मायावती के नुस्खे को आजमाएंगे सीएम योगी आदित्यनाथ, किसी भी वक्त उतर सकता है उनका हेलीकॉप्टर

सीएम ने भाजपा पदाधिकारियों को भी सरकारी योजनाओं की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है...

By: Vinod Nigam

Published: 24 Jul 2018, 11:20 AM IST

कानपुर. लोकसभा चुनाव से पहले तीन सीटों में मिली हार के बाद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सूबे के अधिकारियों के कामकाज से खासे नाराज हैं। इसी के चलते उन्होंने पूर्व सीएम मायावती के नुख्शे को आजमानें का ऐलान कर दिया है। फर्रूखाबाद में सीएम ने कहा कि अब कहीं भी, कभी और किसी वक्त मैं आकस्मिक छापेमारी करूंगा। यदि कहीं भी लापरवाही मिली तो वहीं एक्शन होगा। अधिकारी जनता की समस्याओं का निराकरण नहीं करते। सरकारी योजनाएं कागज पर चल रही हैं। ऐसे में अब सिर्फ जिले के अलाधिकारियों पर सीधे गाज गिरेगी। सीएम के इस ऐलान के बाद जहां ब्यूरोक्टस खासे डरे हैं, वहीं आमजनता का कहना है कि जब सूबे में मायावती सीएम थीं तो उन्होंने डीएम से फावड़े चलवाए थे। यदि सीएम योगी सच में यही कार्य करते हैं थे तो कुछ हद तक उनके साथ ही जनता और पार्टी को फाएदा पहुंचा था।

 

छह माह में अधिकारियों को हिला दिया

सपा-बसपा ने 2002 विधानसभा चुनाव में गठबंधन कर चुनाव लड़ा। जहां पार्टी को जीत मिली। दोनों दलों की तरफ से तय हुआ कि छह-छह माह दोनों दलों के नेता सीएम रहेंगे। पहले जिम्मेदारी मायावती को मिली। बतौर सीएम उन्होंने महज छह माह के कार्यकाल के दौरान ब्यूरोकेट्स की नींद उड़ा दी। लखनऊ में तेज-तर्राक और इमानदार ब्यूरोकेट्स को जिम्मेदारी दी और खुद यूपी के सभी जिलों का दौरा करने का ऐलान कर दिया। उस वक्त मायावती ने जिलों में तैनाम अलाधिकारियों से कहा था कि मैं कभी भी, किसी वक्त जिलों का निरीक्षण कर सकती हूं। यदि लापरवाही मिली तो सीधे कमिश्नर, डीएम, डीआईजी और एसएसपी पर गाज गिरेगी। 2002 में मायावती ने फतेहपुर जिले की बिंदकी तहसील के एक अंबेडकर गांव में बिना जानकारी के पहुंच गई। खामियां मिलने के चलते डीएम, सीडीओ, बीडियो सहित तमाम अधिकारियों को मौके पर सस्पेंड कर दिया था। उस वक्त खुद डीएम गांव-गांव जाकर फावड़ा चलाते थे।

 

सीधे आलाधिकारी पर कार्रवाई

मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ की गिनती सख्त तेवरों वाले नेता के रूप में होती थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद माना जा रहा था कि नौकरशाही में बेहद सख्त रुख अख्तियार करेंगे। इस बीच कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा विरोधी राजनीतिक दल तमाम सवाल उठाते रहे हैं। अब कमान स्वयं योगी आदित्यनाथ ने संभाली और प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है। पूरी मशीनरी को साफ बता दिया गया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वे स्वयं सड़क पर उतर कर औचक जांच-पड़ताल करेंगे। फिर कितना भी बड़ा अफसर हो, दोषी पाए जाने पर उसे बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही सीएम ने भाजपा पदाधिकारियों को भी सरकारी योजनाओं की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है।

 

कभी भी उतर सकता है हेलीकॉप्टर

यूपी में अपराध कम होने के बजाए बढ़े हैं और अब विरोधी दलों के अलावा जनता भी व्यवस्था पर सवाल उठाने लगी है। मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या हो या कानपुर के सजेती थाने के अंदर दरोगा का मर्डर के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने इनसे निपटने के लिए खूद कमान संभसलर है। अब सीएम योगी के कड़े रुख के बाद अफसरों की सक्रियता बढ़ी है। स्वयं मुख्य सचिव डॉक्टर अनूप चंद्र पाण्डेय ने वीडियो कांफ्रेंसिंग कर सभी जिलाधिकारियों की जवाबदेही तय की है। साथ ही पुलिस विभाग के साथ प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार कानून व्यवस्था पर सीधी नजर रख रहे हैं। जिला स्तर पर आकस्मिक छापेमारी की प्रक्रिया तेज की गयी है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अचानक छापा मारकर सरकार की प्राथमिकताओं पर फोकस कर सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य, बिजली व कानून व्यवस्था सहित प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाले विभागों पर अतिरिक्त मशक्कत हो रही है।

 

2007 में दोबारा दिखाई पॉवर

मायावती 2002 में महज छह माह तक सीएम रहीं, लेकिन उस कार्यकाल के बाद उन्हें लोग दूसरी इंदिरा गांधी के नाम से पुकारने लगे थे। 2007 के विधानसभा चुनाव में जनता ने उन्हें यूपी की सत्ता फिर से सौंप दी और मायावती वही पुराने अंदाज में दिखीं। उन्होंने अपनी टीम में तेज अफसरों को रखा और तीन दशक तक बुंदेलखंड में अपनी सल्तनत चलाने वाले डकैत को खत्म करने के आदेश दिए। अनगिनत अपराधी मारे गए तो माफिया व सफेदपोशों को जेल भेजा गया। बतौर सीएम मायावती ने ताबड़तोड़ पूरे प्रदेश में छापेमारी शुरू की थी। कई आईएएस-आईपीएस अफसर तक निलंबित हुए थे। सीएमओ, तहसीलदार आदि पर तो भारी संख्या में गाज गिरी थी। कल्याणपुर के विधानसभा प्रभारी दीपू निषाद कहते हैं कि बसपा प्रमुख मायावती की शासन प्रणाली का कोई जोड़ नहीं है। अच्छी सरकार चलाने के लिए हर किसी को उनके पदचिह्नों पर ही चलना होगा। यही कारण है कि तमाम कोशिशों के बाद हर सीएम उन्हीं के बनाए रास्ते पर चलने लगता है।

Vinod Nigam
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