बिकरू कांड: जय बाजपेई के आरोपों को दबाने वाले एसपी भी दोषी, गिर सकती है गाज

तथ्यों और गवाहों के आधार पर एसआईटी की जांच में एसपी दोषी पाए गए हैं। उन पर भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

By: Arvind Kumar Verma

Published: 15 Nov 2020, 09:37 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

कानपुर-यूपी के बहुचर्चित बिकरू कांड में आरोपी बने कई पुलिस कर्मियों पर अभी तक कार्यवाही हो चुकी है। बावजूद अभी तमाम अफसरों पर गाज गिरना बाकी है। इस कांड में अभी लखनऊ में तैनात एक एसपी हैं। जिनका कानपुर में तैनाती के दौरान लंबा कार्यकाल रहा। इस घटना के मामले में तत्कालीन जांच अधिकारी ने चार जांच रिपोर्ट जय बाजपेई की उनको सौंपी थी, लेकिन किसी में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसमें भी उन पर आशंका व्याप्त हुई। साथ ही तथ्यों और गवाहों के आधार पर एसआईटी की जांच में एसपी दोषी पाए गए हैं। उन पर भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। मामले के अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने जय बाजपेई के खिलाफ आईजी से शिकायत की थी।

इसमें आरोप लगाया गया था कि आपराधिक इतिहास होेने के बावजूद जय लाइसेंसी असलहे रखता है। इसके अलावा कई अन्य आरोप भी जय पर लगे थे। इससे संबंधित चार शिकायतें की गई थीं। इन सभी जांचों को आईजी ने शहर में तैनात एक तत्कालीन सीओ एलआइयू को सौंप दी थी। बावजूद किसी भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब जब बिकरू कांड की जांच में सौरभ के बयान हुए तो उन्होंने ये पूरा मामला बता कागजात सौंप दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने जय को संरक्षण और शह देने में एसपी को भी दोषी माना है। दरअसल एसआईटी ने जांच में शस्त्र लाइसेंसों के मामलों को बहुत ही गंभीरता से लिया है। संभवत इसमें कई पुलिसकर्मी भी घेरे में आएंगे।

फिलहाल एसआईटी ने तत्कालीन एसपी ग्रामीण प्रद्युम्न सिंह को दोषी पाया है। एसपी प्रद्युम्न सिंह का करीब दो साल का कार्यकाल रहा। उस दौरान चौबेपुर क्षेत्र उन्हीं के क्षेत्र में आता था। विकास दुबे को टॉप-10 में शामिल न करना, केस से धारा कम करना और उसकी जमानत खारिज न कराने पर एसआईटी ने जिस तरह से तत्कालीन एसएसपी अनंत देव पर सवाल उठाए हैं, उसी तरह एसपी ग्रामीण प्रद्युम्न सिंह पर भी सवाल उठे हैं। सूत्रों के मुताबिक एसपी ग्रामीण विकास दुबे को बखूबी जानते थे। उन्होंने भी उसे संरक्षण दिया। चौबेपुर एसओ ने मेहरबानी की, इसकी भी जानकारी थी।

Arvind Kumar Verma
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