मायावती ने फर्रूखाबादी को दी बड़ी जिम्मेदारी, सीएम शिवराज सिंह के गढ़ में दौड़ाएंगे हाथी

कनपुर जोन के कोआर्डिनेटयर रहे फर्रूखाबाद के निवासी डॉक्टर अशोक स्द्धिर्थ को दिया गया एमपी का प्रभार, कर्नाटक की तरह यहां भी बनाएंगे सेकुलरवार सरकार

By: Vinod Nigam

Published: 23 Jul 2018, 02:25 PM IST

कानपुर। लोकसभा चुनाव का शंखदान हो चुका है। सभी राजनीतिक दल अपने तरकस से सारे तीर निकला कर मैदान में उतर चुके हैं। भाजपा से मुकाबले के लिए महागठबंधन की भी अंदरखाने तैयारी चल रही है तो वहीं बसपा प्रमुख मायावती के नजर दो राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में लग गई है। मायावती ने कर्नाटक में अहम किरदार निभाने वाले फर्रूखाबाद निवासी राज्यसभा सांसद डॉक्टर अशोक सिद्धार्थ को मध्यप्रदेश का प्रभार सौंप सटीक चाल चल दी है। इसी के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जानकारों की मानें तो बसपा प्रभारी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी और जल्द ही बैठक कर सीटों का बंटवारा करेंगा। यदि बसपा के साथ मिलकर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी तो बुंदेलखंड के छह जिलों के अलावा कई क्षेत्रों में दलित मतदाता पंजे के साथ आ सकता है।
बसपा के चाणक्य रूप में पहचान
नसीमुद्दीन सिद्दकी के बसपा से हटाए जाने के बाद डॉक्टर अशोक सिद्धार्थ का कद पार्टी में बड़ गया। बसपा प्रमुख ने उन्हें कर्नाटक और राज्यस्थान का प्रभारी बनाया। डॉक्टर सिद्धार्थ के चलते बेंगलुरू में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बनीं। डॉक्टर सिद्धार्थ पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक हैं। मायावती डॉक्टर सिद्धार्थ के अलावा सतीश मिश्रा से मंथन के बाद ही कोई बड़ा कदम उठाती हैं। जानकारों की मानें तो मायातवी से बिना समय लिए और बिना जांच के दो नेताओं को मिलने की अनुमति है। यह दोनों नेता किसी भी वक्त बसपा प्रमुख से मिल सकते हैं। पहले सिर्फ इसकी इजादत पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी को मिली थी। जानकारों का कहना है कि मायावती ने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह को राहुल गांधी पर तिपण्णी पर नहीं बल्कि, एक खास समाज के लोगों पर जुमले के चलते बाहर किया है।
कर्नाटक में निभाया था अहम रोल
मायावती ने कर्नाटक का प्रभार डॉक्टर अशोक सिद्धार्थ को दिया हुआ था। वह विधानसभा चुनाव से दो माह पहले बेंगलुरू पहुंच गए थे और एचडी देवगौड़ा के दल के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा। जहां बसपा के दक्षिण में पहली बार खाता खुला।मतगणना के बाद किसी भी दल को जब बहुमत नहीं मिला तो डॉक्टर सिद्धार्थ एक्शन में आए और मायावती से बात कर सोनिया गांधी को एचडी देवगौड़ा से बात करने को कहा। मायावती ने सोनिया गांधी से बात कर कुमास्वामी को सीएम बनाए जाने को कहा। सोनिया गांधी ने तत्काल एचडी देवगौड़ा से बात की और कर्नाटक में कांग्रेस, बसपा और कुमास्वामी की सरकार बन गई। कर्नाटक में मिली सफलता के बाद डॉक्टर सिद्धार्थ को मायावती ने मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी दी। डॉक्टर सिद्धार्थ एमपी में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। लड़ेगी।
--- तो छोड़ दी सरकारी नौकरी
बहुजन समाज पार्टी के राज्यसभा प्रत्याशी डा.अशोक सिद्धार्थ ने फर्रुखाबाद जिले के गुरसहायगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनाती के दौरान मायावती के निर्देश पर वर्ष 2008 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति शुरू की और 2009 में विधानपरिषद के सदस्य बन गए। कायमगंज के पटवन गली निवासी डॉक्टर सिद्धार्थ ने मेडिकल कालेज झांसी से आर्थोमेट्री डिप्लोमा प्राप्त किया है। सरकारी सेवा के दौरान बामसेफ से जुड़े रहे और इन दिनों वह बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी, चित्रकूट मंडल के साथ ही कानपुर मंडल के जोनल कोआर्डीनेटर के रूप में कार्य कर रहें है। बसपा प्रमुख ने अशोक सिद्धार्थ को कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल तथा पुडुचेरी राज्य का स्टेट कोआर्डिनेटर का दायित्व भी सौंप रखा है। 51 वर्षीय डा.सिद्धार्थ की पत्नी सुनीता वर्ष 2007 से 2012 तक राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं।
..तो मजबूर सरकार बनाएंगे
राज्यसभा सांसद डॉक्टर सिद्धार्थ को मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी मिलने के बाद वो हाथी को रफ्तार देने के लिए संगठन के अलावा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करनी शुरू कर दी हैं। बसपा का एमपी में करीब एक दर्जन जिलों में अच्छा प्रभाव है। वहा वोटर्स 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को वोट दिया था। वहीं डॉक्टर सिद्धार्थ ने कहा कि इस बार मध्य प्रदेश में बसपा की सरकार ही बनेगी। हम यदि मजबूत सरकार नहीं बना सके तो मजबूर सरकार बनाएंगे। लेकिन इस बार सरकार जरूर बनाएंगे। इसके लिए हमें अभी से तैयारी करना होगी और भाजपा की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंकना होगा। डॉक्टर सिद्धार्थ ने कहा कि यूपी में हुए उपचुनाव में जनता ने भाजपा को आइना दिखा दिया है। यहां भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा।

 

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