इनकाउंटर के बाद बोला अपराधी, घर से उठाया और मार दी गोली

20 दिन में 10 से ज्यादा अपराधियों का पुलिस ने किया इनकाउंटर, घायल बदमाश ने अस्पताल में मुठभेड़ की कहानी से उठाया पर्दा।

By: Vinod Nigam

Published: 23 Nov 2018, 09:10 AM IST

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। उत्तर प्रदेश में अपराध की रोकथाम के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने पुलिस को खूली छूट दे दी, जिसका नतीजा रहा कि 60 से ज्यादा अपराधियों को पुलिस ने इनकाउंटर में ढेर कर दिया। पर यूपी पुलिस ने अपनी रणनीति बदल ली है। मुठभेड़ के दौरान अब अपराधियों के सीने के बजाए पैर में निशाना लगा रही है। इसी के चलते पिछले बीस दिन के अंदर कानपुर में 10 बदमाशों के पैर में गोली लगी। देररात दो ताजा एनकाउंटर हुए, जिसमें एक बदामश मुठभेड़ के दौरान घायल हो गया। उसे अस्पताल में एडमिट कराया। इस दौरान उसने पुलिस के फेंक इनकाउंटर की पोल खोल कर रख दी। आरोपी ने बताया कि उसे दो दिन पहले उठाया गया और फिर पैर में कपड़ा बांध कर गोली मार दी गई।

ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो
जरायम की दुनिया में खाकी का खौफ पैदा करने के लिये तीन दशक पुरानी पुलिस रणनीति एक बार फिर तेजी से अमल में लायी जा रही है। बस फर्क इतना है कि अबकी बदमाशों की पीठ या सीने पर नहीं, पैरों को निशाना बनाकर गोली मारी जा रही है और उन्हें घायल करके जिन्दा पकड़ा जा रहा है ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो और मानवाधिकार कानून आड़े न आयें। इसी कड़ी में गुरूवार को बिल्हौर में राहुल तिवारी और बेकन गंज इलाके में सनी का एनकाउंटर हुआ। इस एनकाउंटर में उन्हें जान से तो नहीं मारा गया लेकिन पैरों पर गोली मारकर उन्हें जिन्दा गिरफ्त में ले लिया गया। बकौल पुलिस, दोनों बदमाशों पर आधा दर्जन से अधिक अपराधिक मुकदमें कायम हैं।

एनजीओ भी खुलकर कर रहे विरोध
पिछली 11 सितम्बर को एक न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा था कि यूपी में योगी सरकार बनने के बाद पुलिस एनकाउंटर में 63 बदमाश मारे गये हैं और इन मुठभेड़ों में चार पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। हालांकि एक एनजीओ द्वारा यूपी पुलिस के डेढ़ हजार से अधिक एनकाउंटरों पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाये जाने के बाद गृह विभाग को एवीडेविट दाखिल कर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। इसके बाद से पुलिस ने अपनी रणनीति बदली और बदमाशों के पैरों में निशाना लगाकर गोली मारना शुरू किया। इस पर भी डीजीपी का बयान आया था कि राज्य में सक्रिय सैंकड़ों क्रिमिनल्स को पकड़ने के लिये ‘‘एनकाउण्टर्स’’ पुलिस रणनीति का अहम हिस्सा है।

बदमाश ने खोल दी पोल
पुलिस मुठभेड़ में घायल सनी उर्फ सनीउल्लाह ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि दो दिन पहले पुलिस उसे गिरफ्तार कर थाने ले गई। जहां मुझे पीटा गया। फिर मुझे जीप में बैठा लिया गया। सूनसान इलाके में पुलिस ने जीप रोकी और मुझे जबरन नीचे उतारा। एक सिपाही ने मेरे पैर पर कपड़ा बांधा और दूसरे ने गोली मार दी। इसके बाद पुलिस घायल अवस्था में मुझे अस्पताल लेकर आई। बदमाश ने यहां तक बताया कि मुझे थाने मे थर्ड डिग्री दी गई। इसके अलावा पुलिस मुठभेड़़ में घायज अन्य अपराधियों के परिजन भी अब खुलकर बोलने लगे हैं। एक घायल बदमाश की मां ने कहा कि बेटे को घर से ले गए और कुछ देर पता चला के मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी है।

कुछ इस तरह से बोले एसएसपी
न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान डीजीपी ने ये भी कहा था कि इस तरह के एनकाउण्टर ‘‘स्टेट पॉलिसी’’ कतई नहीं है और ये पुलिस की रणनीति का हिस्सा है। पिछले एक माह में कानपुर में हुए सभी ग्यारह एनकाउण्टरों में भी यही रणनीति दिखायी पड़ रही है। इस मामले पर एसएसपी अनंत देव तिवारी ने कहा कि बदमाश ने क्या बयान दिया है, इसकी जानकारी हमें नहीं हैं। अपराधियों को पकड़ने का अभियान चलाया गया है। उन्हें पुलिस सरेंडर करने को कहती है, लेकिन उनकी तरफ से फायरिंग होने के बाद बचाव में हमें भी जवाबी कार्रवाई करनी पड़ती है।

 

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