अब केवल कैंसर की कोशिकाएं सिंकाई से होंगी नष्ट

शरीर के दूसरे अंगों पर नहीं पड़ेगा इसका विपरीत असर

जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में नई कोबाल्ट-६० मशीन शुरू

 

 

कानपुर। कैंसर पीडि़त मरीजों के लिए अच्छी खबर। शहर के जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में कोबाल्ट-६० मशीन से इलाज की सुविधा शुरू हो गई है। इस मशीन से कैंसर की कोशिकाएं ही नष्ट होती हैं, शरीर के दूसरे अंगों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ता है। इस मशीन की मदद से रोगियों के इलाज की प्लानिंग तैयार हो जाती है। यह मशीन चालू होने से कैंसर मरीजों का सही समय से ट्रीटमेंट शुरू हो सकेगा और मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।

 

चार करोड़ की है मशीन

जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में विश्व स्वास्थ्य दिवस पर कोबाल्ट-६० मशीन से कैंसर रोगियों का इलाज शुरू किया गया है। इस मशीन की कीमत ४ करोड़ रुपए है। इससे सिंकाई करने पर सीधे कैंसर की कोशिकाओं पर ही प्रभाव पड़ता है, बाकी अंग दुष्प्रभाव से बचे रहेंगे।

 

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से निर्मित

इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. एमपी मिश्र ने बताया कि यह मशीन केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ एटमिक एनर्जी और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की ओर से बनाई गई है। इसकी कीमत कम है और कार्यक्षमता ज्यादा। पहले कोबाल्ट मशीन विदेश से आती थी, जो इतनी ज्याद प्रभावी नहीं होती थी और कीमत भी काफी ज्यादा थी।

 

२०१६ में हुई थी स्वीकृत

निदेशक डॉ. मिश्र ने बताया कि यह मशीन वर्ष २०१६ में स्वीकृत की गई थी। जिसे अब चालू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान सीटी स्कैन से कैंसर प्रभावित अंग की इमेज लेकर कोबाल्ट-६० मशीन में डाल दी जाती है। इससे मशीन खुद ट्रीटमेंट प्लान तैयार कर देती है। इससे पता चल जाता है कि रोगी को किस एंगल से और कितना रेडिएशन दिया जाना चाहिए।

 

कैंसर मरीजों को बड़ी राहत

जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में यह मशीन चालू हो जाने से कैंसर पीडि़त मरीजों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें शहर में ही इलाज मिल जाएगा। अभी तक कैंसर मरीजों को सिंकाई के लिए लखनऊ और दिल्ली तक जाना पड़ता था। संस्थान में कोबाल्ट-६० मशीन चालू हो जाने से मरीजों को अब कम परेशानी उठानी पड़ेगी और समय से इलाज भी मिल जाएगा।

आलोक पाण्डेय
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