चुनावी हार की समीक्षा में कांग्रेसियों ने खुलकर निकाली भड़ास

चुनावी हार की समीक्षा में कांग्रेसियों ने खुलकर निकाली भड़ास

Alok Pandey | Updated: 15 Jun 2019, 12:24:07 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

बोले भितरघातियों के चलते सीट हाथ से गई, नाम किए उजागर,
नए चेहरों को मौका देने की वकालत, युवा संगठनों को मिले तरजीह

कानपुर। लोकसभा चुनाव हारने के बाद महानगर और अकबरपुर लोकसभा सीट की समीक्षा के दौरान कांग्रेसियों का सब्र टूट पड़ा। नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर और महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने भितरघातियों के नाम लेकर उन पर हार का ठीकरा फोड़ा। कांग्रेसी बोले चुनाव में सहयोग नहीं मिलने का यह नतीजा है। अगर सभी लोग एक साथ मिलकर काम करते तो सीट नहीं हारते।

एक दूसरे पर लगाते रहे आरोप
समीक्षा बैठक के दौरान वही स्थिति रही जो चुनाव से पहले थी। जब टिकट को लेकर चर्चा हुई थी तब भी पार्टी नेता एक दूसरे के खिलाफ बोल रहे थे और चुनाव बाद समीक्षा बैठक में भी नेताओं ने एक दूसरे पर जमकर आरोप लगाए। कांग्रेसियों ने खुलकर भितरघातियों के नामों को सामने रखा। दक्षिण की किदवई नगर और गोविन्दनगर से वार्ड अध्यक्षों और पार्षदों पर भी असहयोग का आरोप लगाया गया। पार्टीजनों से श्रीप्रकाश जायसवाल के लिए घर-घर जाने के लिए कहा जाता रहा लेकिन लोग निष्क्रिय रहे।

नेतृत्व अपनी कार्यशैली बदले
कांग्रेसियों ने कहा कि पार्टी नेतृत्व को पुराने ढर्रे से बाहर आना होगा और अपनी कार्यशैली बदलनी होगी। नए चेहरों पर भरोसा कर उन्हें जिम्मेदारी देनी होगी। अब कुछ नया करना होगा अन्यथा पार्टी जनता के बीच अपना भरोसा पूरी तरह से खो देगी कांग्रेसी बोले कि आज भी चंद नेताओं को ही महत्व दिया जाता है, जबकि कई जमीनी नेता उपेक्षित हैं। चाहे केंद्रीय नेतृत्व हो या प्रदेश संगठन, सब पुराने लोगों पर ही भरोसा करते हैं। किसका जनाधार है यह नहीं देखा जाता, इसी वजह से पार्टी कार्यकताओं में कोई उत्साह नहीं है।

युवा संगठनों को मिले महत्व
बैठक के दौरान कहा गया कि सेवादल, युवा कांग्रेस जैसे सहयोगी संगठनों को फिर से खड़ा करने का समय आ गया है। पार्टी में यूथ पूरी तरह निष्क्रिय है, इसी वजह से प्रचार में दम नहीं दिखता। वरिष्ठ नेता जमीन पर पार्टी की ताकत नहीं दिखा पाते। बिना युवाओं के पार्टी कुछ नहीं कर सकती। दूसरी ओर अकबरपुर सीट में संगठन की कमजोरी के साथ नए चेहरे पर भरोसा करने की नसीहत दी गई। कुछ कांग्रेसियों ने सवर्णों पर फोकस कर रणनीति बनाने की वकालत की।

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