ग्रामीणों के जीवन में रोशनी ला रहे सीएसजेएमयू के छात्र

ग्रामीणों के जीवन में रोशनी ला रहे सीएसजेएमयू के छात्र

Alok Pandey | Updated: 12 Jun 2019, 12:01:58 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

24 गांवों में आंखों की बीमारी दूर करने का लक्ष्य, मरीजों को चिन्हित कर उनका करा रहे इलाज

कानपुर। समाजसेवा के प्रति लोगों में रुचि कम ही देखने को मिलती है, पर सीएसजेएमयू में समाज कार्य विभाग के छात्रों में पढ़ाई के साथ जमीन पर समाजसेवा पूरे समर्पण भाव से दिख रही है। यहां के छात्रों ने २४ गांवों में लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने का लक्ष्य तय किया है। ये छात्र इन गावों में जाकर नेत्र रोगियों को चिन्हित कर रहे हैं और फिर जरूरत के मुताबिक उनका इलाज करा रहे हैं।

कानपुर देहात के हैं २४ गांव
सीएसजेएमयू के समाज कार्य विभाग ने कानपुर देहात के २४ गांवों को गोद लिया है। विभाग के छात्र-छात्राएं इन गांवों को अंधमुक्त बनाएंगे। इसके लिए वे गर्मी की छुट्टी में इन गांवों में सर्वे कर आंखों की बीमारी से संबंधित मरीजों की तलाश में जुटे हैं। छात्रों ने आठ गांव का सर्वे पूरा किया है। अभी तक इन गांवों में 823 मरीजों को चिन्हित किया जा चुका है, जिनकी आंखों में दिक्कत है। वहीं, अगले सप्ताह पांच अन्य गांव में सर्वे के लिए छात्रों की टीम पहुंचेगी।

इन गांवों में नहीं होगा एक भी नेत्ररोगी
विवि परिसर में संचालित समाज कार्य विभाग के छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई संग अपने विषयानुसार समाजसेवा का काम शुरू किया है। अंतिम वर्ष के छात्रों ने विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कुमार सिंह की मदद से इन गांवों को छात्रों ने अंधमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। मतलब, इन गांवों में एक भी मरीज आंखों की बीमारी से ग्रसित नहीं होगा। इसके लिए छात्रों ने जेएल रोहतगी नेत्र चिकित्सालय के प्रशासक विजय टण्डन से मिलकर उनकी मदद ली है।

अगले वर्ष तक पूरा होना है लक्ष्य
सीएसजेएमयू के समाजकार्य विभाग विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कुमार सिंह का कहना है कि छात्रों को समाज सेवा के लिए यह लक्ष्य दिया गया है। छात्र पूरी मेहनत से सर्वे कर कैंप में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। अगस्त तक आठ गांव पूरी तरह से आंखों से संबंधित बीमारी से मुक्त होंगे। अगले वर्ष तक सभी 24 गांव को आंखों की बीमारी से दूर करना है। उधर जेएल रोहतगी नेत्र चिकित्सालय के मैनेजर समरेश राय ने बताया कि पहले चरण में आठ गांव को जल्द आंखों की बीमारी से मुक्त कर दिया जाएगा। छात्रों की टीम निरंतर घर-घर जाकर सर्वे कर रही है।

रोजाना हो रहा सर्वे
गर्मी की छुट्टी शुरू होते ही छात्रों ने इन गांवों का रुख किया है। 45 डिग्री तापमान में छात्र-छात्राओं की टीम रोज गांव के एक-एक घर में सर्वे करने के बाद उनका डाटा एकत्र कर रही है। अभी तक आठ गांव का सर्वे होने के साथ कैम्प में मरीजों की बीमारी चिन्हित की जा चुकी है। अभी मोतियाबिंद के ऑपरेशन वाले मरीजों की संख्या अधिक है। अभी तक फत्तेपुर, बसौसी, मलिकपुर, टोडरपुर, बाघपुर, न्यूठा, रास्तपुर और नहेरी बटी गांवों में सर्वे का काम पूरा हो चुका है।

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