डकैत से सांसद बनीं फूलन देवी पर इस तारीख को सुनाया जाएगा फैसला, 26 लोगों को लाइन में खड़ा कर मारी थी गोली

- बेहमई नरसंहार कांड पर फैसला छह जनवरी को

- 14 फरवरी, 1981 में फूलन देवी ने बेहमई में 26 लोगों पर बरसाईं थी गोलियां

- 38 साल पुराने मामले पर छह को आएगा फैसला

By: Karishma Lalwani

Updated: 03 Jan 2020, 04:26 PM IST

कानपुर. देश को झकझोर देने वाले बेहमई नरसंहार केस में इंतजार की घड़ियां अब खत्म होने को है। 38 साल पहले हुए बेहमई कांड का फैसला छह जनवरी को सुनाया जाएगा। डकैत से सांसद तक का सफर तय करने वालीं फूलन देवी (Phoolen Devi) ने 14 फरवरी, 1981 में 26 लोगों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भूना था।

फूलन देवी ने जिन पर गोलियां बरसाई थीं, उनमें से 20 की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि छह अन्य घायल हुए थे। वहीं, इनमें से 17 ठाकुर जाती के थे। मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय दस्यु प्रभावित क्षेत्र में चल रही थी। मुख्य आरोपित फूलन देवी की मौत के बाद 2012 में डकैत भीखा, पोसा, विश्वनाथ, श्यामबाबू व राम सिंह पर आरोप तय किए गए। इनमे से राम सिंह की जेल में मौत हो गई। साल 2014 में गवाही समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद बचाव पक्ष ने समय मांगा। इस मामले में कई बार बहस हुई। पीठासीन अधिकारी के स्थानांतरण से भी मामला विलंबित होता गया। लंबे समय से चल रही सुनवाई में दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अब छह जनवरी को फैसला आएगा।

फूलन देवी पर फैसला छह जनवरी को, 26 लोगों को लाइन में खड़ा कर बरसाईं थी गोलियां

2001 में हुई थी हत्या

बेहमई नरसंहार कांड के दो साल बाद यानी 1983 में फूलन देवी ने सरेंडर कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सपा के टिकट पर मिर्जापुर का चुनाव लड़ा और जीत गईं। साल 2001 में शेर सिंह राणा नाम के व्यक्ति ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।

बेहमई कांड में कब क्या हुआ

- 14 फरवरी, 1981 को फूलन बदला लेने बेहमई पहुंची

- दिन के करीब ढाई बजे ठाकुरों को एक लाइन में खड़ा उनपर गोलियां बरसाईं

- फूलन देवी ने उस दौरान मध्य प्रदेश के एमपी रहे अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण किया। उनपर 18 अपहरण, हत्या और 30 डकैती के चार्जेस लगे थे। इसके लिए उन्हें 11 साल की जेल हुई

- 1993 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने उन पर लगे सभी आरोप वापस ले लिए थे। 1994 में फूलन जेल से छूटीं

- 1996 में फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत गईं। मिर्जापुर से सांसद बनीं। चम्बल में घूमने वाली अब दिल्ली के अशोका रोड के शानदार बंगले में रहने लगी।

- 1998 में हार गईं, पर फिर 1999 में वहीं से जीत गईं। 25 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा फूलन से मिलने आया। इस दौरान उसने घर के गेट पर ही फूलन को गोली मार दी। कहा कि मैंने बेहमई हत्याकांड का बदला लिया।

-14 अगस्त 2014 को दिल्ली की एक अदालत ने शेर सिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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Karishma Lalwani
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