ट्रेन की बोगी में छिपे यात्रियों को जीआरपी ने दबोचा, होम क्वारंटाइन की मुहर लगाकर किया रवाना


राप्ती सागर सुपरफास्ट ट्रेन में सवार होकर जा रहे 85 यात्रियों को सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर जीआरपी व आरपीएफ ने पकड़ा, जांच के बाद छोड़ा।

By: Vinod Nigam

Published: 27 Mar 2020, 09:15 AM IST

कानपुर। चीन से चलकर कई देशों में पहुंच चुके कोरोना वायरस वैश्विक आपदा बन गया है। भारत में इसके खतरे को देखते हुए 21 दिनों का लॉक डाउन चल रहा है। इस दौरान सभी प्रकार की यात्राओं के साथ लोगों को घरों में रहने की हिदायत दी गई है। बावजूद ऐसे लोग हैं जो सरकार के आदेश का पालन नहीं करते। गुरूवार को राप्ती सागर सुपरफास्ट ट्रेन में छिपकर बैठे 85 यात्रियों को जीआरपी व आरपीएफ ने धरदबोचा। डाॅक्टरों की टीम ने सोशल डिस्टेंसिंग के बीच जांच की गई। कोरोना की संभावना के न मिलने पर सभी को होम क्वारंटाइन की मुहर लगाई गई। इनमें से 25 लोगों को मुहर लगाने के बाद गाड़ी के साथ गोरखपुर के लिए रवाना कर दिया गया।

त्रिवेंद्रम से गोरखपुर जा रही थी ट्रेन
राप्ती सागर एक्सप्रेस जो दक्षिण भारत के त्रिवेंद्रम से गोरखपुर के बीच चलती है। ं सेंट्रल स्टेशन के डायरेक्टर हिंमाशु शेखर उपाध्याय, जीआरपी थाना प्रभारी राम मोहन राय आदि को सूचना मिली कि ट्रेन में कई लोग छिपकर गोरखपुर जा रहे है। सूचना मिलते ही सेंट्रल स्टेशन के अफसर अलर्ट हो गए और स्टेशन पर फोर्स के साथ मेडिकल टीम को भी बुलाया गया। ट्रेन जैसे ही सेंट्रल स्टेशन पर आकर रूकी, उसी समय सब एक्शन में आ गए और एक खाली रैक में बैठे 85 लोगों को पकड़ लिया।

घरों में रहने की सलाह
पकड़े गए लोगों को सेंट्रल स्टेशन पर उतारकर प्लेटफॅार्म नंबर एक पर बैठाया गया.। जीआरपी ने सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखा। इसके बाद सभी की जांच की गई। बताया जा रहा है कि जांच में किसी के कोरोना संक्रमण से ग्रसित न होने की बात पता चली है.। जिन लोगों को यहां पर रोका गया है, उसमें से अधिकतर पैंट्री कार के कर्मचारी हैं। सभी के हाथों में होम क्वारंटाइन की मुहर लगा देने के साथ ही सभी को होम क्वारंटाइन के दौरान अपने घरों में रहने की हिदायत देकर रवाना कर दिया गया।

इस वजह से छिपकर आए
जीआरपी थाना प्रभारी राम मोहन राय ने बताया राप्ती सागर एक्सप्रेस में कुल 85 लोग मिले। इन सभी के हाथों में होम क्वारंटाइन की मुहर लगाई गई है। वहीं यात्रियों ने बताया कि लाॅकडाउन के चलते फैक्ट्री बंद कर दी गई थी। जो पैसा था वह खाने में खर्च हो गया। इसी के कारण हमें जब इस ट्रेन के गोरखपुर जाने के बारे में पता चला तो अपने-अपने रूम से पैदल रेलवे स्टेशन पहुंचे और खाली रैक पर छिपकर बैठ गए।

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