एक और फाइनेंस कंपनी का निकला दिवाला, कानपुर के २७५ करोड़ डूबे

आईएलएंडएफएस के बाद डीएचएफएल की हालत हुई खस्ता
शहर में रियल इस्टेट के दर्जनों प्रोजेक्ट अधर में लटके

कानपुर। शहर के २२ हजार से ज्यादा निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। करोड़ो के कर्ज में डूबी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई शुरू हो गई है। जिससे शहर के निवेशकों के पसीने छूट रहे हैं। उन्हें अपना पैसा डूबता हुआ नजर आ रहा है। शहर के लोगों का २७५ करोड़ रुपया कंपनी के अनसिक्योर्ड लोन में निवेश किया गया था। दूसरी ओर डीएचएफएल से जुड़े शहर के छह दर्जन से ज्यादा रियल इस्टेट प्रोजेक्ट भी अधर में लटक गए हैं। कंपनी के दिवालिया घोषित होने से शहर का बहुत बड़ा तबका प्रभावित हुआ है। कंपनी से जुड़े लोगों में हडक़ंप की स्थिति है।

किसी भी भुगतान पर लगी रोक
नए कानून लागू होने के बाद यह पहला मौका है जब किसी एनबीएफसी के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई शुरू की गई है। इससे पहले फाइनेंस कंपनियों को दिवालिया कानून के दायरे से बाहर रखा गया था। आवेदन पर फैसला होने तक इसने कंपनी द्वारा सभी तरह के भुगतान पर भी रोक लगा दी है।

सिक्योर्ड लोन के निवेशकों को राहत
डीएचएफएल के सिक्योर्ड लोन में निवेश हुए लगभग 450 करोड़ रुपए निवेशकों को मिल जाएंगे। डीएचएफएल में उन्हीं लोगों का पैसा डूबा है, जिन्होंने ज्यादा रिटर्न के लालच में अनसिक्योर्ड निवेश कर रखा था। रिटेल निवेशक अनसिक्योर्ड वर्ग में आते हैं।

कंपनी पर था इतना बकाया
कुल मिलाकर डीएचएफएल पर बैंकों, एनएचबी, म्यूचुअल फंडों और बॉन्ड धारकों के 83,873 करोड़ रुपए बकाया थे। इसमें से 74,054 करोड़ के कर्ज सिक्योर्ड और 9,818 करोड़ रुपए के कर्ज अनसिक्योर्ड थे। रिटेल निवेशक अनसिक्योर्ड वर्ग में आते हैं। पिछले साल आइएलएंडएफएस के डिफॉल्ट करने के बाद से एनबीएफसी सेक्टर मुश्किल में है। इसे बैंकों से कर्ज नहीं मिलने के कारण नकदी की समस्या आ गई है।

बिल्डरों की जमीन हिली
डीएचएफएल का दिवाला निकलने से शहर की छोटी इकाइयों और छोटे बिल्डरों को सबसे ज्यादा झटका लगा है। डीएचएफल की शहर में गहरी पैठ है। कंपनी के दिवालिया होने से 80 से ज्यादा रियल इस्टेट और छोटी इकाइयों के प्रोजेक्ट अधर में लटक गई हैं। इन्हें डीएचएफएल ने लोन की पहली या दूसरी किस्त जारी कर दी थी। इसी के जमा पर एक-दो फीसदी ज्यादा ब्याज के लालच में 275 करोड़ रुपए अनसिक्योर्ड मद में निवेश किए गए थे, जो डूब गए हैं।

मुश्किल में एनबीएफसी सेक्टर
पिछले साल आइएलएंडएफएस के डिफॉल्ट करने के बाद से एनबीएफसी सेक्टर मुश्किल में है। इसे बैंकों से कर्ज नहीं मिलने के कारण नकदी की समस्या आ गई है। चुकनू सिक्योरिटीज लिमिटेड के एमडी संजीव अग्रवाल ने बताया कि डीएचएफएल को कर्ज देने वाली संस्थाएं कंपनी में 51 फीसदी हिस्सेदारी लेने पर विचार कर रही थीं लेकिन इस योजना की अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई थी।

आलोक पाण्डेय
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