भारतीयों पर कोरोना क्यों है बेअसर, इसकी पड़ताल करेंगे डाक्टर्स-वैज्ञानिक

देश के 21 राज्यों के 69 जिलों में शोध करेगा भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद
कोरोना से प्रभावित यूपी के 9 जिलों से एकत्र किए जाएंगे संक्रमितों के सैंपल
औरैया जनपद से नमूने लेने का काम समाप्त, अब कानपुर-लखनऊ की बारी

कानपुर। लॉकडाउन का चरण पूरा होने जा रहा है और देश के कई इलाकों में काफी हद तक छूट दी जा चुकी है। अब अगले लॉकडाउन से पहले यह पता लगाया जा रहा है कि लोगों का शरीर कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए कितना तैयार हो चुका है। हालांकि देश में जैसे-जैसे संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है उसी तेजी से ठीक होने वालों की संख्या में भी तेजी आ रही है। देश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या बहुत मामूली है। यहां तक कि डॉक्टरों का यह भी दावा है कि मरने वाले मरीज किसी दूसरी गंभीर बीमारी से पीडि़त थे और केवल कोरोना से मरने वालों की संख्या बहुत मामूली है। पूरी दुनिया में हाहाकार मचाने वाला कोरोना वायरस भारतीयों पर बेअसर क्यों है इसके लिए आईजी-जी एंटीबॉडी टेस्ट कराया जाएगा। इससे पता चलेगा कि लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कोरोना के मुकाबले कितनी मजबूत है। इसके लिए आईसीएमआर ने यूपी के 9 जिलों समेत देशभर के 21 प्रांतों के 69 जिलों में लोगों के शिरा रक्त (वीनस ब्लड) सैंपल लेकर टेस्ट कराने का फैसला किया है।

क्या है आईजी-जी एंटीबॉडी
आईसीएमआर की ओर से लिए जा रहे इन सैंपलों के जरिए भारतीयों के शरीर में कोरोना वायरस से लडऩे के लिए इम्युनोग्लोबुलिन जी (आईजी-जी) एंटीबॉडी की मौजूदगी का आंकलन किया जाएगा। यह एंटीबॉडी कोरोना जैसे एक संक्रमण के फैलने या टीकाकरण के बाद शरीर में बनने लगती है। आईजी-जी के अलावा शरीर में और भी एंटीबॉडी पायी जाती है। आईजीजी एक संक्रमण या टीकाकरण के बाद बनने लगती है।

कई प्रकार की होती है एंटीबॉडी
शरीर में इम्युनोग्लोबुलिन ए एंटीबॉडी श्वसन तंत्र और पाचन तंत्र के स्तर, लार (थूक), आंसू और स्तन के दूध में पाई जाती है। इम्युनोग्लोबुलिन जी सबसे आम एंटीबॉडी है। यह रक्त और शरीर के अन्य तरल पदार्थों में है और बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण से बचाती है। इम्युनोग्लोबुलिन एम एंटीबॉडी मुख्य रूप से रक्त और लसीका द्रव में पाई जाती है, यह पहली एंटीबॉडी है जो शरीर तब बनाता है जब उसे एक नया संक्रमण लडऩा होता है। इम्युनोग्लोबुलिन ई एंटीबॉडी आम तौर पर रक्त में कम मात्रा में पाई जाती है। अधिक मात्रा हो सकती है जब शरीर एलर्जी के लिए बढ़ जाता है या किसी परजीवी से संक्रमण से लड़ रहा होता है। इसके अलावा इम्युनोग्लोबुलिन डी एंटीबॉडी कम से कम समझी जाने वाली एंटीबॉडी है, रक्त में केवल थोड़ी मात्रा में रहती है।

अगले चरण में कानपुर जिला शामिल
भारतीय आयुर्विान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रो. बलराम भार्गव की ओर से वीनस ब्लड सैंपल के लिए सभी राज्य सरकारों को गाइडलाइन जारी की गई है। उसी कड़ी में यूपी में भी प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने नौ जिलों का चयन कर स्वास्थ्य विभाग को सैंपलिंग सर्वे के लिए आईसीएमआर की सहयोगी संस्थाओं को सहयोग करने के निर्देश दिए हैं, इनमें राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं माइक्रोबैक्टीरियल रोग संस्थान आगरा, क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान केन्द्र गोरखपुर और राष्ट्रीय कैंसर एवं अनुसंधान संस्थान नोएडा हैं। यूपी के औरैया, उन्नाव, बरेली, सहारनपुर, गौतमबुद्ध नगर, मऊ, गोंडा, बलरामपुर और अमरोहा में शिरा रक्त लेने का काम पहले चरण में होगा। फिर दूसरे चरण में कानपुर जिला शामिल किया जाएगा।

Corona virus
आलोक पाण्डेय
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