बेरोजगारी से आहत छात्रा ने उठाया खौफनाक कदम, अपने खून से दीवार पर सुसाइड नोट लिख चुन ली मौत

पढ़ाई-लिखाई में अव्वल थी छात्रा, बैंक की परीक्षा में फेल होने के चलते फांसी के फंदे पर झूली अकांशा

Vinod Nigam

September, 0706:50 PM

कानपुर। वो बचपन से पढ़ाई-लिखाई में अव्वल थी। पहली से लेकर एमकॉम की परीक्षा उसने प्रथम श्रृणी में उत्तीर्ण किया। अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए पिता दिनरात मेहनत कर जो कमाते वो लाड़ली की शिक्षा-दिक्षा में खर्च कर देते। बेटी ने सिविल सर्विस की तैयारी करने की बात अपनी मां से कही। पैसे नहीं होने के बावजूद पिता ने एक साहूकार से ब्याज में रकम लेकर उसे कोचिंग भेजा। इस दौरान पचास हजार से ज्यादा रूपए खर्च हो गए। एग्जाम के बाद जब रिजल्ट आया तो बेटी सरकारी नौकरी नहीं पा सकी और इसी के बाद वो गुमशुम रहने लगी। माता-पिता ने ढांढस बंधाया और फिर से तैयारी करने को कहा। बेटी ने बैंक की नौकरी के कई एग्जाम दिए, पर एक में भी सफलता हाथ लगी। इसी से आहत होकर उसने अपने खून से दिवार पर माता-पिता के नाम सुसाइड नोट लिख फंखे में फंदा डाल कर झूल गई। शाम को जब घर लौटी तो उसका शव फंखे में लटकता हुआ पाया। यह देख पूरे परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भर शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया।

पढ़ाई के बाद नहीं मिली नौकरी
बर्रा आजाद कुटिया निवासी राजेंद्र गुप्ता होटल संचालक हैं। परिवार में पत्नी पूनम बेटा अंशू और बेटी आकांक्षा (24) थी। आकांक्षा एमकॉम करके बैंक की तैयारी कर रही थी, लेकिन सफलता न मिलने से निराश थी। गुरुवार को बीमार मौसी नीलम गुप्ता को देखने अंशू मां के साथ नौबस्ता गया था। कुछ देर बाद अकेला घर लौटा तो मेनगेट अंदर से बंद था। आवाज देने और फोन मिलाने के बाद भी आकांक्षा ने कोई जवाब नहीं दिया। इसकी जानकारी बेटे से मिलने पर राजेंद्र घर पहुंचे और छेनी-हथौड़े से दरवाजे का कुंडा काट करके अंदर पहुंचे तो आकांक्षा फंदे से लटकी थी। वह पड़ोसियों की मदद से आकांक्षा को उतारकर रीजेंसी हॉस्पिटल, गोविंद नगर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

बैंक के एग्जाम में फेल हो गई अकांशा
राजेंद्र गुप्ता बताते हैं कि बेटी पढ़ने में अव्वल थी। वो दिनरात किताबों में खोई रहा करती थी। हम अक्सर उसे ज्यादा नहीं पढ़ने को कहते थे, पर वो यही कहती थी कि पापा आप कब तक होटल के जरिए परिवार को बोढ उठाते रहेंगे। हम अब बड़ें हो गए हैं और नौकरी के जरिए पूरे परिवार का भरष-पोषण हम करेंगे। बेटी की यह बात सुनकर दिल में सुकून मिलता। गुप्ता बताते हैं कि बैंक का लिखित एग्जाम तो बेटी ने पास कर लिया, पर इन्टव्यू में उसका सिलेक्शन नहीं हुआ। गुप्ता ने बताया कि रिजल्ट में फेल होने के बाद बेटी ने बताया था कि उसका इंटव्यू अच्छा गया है, फिर से फेल कर दिया गया। गुप्ता ने कहा कि आज भी सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार हावी है और मेधावियों की जगह पैसेवालों को नौकरी मिल रही है।

नहीं करने दिया पोस्टमार्टम
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के तैयारी कर रही थी। तभी मृतका के पिता ने दरोगा के पैर पकड़ लिए और बेटी के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराए जाने की मांग की। इंस्पेक्टर ने मृतका के पिता की बात मानते हुए बिना पोस्टमार्टम के शव उन्हें सौंप दिया। वहीं छात्रा की मौत की खबर से पूरा मोहल्ला उसके शवयात्रा के दौरान अपने घरों से निकल पड़ा। लोगों ने बताया कि अकांशा बहुत सीधी-साधी थी। मोहल्ले में कोई भी व्यक्ति उसे काम देता वो उसे कर देती थी। वहींं मामले पर इंस्पेक्टर रवि श्रीवास्तव का कहना है कि जॉब न लगने से छात्रा अवसाद में थी, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया। परिवार वालों के पोस्टमार्टम कराने से इंकार पर लिखापढ़ी करके शव सौंप दिया गया है।

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