फिर घुटनों तक भरे कीचड़ में उतर गई ‘करिश्मा ठाकुर’

फिर घुटनों तक भरे कीचड़ में उतर गई ‘करिश्मा ठाकुर’
फिर घुटनों तक भरे कीचड़ में उतर गई ‘करिश्मा ठाकुर’

Vinod Nigam | Updated: 12 Oct 2019, 04:21:22 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India


कांग्रेस उम्मीदवार ने झोकी ताकत, साथ में उतरे कांग्रेसी दिग्गज, विरोधी खेमें के अंदर बढ़ी हलचल।

कानपुर। अपने गढ़ पर कब्जे के लिए कांग्रेस उम्मीदवार करिश्मा ठाुकर भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही हैं। टिकट मिलने के बाद से करिश्मा के कड़े तेवर से भाजपा नेता बैकफुट पर दिख रहे है। कभी पुलिस के साथ्र दो-दो हाथ तो कभी फावड़ा लेकर सड़क के गड्ढे भरना और अब लबालब कीचड़ में उतरकर करिश्मा ने भाजपा के अंदर खलबली मचा दी है।

 

फिर घुटनों तक भरे कीचड़ में उतर गई ‘करिश्मा ठाकुर’

किचड़ में बनाया रास्ता
अपनी परम्परागत सीट गोविंद नगर सीट पर कब्जे के जिए कांग्रेस ने युवा महिला छात्र नेता करिश्मा ठाकुर को टिकट देकर चुनाव के मैदान में उतारा है। करिश्मा पिछले कई माह से शहर में ढेरा जमाए हुए हैं और भाजपा के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं। शुक्रवार को करिश्मा जनसंपर्क करने के लिए निकलीं। साउथ स्थित एक गली में कीचड़ घुटने तक भरा था। कार्यकर्ताओं ने करिश्मा को आगे जाने से रोका, पर वह नहीं मानी और जान जोखिम में डालकर कीचड़ में रास्ता बनाते हुए बस्ती के लोगों के बीच पहुंची और भाजपा पर जमकर बरसीं।

 

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जाने कौन हैं करिश्मा
शहर के सेंट मैरी कानवेंट से इंटर की परीक्षा पास करने के बाद करिश्मा ने वर्ष 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के लक्ष्मीबाई कालेज में दाखिला लिया। यहीं से उनके राजनीतिक करियर का शुभारंभ हुआ। एनएसयूआई से जुडने के बाद प्रथम वर्ष में ही उन्होंने दिल्ली छात्रसंघ का चुनाव लड़ा और पहली बार में अच्छे वोटों से जीत हासिल कर महासचिव बनीं। वर्तमान में वह एआईसीसी सदस्य और एनएसयूआई की राष्ट्रीय महासचिव हैं। करिश्मा के पिता भी राजनीति में हैं और वह कन्नौज से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।

 

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पुलिस से भिड़ीं
शास्त्री नगर सेंट्रल पार्क में मुख्यमंत्री की जनसभा के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था को धता बता करिश्मा ठाकुर सभास्थल तक पहुंच गई थीं। आनन फानन महिला कांस्टेबल की मदद से उन्हें पकड़ा गया और नजरबंद कर दिया गया था। करीब आधे घंटे तक करिश्मा ठाकुर पुलिस से लड़ती रहीं। करिश्मा के इस करिश्माई प्रदर्शन से कांग्रेस के कार्यकताओं में जबरदस्त जोश दिखा। इस मेगा शो ने भाजपा नेताओं के अंदर हलचल तेज कर दी।

 

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उठाया था फावड़ा
एक सप्ताह पहले करिश्मा ठाकुर समर्थकों के साथ जनसम्पर्क के लिए निकली थीं। इसी दौरान उन्हें मसवानपुर स्थित दुर्गा लॉन के पास सड़क खस्ता हाल में दिखाई पड़ी थी। सड़क पर बड़े-बड़े गढ्ढे थे। कई फिट गहरे गढ्ढों में बरसात का पानी भर जाने के कारण राहगीरों का निकलना मुश्किल हो जाता था। कई वर्षो से यह सड़क खस्ता हाल पड़ी थी। करिश्मा ठाकुर ने फौरन ट्राली से मिट्टी मंगाई और फावड़ा बेलचा लेकर पानी से भरे गढ्ढों में कूद पड़ीं। करिश्मा के श्रमदान को देखकर स्थानीय लोग भी उनका हाथ बंटाने के साथ जीत का आर्शीवाद दिया था।

 

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एक साथ आए दिग्गज कांग्रेसी
विधानसभा और लोकसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस के नेता आपस में बंटे नजर आते थे, लेकिन उपचुनाव में गुटबाजी दूर-दूर तक नहीं दिख रही। पूर्वमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, पूर्व विधायक अजय कपूर, पूर्व सांसद राजाराम पाल पूरी ताकत के साथ करिश्मा के लिए प्रचार कर रहे हैं। करिश्मा ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का हमें समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस उपचुनाव में भाजपा को जतना के सहयोग से हराने जा रही है। करिश्मा ने कहा कि ये तो अभी शुरूआत है। 2022 की पिच्चर अभी बाकी हैं।

 

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9 उम्मीदवार मैदान में
गोविंद नगर सीट में करीब लाख 69 हजार मतदाता हैं। जिसमें लगभग डेढ़ लाख ब्राम्हण वोटर्स हैं। इस सीट पर 6-6 बार कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार जीते हैं। उपचुनाव में नौ उम्मीदवारों बीच मुकाबला है। जिसमें प्रत्याशी से सुरेंद्र मैथानी, कांग्रेस के करिश्मा ठाकुर, बसपा के देवीप्रसाद तिवारी, समाजवादी पार्टी से सम्राट विकास सिंह यादव जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। वहीं पांच अन्य निर्दलीय, राकेश त्रिपाठी, डॉक्टर वीएन पाल, योगेंद्र अग्निहोत्री देवेंद्र कुमार सिंह सुरेंद्र कटियार भी चुनावी अखाड़े में हैं। यहां पर भाजपा, कांग्रेस और बसपा के बीच टक्कर मानी जा रही है।

 

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दूसरी बार बाई-इलेक्शन
गोविंद नगर विधानसभा सीट पर दूसरी बार बाई-इलेक्शन होगा। पहली बार इस सीट पर उपचुनाव 2 बार कांग्रेस से विधायक रहे विलायतीराम कात्याल की हत्या हो जाने कारण हुआ था। कत्याल की 1988 में आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उपचुनाव में भाजपा से बालचंद्र मिश्रा पहली बार विधायक बने थे। इसके पहले 1967, 1969, 1980, 1985, 2000 और 2007 में यहां से कांग्रेस जीती। 1989, 1991, 1993, 1996, 2012 और 2017के चुनाव में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी काबिज रही। 1974 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और 1970 में जनता पार्टी ने यहां से चुनाव जीता था।

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