ये हैं सीएम योगी आदित्यनाथ की दीदी, कमर पर लगाकर चलती हैं पिस्टल

अगर कोई परेशान करता है तो उस पर तान देती हैं रिवाल्वर...

कानपुर. नगर निकाय चुनाव अपने चरम पर है। जीत-हार के लिए राजनीतिक दलों के प्रत्याशी गली-मोहल्लों की खाक छान रहे हैं और इनके किस्से कहानियां सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहे हैं। भाजपा की मेयर कैंडीडेट प्रमिला पांडेय को इंसानों के साथ-साथ बेजुबानों से गहरा लगाव है। इनके पास एक दर्जन से ज्यादा गायें हैं तो घर में कुत्ता, बिल्ली और कई पक्षु-पक्षी भी मौजूद हैं।

BJP mayor candidate Pramila Pandey

दीदी के नाम से बुलाते हैं सीएम योगी

प्रमिला पांडेय के करीबी अजय अग्निहोत्री बताते हैं कि भाजपा कार्यकर्ता इन्हें दीदी के नाम से पुकारते हैं। इतना ही नहीं प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ में जब भी कानपुर आते हैं तो इन्हें जरूर बुलाते हैं और प्रमिला दीदी प्रणाम जरूर कहते हैं। अजय बताते हैं कि उनको सांपो से भी डर नहीं लगता है। दीदी सांप को हाथ से पकड़ कर दूध पिलाती हैं और विषधारी किसी के घर पर दिख जाए तो उसे मारने नहीं देती, बल्कि पकड़कर खुद जंगल में छोड़ आती हैं।

 

 

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बड़े-बड़ों को मात देकर पाया टिकट

भाजपा ने पंद्रह दिनों की माथा-पच्ची के बाद कई कद्दावर चेहरों को नजरअंदाज कर जमीन से जुड़ी नेता प्रमिला पांडेय को कानपुर से मेयर पद का कैंडीडेट घोषित किया। जानकारों की माने तो संघ के साथ भाजपा के कई दिग्गज नेता अपने करीबियों को टिकट दिलवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए थे। वहीं प्रमिला पांडेय ने पार्टी की तरफ से मांगे गए आवेदन के अनुसार टिकट के लिए दावेदारी की थी। इनका नाम पहली सूची में नहीं था।

 

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सीएम योगी की करीबी

सीएम योगी आदित्यनाथ के विदेश से आने के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या बैठक कर प्रमिला पांडेय का चुनाव लड़ाए जाने की बात कही। जिस पर प्रदेश अध्यक्ष ने मुहर लगा दी। प्रमिला पांडेय को सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी नेताओं में माना जाता है। विधानसभा चुनाव के वक्त योगी आदित्यनाथ पनकी में जनसभा कर रहे थे, तब इनके बगल में प्रमिला को जगह मिली थी। प्रमिला ने भी जनसभा को संबोधित कर नीलिमा को जिताने के लिए गुहार लगाई थी।

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पति सरकारी बाबू, 1989 में ज्वाइन की बीजेपी

प्रमिला पाण्डेय मूल रूप से जौनपुर की रहने वाली है। प्रमिला पांडेय ने राजनीति की शुरूआत 1987 से की थी। प्रमिला पांडेय दो साल तक संध से जुड़ी रहीं और फिर 1989 में इन्होंने भाजपा ज्वाइन की। इनके पति कानपुर रजिस्ट्रार विभाग में बाबू के पद पर तैनात थे। प्रमिला पांडेय सिविल लाइन वार्ड 52 से दो बार पार्षद के लिए चुनी जा चुकी है। इसके बाद वह महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। रामंमदिर आंदोलन के दौरान प्रमिला पाडेय ने भाग लिया था और उमा भारती के बुलावे पर अपने सैकड़ो समर्थकों के साथ अयोध्या पहुंची थीं। प्रमिला पांडेय की गिनती भाजपा के तेज-तर्राक नेताओं में होती है। प्रमिला अपने कमर पर पिस्टल लेकर चलती हैं और अगर सरकारी बाबू किसी को परेशान करता है तो उस पर रिवाल्वर तान देती हैं।

 

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स्कूटी में चार झंडे लगाकर निकल पड़ती हैं प्रमिला

भाजपा के किसी भी प्रदर्शन में अपनी स्कूटी पर बीजेपी के चार झंडे लगाकर प्रमिला पाडेय को देखा जा सकता था। वह जमीनी स्तर की नेता है सभी उनका कार्यकर्ता उनका सम्मान करते है। लोग उन्हें चाची ,युवा दादी और हम उम्र के कार्यकर्ता दीदी के नाम से पुकारते है। लोगों का कहना है कि वे ऐसी नेता हैं कि आप उनके पास जाकर उनके साथ सेल्फी ले सकते हैं, उनसे बात कर सकते हैं।

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अकेले ही लेकर निकल पड़ीं ढोल

लोगों ने बताया कि जब विधानसभा चुनाव में मतगड़ना बीजेपी के पक्ष आई तो वह अकेले ही ढोल लेकर निकल पड़ी। इसके बाद उनके पीछे हजारो बीजेपी वर्करों की भीड़ निकल पड़ी। नागपंचमी के मौके पर वह सांप को पकड़ कर दूध पिलाती हैं। उनको देख कर सपेरे भी हैरानी में पड़ जाते है। सके साथ ही इन्हें बच्चों के साथ खलेने का भी शौक है।

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नितिन श्रीवास्तव
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