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GSVM Special News: दिमाग से खून के थक्के निकालना अब होगा आसान, जीएसवीएम के न्यूरो विभाग में होंगी हाईटेक सुविधाएं

अब इन आधुनिक उपकरणों से यहां न्यूरोलॉजिकल प्रोसिजर हो सकेंगे। इसके जरिए छोटे सा चीरा लगाकर दिमाग से खून के थक्के आसानी से निकाले जा सकेंगे। 200 करोड़ की लागत से मेडिकल कालेज के हैलट अस्पताल में मल्टी सुपर स्पेशलिटी ब्लाक बना है। यहां न्यूरो डायग्नोस्टिक विभाग में जापान से एडवांस सीटी स्कैन मशीन आ गई हैं, जिनकी कीमत साढ़े सात करोड़ रुपये है।

कानपुर

Published: November 19, 2021 01:25:08 pm

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. कानपुर मेडिकल कॉलेज में बने नए न्यूरो रेडियोडायग्नोस्टिक (Neuro Radio Diagnostic) विभाग में अब न्यूरोलाजिकल जांचों (Neurological Test) की सुविधा और प्रोसिजर भी किए जाएंगे। इसके लिए हाईटेक सीटी स्कैन व एमआरआइ मशीन सहित कई उपकरण मंगाए गए हैं। अभी तक दिमाग से खून के थक्के (Blood Clots From Brain) निकालने को लेकर रोगियों को समस्या रहती थी। मगर अब इन आधुनिक उपकरणों से यहां न्यूरोलॉजिकल प्रोसिजर हो सकेंगे। इसके जरिए छोटे सा चीरा लगाकर दिमाग से खून के थक्के आसानी से निकाले जा सकेंगे।
GSVM Special News: दिमाग से खून के थक्के निकालना अब होगा आसान, जीएसवीएम के न्यूरो विभाग में होगी हाईटेक सुविधाएं
GSVM Special News: दिमाग से खून के थक्के निकालना अब होगा आसान, जीएसवीएम के न्यूरो विभाग में होगी हाईटेक सुविधाएं
200 करोड़ की लागत से तैयार मल्टी सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक

इससे ब्रेन की एंजियोग्राफी भी संभव होगी। इसके अतिरिक्त दिमाग की नसों में ब्लाकेज, ट्यूमर और अन्य जटिलता का पता लगाया जा सकेगा। इस तरह उसका इलाज भी आसान होगा। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 200 करोड़ की लागत से मेडिकल कालेज के हैलट अस्पताल में मल्टी सुपर स्पेशलिटी ब्लाक बना है। यहां न्यूरो डायग्नोस्टिक विभाग में जापान से एडवांस सीटी स्कैन मशीन आ गई हैं, जिनकी कीमत साढ़े सात करोड़ रुपये है। उसकी क्षमता 128 स्लाइस अर्थात एक मिनट में 128 राउंड है।
हार्ट ब्रेन या किसी भी अंग की होगी एंजियोग्राफी

अब उपकरण स्थापित करने का कार्य शुरू है। इसकी मदद से अंदर के अंग की एक-एक नसों को आसानी से देखकर जा सकेगा। पीएमएसएसवाई के नोडल अफसर डा. मनीष सिंह का कहना है कि एडवांस टेक्नोलाजी की हाई डेफिनिशन स्कैन है, इसकी मदद से हार्ट, ब्रेन और शरीर के किसी भी अंग की नसों की एंजियोग्राफी की जा सकेगी। ब्रेन में खून की आपूर्ति का भी पता लगाया जा सकेगा। साथ ही रीढ़ की हड्डी का सीटी स्कैन भी संभव होगा।
सुपर स्पेशलिटी कोर्स में डीएम की होगी पढ़ाई

कई बार ब्रेन में नसों के गुच्छे यानी एनुरिजम हो जाता है। इससे नसों में खून की रुकावट होने से ब्लीडिंग का खतरा रहता है। ऐसे में नसों को ब्लीडिंग से बचाने के लिए अलग-अलग तरह के क्वाइल डालते हैं। न्यूरो डायग्नोस्टिक विभाग में सुपर स्पेशलिटी कोर्स में डीएम की पढ़ाई भी होगी। साथ ही मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सकीय सुविधाएं भी मुहैया होंगी।

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