खाद बनाकर उसकी मार्केटिंग करेंगे सीएसए के छात्र

छात्रों में नया हुनर पैदा करने की कवायद
बीएससी एजी अंतिम वर्ष में होगा यह कोर्स

कानपुर। पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र केवल नौकरी के पीछे ही न भागें बल्कि उद्यम की ओर अग्रसर हों। इसी सोच के साथ चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि ने अपने कोर्स में नया विषय जोड़ा है। जिसके तहत छात्र अब बायोफर्टिलाइजर बनाकर किसानों के बीच उसकी मार्केटिंग भी करेंगे।

छात्रों को मिलेगा प्रोत्साहन
इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) ने छात्रों को उद्यम की ओर प्रोत्साहित करने के लिए विवि के मृदा साइंस एवं कृषि रसायन विभाग को छात्रों से बायोफर्टिलाइजर उत्पादन कराने की सलाह दी है। इससे छात्रों में इंटरप्रेन्योरशिप स्किल पैदा होगी।

कॉरपोरेट कंपनी की तरह होगा काम
आईसीएआर ने कहा है कि शिक्षकों को एक कॉरपोरेट कंपनी की तरह काम करना होगा। डीन एग्रीकल्चर साइंस को सीईओ के तौर पर काम करने को कहा गया, विभागाध्यक्ष को एमडी और प्रोफेसर को मैनेजर की तरह काम करना होगा।

सुधरेगी फर्टिलाइजर की क्वालिटी
बीएससी एजी तृतीय वर्ष में छात्रों को प्रशिक्षण देकर बायोफर्टिलाइजर काप्रोडक्शन कराया जाएगा। इससे क्वालिटी में भी सुधार होगा और किसानों का भरोसा भी बढ़ेगा। साथ ही इसके इस्तेमाल का नया ट्रेंड बनेगा। मृदा एवं कृषि रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रवीन्द्र कुमार ने बताया कि इसकी यूनिट स्थापित करने के लिए छात्रों को हर संभव मदद भी जाएगी।

कोर्स में होगा शामिल
बीएससी कृषि अंतिम वर्ष के छात्रों को इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। छात्रों को विशेष तौर पर विभिन्न फसलों के लिए उपयोगी अलग-अलग तरह के बायोफर्टिलाइजर तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। छह महीने तक उनका प्रशिक्षण चलेगा। इसमें विभिन्न तकनीकों के बारे में भी जानकारी मिलेगी। प्रशिक्षण के दौरान ही छात्र बायोफर्टिलाइजर उत्पादन में जुट जाएंगे। इसकी मार्केटिंग कैसे की जाए? इस बारे में विशेषज्ञ जानकारी साझा करेंगे।

 

 

आलोक पाण्डेय
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