बंटवारे के बाद कांग्रेस के गढ़ पर खिला कमल का फूल

बंटवारे के बाद कांग्रेस के गढ़ पर खिला कमल का फूल
बंटवारे के बाद कांग्रेस के गढ़ पर खिला कमल का फूल

Vinod Nigam | Updated: 23 Sep 2019, 04:39:15 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

एशिया की सबसे बड़ी विधानसभा में थी शुमार, 2012 में नए परसीमन के बाद किदवईनगर सीट अस्तित्व में आई, मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होने की उम्मीद।

कानपुर। किसी समय एशिया की सबसे बड़ी विधानसभा के रूप में चर्चित गोविंद नगर विधानसभा के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होगा। राजनीतिक दल जीत-हार के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। बसपा चीफ मायावती ने यहां से देवी प्रसाद तिवारी को टिकट देकर चुनाव के मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने छात्र महिला नेता करिश्मा पर दांव लगाया है। जबकि भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले। 3 लाख 58 मतदाताओं वाली इस सीट पर करीब 1 लाख 60 हजार ब्राम्हण वोटर्स हैं, जो हार जीत में अहम रोल निभाते हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर 6 दफा जीत दर्ज की तो इतनी ही बार यहां से कमल का फूल खिला। 2012 में बंटवारे के बाद कांग्रेस को लगातार इो चुनाव में हार उठानी पड़ी और पंजे के गढ़ में कमल का फूल खिला।

21 अक्टूबर को मतदान
भारतीय जनता पार्टी के सत्यदेव पचौरी के कानपुर नगर सांसद चुने जाने के बाद गोविंदनगर सीट पर 21 अक्टूबर को वोट पड़ेंगे, जबकि गिनती 23 को होगी। चुनाव आयोग के तरीख के ऐलान के बाद जिले में आचार संहिता लागू हो गई। अपनी परम्परागत सीट पर कब्जे के लिए कांग्रेस एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। खुद पार्टी की राष्ट्रीय सचिव प्रियंका गांधी ने 21 सितंबर को पार्टी के पदाधिकारियों के साथ ही उम्मीदवार करिश्मा ठाकुर को दिल्ली तलब कर जीत का मंत्र दिया था। खुद रोड शो करने की रजामंदी भी दी थी। इसी के बाद कांग्रेस चुनावी दंगल को फतह करने के लिए जमीन पर उतर चुकी है।

6-6 बार जीते कांग्रेस-भाजपा
गोविन्द नगर विधान सभा हमेशा ही कानपुर की सबसे महत्वपूर्ण विधान सभा रही है। 1967, 1969, 1980, 1985, 2000 और 2007 में यहां से कांग्रेस जीती। वहीं 1989, 1991, 1993, 1996, 2012 और 2017के चुनाव में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी काबिज रही। सन 1974 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और 1970 में जनता पार्टी ने यहां से चुनाव जीता था। भारतीय जनता पार्टी के बाल चन्द्र मिश्र ने तो यहां से लगातार चार चुनाव जीते थे।

2012 से भाजपा का दबदबा
परसीमन के बाद गोविंद नगर सीट को दो हिस्सों में बांट दिया गया। जिसमें किदवईनगर से नई विधानसभा अस्तित्व में आई। गोविंदनगर का नाम बरकरार रही लेकिन इसमें ज्यादातर क्षेत्र नया जोड़ा गया। 2012 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सत्यदेव पचौरी गोविंद नगर विधानसभा से 57,156 मत पाकर के विजयी हुए थे। वहीं दूसरे स्थान पर कांग्रेस के डॉक्टर शैलेन्द्र दीक्षित को 44,779 मत मिले थे। 2017 के चुनाव में भाजपा सत्यदेव पचौरी को 1,12,029, कांग्रेस अंबुज शुक्ला 40,520, बीएसपी निर्मल तिवारी 28,795 को वोट मिले थे।

दूसरी बार बाई-इलेक्शन
गोविंद नगर विधानसभा सीट पर दूसरी बार बाई-इलेक्शन होगा। पहली बार इस सीट पर उपचुनाव 2 बार कांग्रेस से विधायक रहे विलायतीराम कात्याल की हत्या हो जाने कारण हुआ था। कत्याल की 1988 में आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उपचुनाव में भाजपा से बालचंद्र मिश्रा पहली बार विधायक बने थे। इस सीट पर भाजपा की तरफ से 50 नेताओं ने दावेदारी की है, जिनमें से सुरेंद्र मैथानी, हनुमन्त मिश्रा, निर्मल तिवारी, निर्मल तिवारी, गोविंद नगर से पार्षद नवीन पंडित के नाम शामिल हैं।

डेढ़ लाख ब्राम्हण मतदाता
गोविंदनगर में करीब 3 लाख 49 हजार 3 सौ 42 मतदाता हैं। जिसमें 1 लाख 60 हजार ब्राम्हण वोटर्स हैं। अनुसूचित जाति 50 हजार, पिछड़े वर्ग के 41 हजार, 21 हजार पंजाबी, 19 हजार, मुस्लिम मतदाता हैं। जबकि क्षत्रिय 13 हजार, वैष्य 9 हजार, सिंधी 14 हजार, अन्य 12 हजार 3 सौ 42 मतदाता हैं। ऐसे में सभी दलों की निगाहें यहां के सबसे अधिक मतदाता 1 लाख 60 हजार ब्राम्हण पर है। कांग्रेस उम्मीदवार करिश्मा ने दावा किया है कि उपचुनाव में पार्टी भाजपा को हरा देगी। भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि विरोधी दलों को जनता फिर से वोट की चोटर देकर कमल का फूल खिलाने जा रही है।

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