निपाह वायरस से डरा शहर,अर्लट पर उर्सला और हैलट

केरल में मचा रहा कोहराम, कानपुर का स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दिए निपटने के इंतजाम

By: Vinod Nigam

Published: 24 May 2018, 05:48 PM IST

कानपुर। केरल में दस से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतारने के बाद पूरे देश में निपाह वायरस को लेकर सरकारी व प्राईवट अस्पतलों को अर्लट पर रखा गया है। कानपुर से केरल जाने वाले पर्यटकों ने अपने-अपने टिकट कैंसिल करवा दिए हैं। साथ ही वहां से आने वाले लोगों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम नजर बनाए हुए है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने उर्सला सहित अन्य अस्पतालों को अलर्ट किया है। निपाह जैसे लक्षणों वाला कोई भी मरीज आने पर तुरंत इलाज शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हैलट के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर विकास गुप्ता ने बताया कि यह बीमारी यूपी में नहीं हैं, बावजूद आमशहरी को फल, सब्जी और घर की साफ सफाई रखनी होगी। घर में चमगादड़ दिखने पर उसे वहां से निकालें और सुंअरों से दूरी बनाए रखें। जबकि उर्सला के एसीएमओ एवं वेक्टर बॉर्न डिसीज के प्रभारी डॉक्टर आरएन सिंह ने बताया कि शासन से अभी तक इस संबंध में कोई आदेश नहीं आया है। फिर भी एहतियात के तौर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है और एक आईसीयू वार्ड को अर्लट पर रखा गया है।
केरल में बरपा रहा कहर
केरल में निपाह वायरस के दस्तक से दिल्ली से लेकर कानुपर तक हंडकंप मच गया। केरल में इस जानलेवा बीमारी से अब तक दस लोगों की मौत हो चुकी है। निपाह वायरस के कारण सबसे पहले कोझिकोड जिले में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हुई थी। इस परिवार का इलाज कर रही नर्स ने भी तेज बुखार के कारण दम तोड़ दिया। जिले के अस्पतालों में जांच कराने वालों की लंबी कतार लगी है। राज्य के विभिन्न अस्पतालों में र्दजनों लोग भर्ती हैं। हैलट अस्पताल के डॉक्टर विकास गुप्ता ने बताया कि इस वायरस से प्रभावित लोगों को सांस लेने की दिक्कत होती है। संक्रमित मरीज को आमतौर पर बुखार, सिरदर्द, उनींदापन, मानसिक भ्रम, कोमा, विचलन होता है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत भी सकती है। इंसानों में निपाह वायरस एन्सेफलाइटिस से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है। डॉक्टर गुप्ता मुताबिक कुछ मामलों में 24-28 घंटे के अंदर लक्षण बढ़ने पर मरीज कोमा में भी चला जाता है।
कुछ इस तरह से फैलता है वायरस
डॉक्टर विकास गुप्ता ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट को हमने पढा था। जिसमें बताया गया था कि निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों में फैलता है। चमगादड़ और फ्लाइंग फॉक्स मुख्य रुप से निपाह और हेंड्रा वायरस के वाहक माने जाते हैं। यह वायरस चमगादड़ के मल, मूत्र और लार में पाया जाता है। आरएनए या रिबोन्यूक्लिक एसिड वायरस परमिक्सोविरिडे परिवार का वायरस है, जो कि हेंड्रा वायरस से मेल खता है। ये वायरस निपाह के लिए जिम्मेदार होता है। यह इंफेक्शन फ्रूट बैट्स के जरिए फैलता है। शुरुआती जांच के मुताबिक खजूर की खेती से जुड़े लोगों को ये इंफेक्शन जल्द ही अपनी चपेट में ले लेता है। डॉक्टर विकास गुप्ता ने कहा कि चिंता की वजह यह है कि निपाह के इलाज के लिए अब तक किसी सटीक इलाज की खोज नहीं हो सकी है। डॉक्टर विकास की गुप्ता की मानें तो इसके इलाज के लिए न तो कोई दवा है और न ही इससे बचाव के लिए कोई टीका ईजाद किया गया है।
बचाव ही बचने का रास्ता
डॉक्टर विकास गुप्ता ने बताया कि निपाह वायरस का इलाज खोजा नहीं जा सका है। इसी वजह से मलेशिया में निपाह वायरस से संक्रमित करीब 50 फीसद लोगों की मौत हो गई। हालांकि प्राथमिक तौर पर इसका कुछ इलाज संभव है। हालांकि रोग से ग्रस्त लोगों का इलाज मात्र रोकथाम है। इस वायरस से बचने के लिए फलों, खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए। पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। इसे रोकने के लिये संक्रमित रोगी से दूरी बनाए रखने की जरूरत होती है। मरीज का देखभाल वायरस से ठीक करने का एकमात्र तरीका है। संक्रमित जानवर खासकर ***** को हमेशा अपने से दूर रखें।

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