गणपति को टाॅफी के साथ पहनाई जाती बिस्कुट की माला, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने भी टेका था माथा

Vinod Nigam

Updated: 14 Sep 2019, 08:45:01 AM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी का कानपुर से गहरा नाता था। वह यहां के डीएवी काॅलेज से लाॅ की पढ़ाई की और आरएसएस की सदस्यता ली थी। पहली दफा जब अटज जी देश के प्रधानमंत्री बनें तो वह शहर आए। समय निकाल कर शिवाला के मार्केट चैराहे पर स्थित गणेश मंदिर में जाकर गणपति के दर्शन किए और फूलों के बजाए बिस्किट की माला पहनाई व प्रसाद के तौर पर टाॅफियां चढ़ाई थीं।

क्या है मंदिर का इतिहास
मंदिर के पुजारी के मुताबिक शिवाला स्थित 27 वर्ष पहले बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने भगवान गणेश मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर में विशान गणेश की प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहां आता है उसकी मुरादें भगवान गणेपति पूरी करते हैं। मंदिर प्रशासन ने यहां पर नियम भी बनाए हुए हैं। प्रसाद के तौर पर भक्त सिर्फ टाॅफियां चढ़ा सकते हैं तो वहीं फूलों के बजाए बप्पा को बिस्किट की माला पहनाई जाती है। पुजारी बताते हैं कि वैसे बप्पा को भोग के तौर पर लड्डू और मोदक पसंद है, पर इस मंदिर में सिर्फ टाॅफियां ही उनके चरणों में अर्पित की जाती हैं।

अटल जी भी रह गए थे दंग
पुजारी बताते हैं कि एनडीए की 11 दिन की सरकार के कार्यकाल के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी एक निजी कार्यक्रम में कानपुर आए थे। वह शहर में अपने मित्रों से मिलनें के लिए गए थे, तभी रास्ते में जब उन्हें इस मंदिर के बारे में जानकारी हुई तो वह सीधे यहां आ गए। मंदिर के बाहर बोर्ड में जब प्रसाद और फूलों की माला चढ़ाए जाने पर रोक लिखा देख वह हंस पड़े। उन्होंने मंदिर के नियमों के तहत टाॅफी और बिस्किट की माला भगवान गणेश को अर्पित की। अटज जी मंदिर की इस प्रथा से खुश थे और कहा था कि भगवान तो प्रेम के दाता हैं और मंदिर प्रशासन की इस पहल का हम स्वागत करते हैं।

इसलिए चढ़ाते हैं टाॅफी
वैसे गणेश महोत्सव पर हरदिन यहां पर हजारों भक्त आते हैं और गणपति बप्पा के दर्शन कर पुण्य कमाते हैं। लेकिन इस मंदिर में पूरे साल भक्तों का सुबह से लेकर तांता लगा रहता है। बच्चे, जवान, बुजुर्ग महिलाएं हाथों में बिस्किट की माला और टाॅफिया लेंकर आती हैं और गणेश भगवान के चरणों में अर्पित करती हैं। मंदिर के पुजारी कहते हैं कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा बालरूप की है और इसी के कारण मोदल व लड्डू के बजाए टाॅफी प्रसाद के तौर पर चढ़ाई जाती हैं।

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