मायावती को फिर लगा तगड़ा झटका, बसपा के इस नेता ने दिया इस्तीफा


सर्मथकों के साथ पहुंचे पार्टी कार्यालय, ताला जड़ा देख किया जमकर हंगामा, दीवार पर चस्पा किया रिजाइन लेटर।

Vinod Nigam

Updated: 26 Sep 2019, 09:11 AM IST

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़कर बसपा चीफ मायावती उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में अकेले उतर चुकी हैं। लेकिन उनके पार्टी के बड़े-बड़े नेता अब बागी हो गए हैं और इस्तीफा दे रहे हैं। कानपुर नगर से बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके अनुभव चक अपने सर्मथकों के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे और जब वहां ताला जड़ा देख भड़क गए और बसपा चीफ की तस्वीर में अपना रिजाइन लेटर चस्पा कर जमकर नारेबाजी करते हुए अखिलेश यादव के पक्ष में कसीदे पढ़े।

पैसे वालों को मिल रही तवज्जो
इस मौके पर अनुभव चक ने कहा कि बसपा में बड़े से बड़े नेता को पार्टी से निकाल दिया गया या फिर उसने खुद पार्टी छोड़ दी। बसपा चीफ मायावती ने निष्ठावान कार्यकर्ताआंे को दरकिनार कर पैसे वालों को तवज्जो दे रही हैं। इसलिए बसपा के पदाधिकारी आज सड़कांे पर उतरकर उनकी नीतियों का विरोध करने के साथ पार्टी छोड़ रहे हैं।

चस्पा किया रिजाइन लेटर
अनुभव चक जब बसपा के कार्यालय पहुंचे तो वहां पर ताला पड़ा हुआ था। उन्होंने बसपा के पदाधिकारियों को फोनकर कार्यालय आने को कहा, लेकिन जब कोई नहीं आया तो उन्होंने अपना रिजाइन लेटर मायावती की तस्वीर पर चस्पा कर दिया। अनुभव चक ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बसपा के साथ गठबंधन किया। बसपा चीफ ने इसका जमकर फाएदा उठाया। आरोप लगाते हुए कहा कि मायावती ने लोकसभा चुनाव 2019 में पैसे लेकर टिकट दिए। इसी का नतीजा है कि बसपा से अब लोगों का मोहभंग हो रहा है।

मीटिंग में रेट होते हैं तय
अनुभव चक ने कहा कि पार्टी मुखिया चुनाव को लेकर जो मीटिंग करती हैं, उसमें किस जगह से कितना पैसा आ सकता है। उस बारे में ही चर्चा होती है। इसी का परिणाम है कि बसपा के सबसे ज्यादा विधायक, सांसद दल बदल रहे हैं। बसपा का उद्देश्य था कि दबे कुचले लोगों को समाज में न्याय दिलाना था पर पार्टी अपनी दिशा से भटक गई है। प्रदेश की जनता सब जान चुकी है और जिसका नतीजा है कि 2007 के बाद पार्टी पूरी तरह से सूबे से उखड़ चुकी है।

अखिलेश के चलते चला हाथी
अनुभव कहते हैं कि ़2012 विधानसभा, 2014 लोकसभा, 2017 विधानसभा चुनाव में बसपा की करारी हार हुई। कानपुर के अलावा बुंदेलखं डमें पार्टी का खाता तक नहीं खुला। अपनी सियासत को बचाने के लिए मायावती ने अखिलेश यादव से गठबंधन किया और शून्य से 10 सीटों में हाथी पहुंच गया। लेकिन मतगणना के बाद बसपा प्रमुख ने अखिलेश यादव को धन्यवाद देने के बजाए उल्टा उनके खिलाफ बयानबाजी करते हुए गठबंधन तोड़ लिया।

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