लाॅकडाउन के चलते बेटों ने इस बैंक में रखीं अपने पुरखों की अस्थियां


देहदान व नेत्रदान अभियान के संयोजक मनोज सेंगर ने 2014 में भैरोघाट पर कलश बैंक की रखी थी नींव, 23 मार्च से लेकर 17 अप्रैल तक 70 से ज्यादा अस्यिां लाॅकर में कैद।

By: Vinod Nigam

Published: 18 Apr 2020, 09:01 AM IST

कानपुर। कोरोना वायरस के चलते देश में मार्च से लाॅकडाॅउन चल रहा है। जिसके कारण लोग अपने घरों में रहकर महामारी के खिलाफ चल रही जंग में शासन-प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं। पर इस सकंट की घड़ी में कुछ वह लोग हैं जिनके परिजन बीमारी व अन्य वजहों के चलते इस दुनिया को छोड़कर जा रहे हैं और उनकी अस्थियां सहेजकर रखने के लिए एक बैंक अहम रोल निभा रहा है। भैरोघाट स्थित इस बैंक में परिजन अपनों के मरणोपरांत क्रिया के बाद उनकी अस्थियां लाक कर रहे हैं और लाॅकडाउन के खुलने के बाद उन्हें संगम, काशी, हरिद्धार में प्रवाहित करेंगे।

अब अस्थियां लेकर जा सकेंगे हरिद्धार
लाॅकडाउन के चलते पूरा शहर खमोश है। सड़के सूनी और बाजार बीरान हैं। सरकार, पुलिस-प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम सहित अन्य सरकारी व प्राईवेट संस्थान कोरोना माहामारी के खिलाफ जनता के सहयोग से जंग लड़ रहे हैं। इसी बीच कल्याणपुर निवासी कृपेश के पिता का निधन हो जाता है। पिता की अंतिम इच्छा भी कि मौत के बाद उनकी अस्थियां हरिद्धार में प्रवाहित हों। लेकिन लाॅकडाउन के चलते कृपेश परेशान थे। अस्थियां घर पर रख नहीं सकते थे। ऐसे में उन्हें अस्थि कलश बैंक के बारे में जानकारी हुई। कृपेश तत्काल पिता की अस्थ्यिां लेकर गए और बैंक के लाॅकर में लाॅक कर लाॅकडाउन के खुलने का इंतजार कर अपने घर चले गए।

2014 में करवाया था निर्माण
भैरव घाट स्थित शवदाह गृह पर ही अस्थि कलश बैंक की नीव देहदान व नेत्रदान अभियान के संयोजक मनोज सेंगर ने रखी थी। इसमें कुल 30 लॉकर हैं। मनोज सेंगर ने बताया, यहां कई लोगों के साथ दिक्कतें आती थीं कि वो प्रियजनों का दाह संस्कार करने के बाद उनकी अस्थियां घर नहीं ले जा सकते थे और ना ही कहीं और रख सकते थे।ऐसे में हम लोगों ने इस बैंक का दिसंबर, 2014 में निर्माण करवाया था। मनोज सेंगर ने बताया कि इस बैंक में लोग अपने प्रियजनों की अस्थियां रखते हैं इसके लिए किसी से पैसे नहीं लिए जाते। एक कार्ड बनाया जाता है, जिसे दिखाकर कोई भी व्यक्ति अपने परिजनों की अस्थियां यहां से कभी भी ले जा सकता है।

70 अस्थि कलश जमा
मनेाज बताते हैं कि 23 मार्च से शुरू लॉकडाउन अवधि में ही अभी तक करीब 70 अस्थि कलश यहां बने लॉकरों में जमा हो चुके हैं। जैसे ही सरकार लाॅकडाउन खोलने का आदेश जारी करेगी वैसे ही लोग अपने परिजनों की अस्थियां यहां से लेकर जाकर उन्हें संगम, काॅशी, हरिद्धार समेत अन्य स्थलों में प्रवाह कर सकेंगे। मनोज बताते हैं कि लाॅकडाउन के चलते हमनें बैंक में लाॅकरों की संख्या बढ़ा दी है। मनोज ने बताया कि अब इसका विस्तार प्रदेश स्तर पर करने की योजना है। लाॅकडाउन खुलने के बाद संगम तट पर अस्थि कलश बैक की नींव जल्द ही रखी जाएगी।

आंसुओं के बीच खुशी
सिविल लाइंस निवासी रोहित के पिता चिंरजीवी (58) का निधन 16 अप्रैल को हो गया। रोहित के पिता किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। पिछले दो वर्षो से उकना इलाज चल रहा था। रोहित ने बताया कि 15 को पिता की तबियत बिगड़ी। उन्होंने मां के साथ मुझे अपने पास बुलाया और कहा कि मेरे निधन के बाद मेरी अस्थियां सगम में प्रवाह करना। लाॅकडाउन के चलते शहर से बाहर जाने पर रोक थी। तभी मुझे इस बैंक के बारे में बताया गया। मैंने तत्काल बैंक में अस्थियां रख दी और अब 3 मई का इंजतार कर रहा हूं। जैसे ही लाॅकडाउन खुलेगा वैसे ही पिता की अंतिम इच्छा मैं पूरी करूंगा।

Vinod Nigam
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned