंजाची रखा और उसके पहला जन्मदिन मनाया। अखिलेश यादव ने अपने पैतृक गांव सैफई में खंजाची के पूरे परिवार को बुलाकर न सिर्फ जन्मदिन मनाया बल्कि उसका स्वास्थ्य परिक्षण भी कराया। अखिलेश यादव को खजांची की मां ने बताया कि वह कई दिनों से बीमार चल रहा है। इलाज के लिए अब तक वह डॉक्टर को 60 हजार रुपये दे चुकी हैं।अखिलेश ने खजांची का पूरा चेकअप करवाया और उसे दवाएं दिलवाईं। अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने 2 लाख रुपये खजांची के भविष्य के लिए दिए थे लेकिन उसमें से 60 हजार रुपये डॉक्टर ले गए। बीजेपी सरकार को चाहिए था कि उनकी सरकार है कम से कम खजांची का इलाज तो फ्री में करवा देते।

 

स्कूल से लेकर राजनीति सफर

अखिलेश यादव ने अपनी स्कूली शिक्षा इटावा के इसाक मेमोरियल स्कूल में पढ़ाई की फिर राजस्थान के ढोलपुर मिलिटरी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की। जयाचामाराजेंद्र कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मैसूर से उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। उन्होंने सिडनी विश्वविद्यालय से पर्यावरण अभियांत्रिकी में परास्नातक किया। पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद अखिलेश ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन की। सपा में शामिल होने से पहले उन्होंने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के जीवन व उनके विचारों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने यह सब एक अच्छा समाजवादी बनने के लिये किया। वर्ष 2000 में अखिलेश ने कन्नौज से उपचुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उसके बाद 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में अखिलेश यादव ने लगातार जीत दर्ज कर इस सीट पर अपना कब्जा बनाये रखा। अखिलेश की शादी डिम्पल यादव से हुई और उनके तीन बच्चे हैं।

 

देश के सबसे कम उम्र के बनें सीएम

साल 2012 में जब सपा ने यूपी चुनावों में भारी जीत दर्ज की तो वो यूपी के मुखिया बने। देश के सबसे कम उम्र के सीएम अखिलेश यादव ने पांच साल के दौरान युपी के सवांरने के लिए कई कार्य किए। हमेशा मुस्कुराकर अपनी बात कहने वाले अखिलेश अपने संगठन में मिस्टर कूल के नाम से फेमस हैं। अखिलेश यादव को फुटबॉल खेलना व देखना काफी पसंद है। हालांकि क्रिकेट भी वो अच्छा खेलते हैं, लेकिन मैसूर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान क्रिकेट मैच खेलते वक्त नाक पर लेदर की गेंद लगने के बाद उन्होंने क्रिकेट छोड़ दिया। उनका पसंदीदा खिलाड़ी रोनाल्डो है और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर। अखिलेश जब भी सैफई जाते हैं, वहां अपने गांव के खेतों में पैदल घूमना पसंद करते हैं।

 

सरला चाची ने सिखाई फर्राटेदार अंग्रेजी

पिता मुलायम सिंह यादव जब राजनीति में घनघोर व्यस्त रहा करते थे तो अखिलेश की घर और स्कूल की पढ़ाई की देख-रेख शिवपाल और उनकी पत्नी सरला ही करती थीं। राजनीति के बीहड़ों में लड़ते हुए जब मुलायम सिंह की जान तक को ख़तरा था तो उन्होंने तब अपने एक मात्र पुत्र अखिलेश को सुरक्षा कारणों से स्कूल से निकाल कर घर बैठा दिया था। इसी दौरान चाची ने उन्हें 1980 से 1982 के उन दो सालों में चाची सरला उसे घर पर पढ़ाया करती थीं। सरला यादव अंग्रेजी से एमए किए हुए हैं और उन्होंने टीपू को अंगेजी में दक्ष बनाया है।

 

जेठानी की भी की सेवा

अखिलेश यादव की मां मालती देवी अक्सर बीमार रहती थीं तो उनकी देखरेक्ष चाची सरला ही किया करती थीं। शिवरतन न बताया कि 1983 में जब अखिलेश को धौलपुर मिलिट्री स्कूल में भर्ती कराया गया तो चाचा शिवपाल ही उन्हें इटावा से वहां लेकर गए थे। भर्ती की सारी औपचारिकताएं शिवपाल ने पूरी कीं क्योंकि मुलायम को फ़ुर्सत नहीं होती थी। स्कूल में अखिलेश के गार्जियन शिवपाल और सरला यादव थे। चाचा-चाची ही अखिलेश से मिलने धौलपुर जाया करते थे। शिवपाल के सक्रिय राजनीति में चले जाने से चाची मैसूर के इंजीनियरिंग कॉलेज में अखिलेश से मिलने जाया करती थीं। चाची सरला अपने टीपू के मनपसंद आटा और खोए के लड्डू ले जाया करती थीं। इतना ही नहीं चाची ने अखिलेश यादव को सपा के गठन की जानकारी फोन के जरिए दे दी थी।

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