scriptBritish Could not Fulfill Pandurang Rao's Last Wish Before Hanging | Independence Day 2021: कानपुर में शौर्यता के महारथी पांडुरंग राव से फांसी के पहले पूंछी अंतिम इच्छा, पूरी करने में अंग्रेज हटे पीछे | Patrika News

Independence Day 2021: कानपुर में शौर्यता के महारथी पांडुरंग राव से फांसी के पहले पूंछी अंतिम इच्छा, पूरी करने में अंग्रेज हटे पीछे

75th independence Day 2021-पेशवा पांडुरंग राव को 1862 में अंग्रेज गिरफ्तार करके कानपुर लाए,
-रानी लक्ष्मीबाई के सहयोग से पांडुरंग ने ग्वालियर पर कब्जा पाया

कानपुर

Published: August 14, 2021 12:54:26 pm

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. Independence Day 2021- 1857 के दौर में अंग्रेज अफसरों (British Officer) को सारे अधिकार प्राप्त थे। ऐसे में अंग्रेजी अफसरो के लिए लोगों पर अत्याचार और उन्हें फांसी पर चढ़ाना उनकी दिनचर्या बन चुकी थी। स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम (Freedom War 1857) 1857 के पांच वर्ष बीतने के बाद की बात है, जब रानी विक्टोरिया (queen Victoria) ने उदार नीति अपनाने की घोषणा की थी। मगर अंग्रेज अफसर बौखलाए थे, अपनी मनमानी कर वो क्रांतिकारियों को पकड़ रहे थे। नाना साहब के सौतेले भाई पेशवा पांडुरंग राव (Peshwa Pandurang Rao) जम्मू में थे, 1862 में अंग्रेज उन्हें जम्मू से गिरफ्तार करके कानपुर ले आए। इसके बाद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। इस बीच उनकी अंतिम इच्छा पूछी गई। उन्होंने अंतिम इच्छा बयां की, लेकिन उसे अंग्रेज पूरी करने में पीछे हट गए थे।
Independence Day 2021: कानपुर में शौर्यता के महारथी पांडुरंग राव से फांसी के पहले पूंछी अंतिम इच्छा, पूरी करने में अंग्रेज हटे पीछे
Independence Day 2021: कानपुर में शौर्यता के महारथी पांडुरंग राव से फांसी के पहले पूंछी अंतिम इच्छा, पूरी करने में अंग्रेज हटे पीछे
अंग्रेज जानते थे कि पांडुरंग राव बहुत अच्छे तैराक हैं

दरअसल नाना साहब के सौतेले भाई पेशवा पांडुरंग राव को जम्मू-कश्मीर में बंदी बना लिया गया। राव साहब को कानपुर लाकर उन पर 9 दिन मुकदमा चलाया गया। सेशन जज फ्रांसिस वायन पियर्सन ने दोषी करार देते हुए उन्हें फांसी की सजा सुनाई। 21 अगस्त की सुबह उन्हें फांसी दी गई। फांसी देने से पहले उनसे अंतिम इच्छा पूछी गई तो उन्होंने गंगा स्नान करने की बात कही। अंग्रेज जानते थे कि पांडुरंग राव अच्छे तैराक थे, इसलिए अंग्रेज कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इस वजह से अंग्रेज उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। कई अंग्रेजों की हत्याओं के मामले में उन्हें फांसी की सजा दी और उनकी समस्त संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया गया।
पेशवा पांडुरंग राव युद्ध में उम्दा शौर्य का प्रदर्शन किया

अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बावजूद नाना साहब पेशवा और अजीमुल्ला खां को नहीं पकड़ा जा सका। दरअसल पेशवा पांडुरंग राव क्रांतिकारियों को ऊर्जावान करने वाले क्रांतिकारी थे। और नाना साहब पेशवा के प्रतिनिधि थे। ग्वालियर पर अंग्रेज हनक जमाए हुए थे। उस दौरान तात्या टोपे ने ग्वालियर पहुंचकर अंग्रेज सेना में कार्यरत भारतीय सैनिकों को क्रांति के लिए उकसाया। इस तरह विद्रोही सैनिकों के साथ उन्होंने बुंदेलखंड में क्रांतिकारी शासन कायम किया। फिर सभी राजाओं को आजादी की जंग में सहयोग के लिए पत्र भेजा। उनके पत्र पर रानी लक्ष्मीबाई ने कोंच के युद्ध में हिस्सा लिया था। चरखारी, कोंच और कालपी के युद्ध में पांडुरंग राव ने उम्दा वीरता दिखाई। इस तरह पांडुरंग राव ने ग्वालियर पर कब्जा कर लिया था।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

Video Weather News: कल से प्रदेश में पूरी तरह से सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ, होगी बारिशVIDEO: राजस्थान में 24 घंटे के भीतर बारिश का दौर शुरू, शनिवार को 16 जिलों में बारिश, 5 में ओलावृष्टिदिल्ली-एनसीआर में बनेंगे छह नए मेट्रो कॉरिडोर, जानिए पूरी प्लानिंगश्री गणेश से जुड़ा उपाय : जो बनाता है धन लाभ का योग! बस ये एक कार्य करेगा आपकी रुकावटें दूर और दिलाएगा सफलता!पाकिस्तान से राजस्थान में हो रहा गंदा धंधाइन 4 राशि वाले लड़कों की सबसे ज्यादा दीवानी होती हैं लड़कियां, पत्नी के दिल पर करते हैं राजहार्दिक पांड्या ने चुनी ऑलटाइम IPL XI, रोहित शर्मा की जगह इसे बनाया कप्तानName Astrology: अपने लव पार्टनर के लिए बेहद लकी मानी जाती हैं इन नाम वाली लड़कियां
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.