बेहमई कांड को लेकर आज थी बड़ी तारीख, उस नरसंहार के आरोपी पोसा ने कुछ इस तरह कहा कि......

वादी राजाराम सिंह ने दुख जताते हुए न्याय न मिलने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान भी किया।

By: Arvind Kumar Verma

Updated: 06 Jan 2020, 10:21 PM IST

कानपुर देहात-देश के बहुचर्चित कानपुर देहात के बेहमई नरसंहार का फैसला आज फिर टल गया। आरोपियों के वकील द्वारा रूलिंग दाखिल करने के लिए समय की मांग के लिए दाखिल याचिका को कोर्ट ने स्वीकार करते हुए फैसला सुनाए जाने की तारीख 18 जनवरी कर दी है। वहीं आरोपी पक्ष के वकील को इसी माह की 16 तारीख तक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की रोलिंग पेश करने का समय तय कर दिया। वहीं कोर्ट में पेशी पर आये आरोपी पोसा ने अपने ऊपर लगाए गए सारे आरोप को नकार दिया।
फिलहाल फैसले की तारीख बढ़ाए जाने के बाद वादी राजाराम सिंह ने दुख जताते हुए न्याय न मिलने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान भी किया।

कुछ इस तरह रही नरसंहार की दास्तां

दरअसल कानपुर देहात जिले के गांव बेहमई 14 फरवरी 1981 को दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने अपने गिरोह के साथ गांव के 26 लोगों को बंधक बनाकर गोलियों से भून दिया था, जिसमें 20 लोगों की मौके पर मौत हुई थी। मामला 38 सालों से कानपुर देहात के जिला एवं सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित कोर्ट मे विचाराधीन है। जिस पर आज कोर्ट में फैसला होना था, लेकिन वहीं आरोपियों के वकील ने याचिका आज का कोर्ट में दायर कर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय की रूलिंग दाखिल करने का समय मांगा। जिस पर कोर्ट ने दोपहर 2 बजे सुनवाई की और सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित कोर्ट मे 18 जनवरी को अंतिम फैसले की तारीख मुकर्रर कर दी है। वहीं आरोपियों के वकील को 16 जनवरी तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग पर जो भी नजीरे बचाव पक्ष मे पेश करनी है, कर सकते है।

दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं ने कहा

वही डीजीसी क्रिमिनल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय की रूलिंग पेश करने के लिए आज आरोपी पक्ष के वकील ने बचाव याचिका देकर बहस के लिए समय मांगा था। जिस पर कोर्ट ने 16 जनवरी तक रूलिंग की नजीरे पेश करने व बहस का समय दिया है और साथ ही 18 जनवरी को बेहमई कांड पर अंतिम फैसले की तारीख मुकर्रर कर दी है। पीड़ितों को न्याय जरूर मिलेगा। वही इस नरसंहार के आरोपियों के वकील गिरीश नारायण दुबे की माने तो आज फैसला सुनाये जाने की तारीख नहीं थी, लेकिन आज यह निर्धारित जरूर होना था कि कब माननीय न्यायालय फैसला सुनाएगा। न्यायालय द्वारा जो भी फैसला आएगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।

पीड़ित व ग्रामीण बोले फिर मिली एक तारीख

वही आज बेहमई कांड को लेकर कोर्ट मे आने वाले फैसले को लेकर बेहमई नरसंहार कांड के पीड़ित सहित सैकड़ों लोग आज सुबह से ही कोर्ट मे पहुंच गए थे और 38 सालो से विचारधीन मामले पर फैसले का इंतजार कर रहे थे, लेकिन आरोपी पक्ष के वकील ने याचिका कोर्ट में दायर कर दी, जिसके बाद कोर्ट ने फैसले को स्थगित कर दिया और आरोपी पक्ष के वकील की दलील के बाद फैसले की तारीख 18 जनवरी मुकर्रर कर दी। जिसके बाद बेहमई गांव के पीड़ित व ग्रामीणों को न्याय की जगह मायूसी मिली और मिली फिर एक और तारीख। वहीं बेहमई कांड के मामले मे वादी राजाराम सिंह का कहना है कि कोर्ट व सरकार पर भरोसा नही रहा। जब आज फैसले की तारीख मुकर्रर थी। बाबजूद इसके कोर्ट के न्यायाधीश ने बहस याचिका कैसे स्वीकार कर ली। वर्षो से हम लोग न्याय कि उम्मीद मे बैठे थे, लेकिन आज तक न्याय नहीं मिल सका। कई गवाह और पीड़ित न्याय की उम्मीद में दुनिया छोड़ चुके हैं, लेकिन मिली तो सिर्फ तारीख।

फिर आरोपी पोसा ने कहा फांसी देे दो

वही बेहमई कांड के आरोपी पोसा 38 सालो से जेल में बन्द है। आज कोर्ट में बहस के लिये पोसा को पुलिसकर्मी पकड़कर सहारा देते हुए लाये थे। उसे पुलिस कर्मियों द्वारा पकड़कर सहारा देते हुए कोर्ट से बाहर लाया गया था। उसकी चलने की क्षमता भी नही बची है। कोर्ट से बाहर आने के बाद पोसा ने बताया कि मुझे निर्दोष फंसाया गया है। फूलन के साथ गलत हुआ था, जिसका बदला फूलन ने लिया था। न ही मैं बेहमई कांड में था और न ही मैं फूलन के गैंग में रहा हूं। मुझे पुलिस ने गलत फंसाया है। मेरा फैसला ऊपर वाला करेगा।

Arvind Kumar Verma
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