कानपुर-बुंदेलखंड में भाजपा ने अपनाया सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला

कानपुर-बुंदेलखंड में भाजपा ने अपनाया सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला

Vinod Nigam | Publish: Apr, 24 2019 09:15:02 AM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मार्च में बूथ सम्मेलन कर चुनाव का किया था शंखदान, फिर पीएम ने भी हुंकार, 29 से पहले आखरी वार के लिए भाजपा की फौज तैयार।

कानपुर। चुनाव की डुगडुगी बजते ही गंगा के इस पार तो यमुना के उस पार हलचल चरम पर है। सत्ता का रास्ता कुछ हद तक इन्हीं दो नदियारें के बीच से होकर जाता है। इसी के चलते भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिछले तीन माह के दौरान दो बार कानपुर का दौरा कर चुके हैं। भाजपा ने यहां की 10 में से 10 सीटों पर कमल खिलाने के लिए मायावती के सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला आजमाते हुए जातीय समीकरण के तहत उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं। साथ ही इन क्षेत्रों में जिस समाज के वोट ज्यादा संख्या में है उसी वर्ग के नेताओं की चुनाव प्रभारी बनाया गया है। बतादें कानपुर-बुंदेलखंड के 17 जिलो की 10 में 9 लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। सिर्फ कन्नौज सीट सपा के पास है।

मतदान से पहले पीएम की रैली
सपा और बसपा के पुराने किले पर कब्जा बरकरार रखने के लिए अमित शाह और उनकी टीम ने अखिलेश और मायावती को उन्हीं के जाल में फंसा कर सियासी अखाड़ा जीतने के लिए रणनीति बनाई है। एक-एक सीट पर जातीय समीकरण के तहत उम्मीदवारों को टिकट दिए गए हैं। साथ हर एक सीट पर चुनाव प्रभारी भी नियुक्त कर दिए गए हैं। इसके अलावा मतदान से दो दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी बांदा और कन्नौज में जनसभा करेंगे। इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ के बाद उमा भारती, पियूष गोयल, राजनाथ सिंह, दोनों डिप्टी सीएम हरदिन रैली कर भाजपा के पक्ष में महौल तैयार कर रहे हैं।

सपा के गढ़ में बुना जाल
भारतीय जनता पार्टी ने ब्राम्हण बाहूल्य कानपुर सीट से मंत्री सत्यदेव पर दांव लगाया है तो वहीं अकबरपुर से देवेंद्र सिंह भोल को फिर से टिकट थमाया। फर्रुखाबाद सीट से मुकेश राजपूत, फतेहपुर से साध्वी निरंजन ज्योति, कन्नौज से सुब्रत पाठक और इटावा से अशोक दोहरे की जगह रामशंकर कठेरिया को बीजेपी ने उम्मीदवार घोषित किया है। इन पांचों सीटों पर भाजपा ने सीधे जातीय समीकरण साधते हुए जिताऊ प्रत्याशियों को टिकट दिया है। पांचों सीटों पर उम्मीदवारों का अपने-अपने समाज में गहरी बैठ है और जीत-हार में भी इनकी अहम भूमिका रहती है।

दो के टिकट काटे
पिछले चुनाव में बुंदेलखंड के चार लोकसभा सीट, बांदा-चित्रकूट से भैरो प्रसाद मिश्र, हमीरपुर-महोबा से पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, जालौन-उरई से भानु प्रताप सिंह वर्मा और झांसी-ललितपुर से उमा भारती विजयी हुई थीं। भाजपा को बुंदेलखंड से 19,19,515, सपा को 9,43,168, बसपा को 8,77,859 लाख वोट मिले थे। अब सपा व बसपा के एक साथ आने से भाजपा ने पूरी रणनीति बदल दी है। भाजपा ने इन 10 सीटों पर उन्हीं को टिकट दिया है, जिनका लोकसभा सीट पर अपने-अपने समाज के वोट हैं। झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट पर उमा भारती के चुनाव लड़ने से इंकार के बाद बीजेपी ने उद्योगपति अनुराग शर्मा को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। बांदा सीट से भैरो सिंह की जगह विधायक आरके पटेल को चुनावी मैदान में उतारा है।

बसपा के किले पर खिला कमल
दो दशक से ज्यादा समय तक बुंदेलखंड में बसपा और सपा का राज चला आ रहा था। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 19 सीटों में से सिर्फ दो पर जीत हासिल की थी, वहीं सपा ने पांच तो कांग्रेस एक सीट फतह कर सकी थी, बाकि पर बसपा का कब्जा था। 2014 के लोकसभा चुनाव में उतरने से पहले अमित शाह को यूपी का प्रभारी बनाया गया। उन्होंने मानवेंद्र सिंह और ओममाथुर को यहां की बागडोर सौंपी और रूमा में बूथ अध्यक्ष सम्मेलन के जरिए चुनावी शंखदान किया था। जिसका नतीजा रहा कि यहां की चारों सीटों पर कमल खिला। यहां करीब 80 लाख मतदाता हैं। जिसमें 12 फीसदी दलित और 10 फीसदी मुस्लिम हरबार जीत हार में अहम रोल अदा करते आ रहे हैं।

खड़ी की दी पूरी टीम
अमित शाह ने इन 10 सीटों की जिम्मेदारी सुनील बंसल और मान्वेद्र सिंह को सौंपी हुई है। दोनों नेता पिछले एक साल से ं कमल खिलाने के लिए जमीन तैयार करने में जुटे हैं। कानपुर-बुदंलखंड के 17 जिलों में भाजपा ने 20 हजार बूथ प्रमुख तो 25 विस्तारकख् 148 मंडल अध्यक्ष, और दलित, ओवीसी व अल्पसंख्यक समाज का पूरा अगल संगठन तैयार किया। वहीं 10 हजार महिला बूथ अध्यक्ष के साथ ही दलित, महादलित की टीमें भी बनाई हुई हैं। बतादें विधानसभा चुनाव में 52 में से 47 सीटों पर भाजपा का कब्जा है।

 

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