माता-पिता की आरती उतार मनाया वैलेंटाइन डे

Vinod Nigam

Publish: Feb, 14 2019 05:29:44 PM (IST) | Updated: Feb, 14 2019 05:29:45 PM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। वैलेंटाइन डे पूरे देश में बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे के साथ सुबह से चिड़ियाघर, गंगाबैराज, बिठूर, मोतीझील में प्यार का पर्व बना रहे हैं। पर एक योग वेदांत सेवा समिति ने आज के दिन अनूठा आयोजन किया। संस्था ने वैलेंटाइन डे के अवसर शहर के सैकड़ों अभिभावकों को बच्चों के साथ आंत्रतण देकर बुलया। इस बीच बच्चों ने अपने माता-पिता को आसन पर बिठाकर उनको फूल माला पहनाकर उनकी आरती उतारी, तो युवक-युवतियों ने उन्हें फूल देकर सदा खुश रखने का संकल्प लिया। अभिभावकों ने अपने लाड़लों के उज्जवल भविष्य का आर्शीवाद दिया।

बच्चों ने उतारी आरती
वैलेंटाइन डे के अवसर पर गुरूवार को पांडूनगर स्थित योग वेदांत सेवा समिति के तत्वावधान में एक कार्यक्रम का आयोजन कर बच्चों को अपने माता- पिता के साथ बकाएदा आमंत्रण देकर बुलवाया गया। इस अवसर पर जहां नन्हें-मुन्हें बच्चों ने अपने माता-पिता की आरती की और उन्हें फूल देकर वैलेंटाइन डे बनाया तो युवक-युवतियां भी कार्यक्रमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। उन्होंने भी अपने माता-पिता की पूजा की और उन्हें सदा खुश रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में अपने बुजर्ग माता-पिता के साथ पहुंचे सौरभ ने कहा, जैसे लोग वैलेंटाइन डे पर प्रेम का इजहार करते हैं वैसे ही मैंने अपने माता पिता का पूजन करके उनके प्रति अपने प्रेम का इजहार किया है। सौरभ का कहना है कि जो लोग अपने माता पिता की सुध नहीं लेते है और उन्हें छोड़ देते हैं, वो कभी जीवन में ओ नहीं बढ़ सकते। सौरभ ने कहा कि युवा-युवतियां मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना के बाद मन्नत मांगते हैं। पर वो घर में साक्षत सामने मौजूद भगवान ( माता-पिता) की तरफ नहीं देखते। अगर वो मंदिर के बजाए इनकी सेवा करें तो उन्हें हर दूखों से छुटकारा मिल जाएगा।

बेटों का कर्तव्य देख भर आई आंख
जिस तरह से इस खास दिन पर बेटे व बेटियों ने अपने माता-पिता को प्यार दिया, उससे उनकी आंखें भर आई। अभिभावाक रघुराय कहते हैं कि माता पिता को सम्मान दिया गया वह बहुत अच्छा रहा। सबको ऐसी ही संतान मिले। आगे भी सभी संताने अपने माता पिता का इसी तरह से सम्मान करते रहे। अगर बच्चे अपने माता पिता से अलग हो जाएंगे तो आगे चलकर उनको भी इसका सामना करना पड़ सकता है। राजेंद्र खरे कहते हैं कि उनकी पांच बेटियां हैं। चार की शादी हो चुकी है, बावजूद वो अपने पतियों के साथ नववर्ष पर हमसे मिलने के लिए आती हैं। हमारे साथ नववर्ष मनाती हैं। कभी दुख होता है वो दौड़कर घर आ जाती हैं। हम तो ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि मेरी बेटियां की तरह हर घर में ऐसे ही लाड़ो जन्म लें।

ताकि माता-पिता पर बना रहे प्यार
कार्यक्रम आयोजक कमल मनवानी ने बताया कि इस तरह का कार्यक्रम पूरे देश में चलाया जा रहा है। संस्था इसके जरिए बच्चों को जागरूक कर रहे है। कहा, आज के दौर में जैसे ही माता-पिता बुजुर्ग हो जाते हैं तो उनके बेटे-बहू उन्हें घर से बाहर कर देते हैं। कानपुर में ऐसे दर्जनों आश्रृम हैं। जहां अपनों से ठुकराए बुजुर्ग जिंदगी के आखरी दिन काट रहे हैं। संस्था इसके जरिए ये ज्यादा से ज्यादा युवा-युवतियों को अपने माता‘-पिता के साथ प्यार और आदर सम्मान के लिए जागरूक कर रही है।

 

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