14 साल के बाद बेटे को मिला इंसाफ,आरोपियों को सजा-ए-मौत का ऐलान

कारोबारी की हत्या के बाद छीन लिए थे पैसे, बेटे की तहरीर पर पुलिस ने दो आरोपियों को किया था गिरफ्तार

By: Vinod Nigam

Published: 24 Jul 2018, 09:47 PM IST

कानपुर। पिता के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए एक बेटे ने अपनी जिंदगी के 14 साल कोर्ट के चक्कर लगाते-लगाते गुजार दिए, पर हिम्मत नहीं हारी। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले इसके लिए उसने एफआईआर दर्ज करवाई और वकील के जरिए कोर्ट में जंग शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपियों को अरेस्ट कर लिया और जेल भेज दिया। विवेचक ने सबूत जुटाए और तो मृतक के बेटे ने तरीख-पे-तारीख का दर्द झेला और मंगलवार का वो दिन आ गया जहां न्यायालय ने आरोपियों को दोषी मानते ही सजाए मौत का आदेश सुना दिया। कानपुर के इतिहास में यह पहली मौका है कि जब किसी वारदात में एक साथ दो आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई। पुलिस ने दोनों को कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया। न्याय मिलने से मृतक के बेटे के चेहरे में खुशी की मुस्कान दिखी तो आरोपियों के परिजन कोर्ट के बाहर फूट-फूट कर रो पड़े।
कोर्ट ने माना दोषी
स्वरूप नगर थानाक्षेत्र में 2004 अशोक सबरवाल की हत्या कर दी गई थी। हत्या की वारदात में पुलिस ने आरोपी चांद बाबू व शरीफ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। घटना में मंगलवार को एडीजे सप्तम की कोर्ट में सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपी दोषी पाए गए। जिसको देखते हुए कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। सजा सुनाये जाते ही अभियुक्तों के होश उड़ गये। सजा सुनाये जाने पर मृतक के परिजनों ने न्याय मिलने की बात कही। पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। वहीं सजा के ऐलान के बाद मृतक के बेटे ने राहत की सांस लेते हुए कोर्ट के बाहर बैठ गया और उसके आंख से आंसू छलख पड़े।
लूट का विरोध करने पर कर दी हत्या
सबरवाल स्वरूपनगर में एक दुकान चलाते थे। शाम के वक्त वो दुकान बंद कर अपने घर जा रहे थे, तभी रास्ते में चांद बाबू और शरीफ ने उन्हें रोक लिया। तमंचा के जरिए पैसे छीनने लगे। जिसका विरोध सबरवाल ने किया तो उन्हें गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर स्थानीय लोग भागे और दोनों आरोपियों का पीछा किया। सूचना पर पुहंची पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कुछ दिन के बाद चांद और शरीफ का गिरफ्तार कर लिया। कुद माह के बाद हाईकोर्ट से आरोपियों को जमानत मिल गई और मामला कानपुर कोर्ट में चलता रहा। पिछले 14 सालों से मृतक के बेटे और आरोपियों के वकीलों के बीच कोर्ट में बयान दर्ज होते रहे। पर मंगलवार को कोर्ट ने दोनों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुना दी।
एक सप्ताह में दूसरी वारदात में फांसी
कानपुर कोर्ट में एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इससे पहले अगले ग्वालटोली में सास और दो सालों की नृशंस हत्या कर उनकी गर्दन काटने वाले हत्यारे को मंगलवार को एडीजे-3 अजय कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। उसने पत्नी के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। कानपुर के इतिहास में कोर्ट से फांसी की सजा सुनाने का वो दूसरा तो आज की तीसरा मामला है। इससे पहले छात्र नेता चक्रेश अवस्थी की हत्या में आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया था।

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