7 साल बाद हॉरर किलिंग के मामले का खुलासा, भाई ने बहन को मार कर आंगन में दफनाया

प्रार्पटी डीलर की हत्या के बाद लगा पुलिस के हत्थे, पूछताछ के दौरान बहन की हत्या का खोला राज

By: Vinod Nigam

Published: 20 Jul 2018, 03:07 PM IST

कानपुर। कहते हैं जुर्म छिपाए नहीं छिप सकता और अपराधी कितना भी शातिर क्यों ना हो कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता। ऐसा ही मामला कानपुर में सामने आया है। यहां सात साल पहले हुए क़त्ल का सुराग पुलिस के हाथ लगा तो सीओ कैंट अजीत सिंह खुद फावड़ा लेकर आरोपी के घर पहुंच गए। करीब दो घंटे तक आंगन में चली खुदाई के बाद एक महिला के शव के अवशेष के अलावा हाथ के कंगन और पैर की बिछिया पुलिस ने बरामद की। फॉरेसिंक टीम ने जांच पड़ताल के बाद खुदाई में मिले अवशेषों को सुरक्षित रख लिया है। अब इन्हें जांच के लिए लखनऊ भेजा जाएगा। सीओ ने बताया कि एक प्रार्पटी डीलर के हत्यारोपी से जब पुलिस ने अन्य वारदातों के मामले में पूछताछ की तो आरोपी ने अपनी सगी बहन की हत्या करने की बात कबूली। इसी के बाद पुलिस हरकत में आई और उसके घर जाकर खुदाई की।

इस तरह से पुलिस कर पाई खुलासा
ओलपुरवा चकेरी निवासी जगदंबा के घर 11 जुलाई को साथी प्रार्पटी डीलर रणविजय राजपूत का शव पुलिस ने बरामद किया था। शक के बिनाह पर पुलिस ने उसके मित्र जगदम्बा को अरेस्ट कर लिया और पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल करने के साथ ही बहन की हत्या के रहस्य से परदा उठाया। आरोपी ने पुलिस को बताया कि सात साल पहले अपनी बहन आशा उर्फ डॉली की हत्या भी की थी। घर के आंगन में उसने बहन के शव को दफनाया था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने खुदाई कराई तो गहरे गड्ढे में हड्डियों के अवशेष, पायल, कंगन चूड़ी बरामद हुईं। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्र किए। इसी के बाद आठ साल पुराने हत्याकांड का खुलासा हो पाया।

इस लिए बहन का किया कत्ल
सीओ अजीत सिंह ने कहा कि, आरोपी ने पूछताछ के दौरान बताया कि आशा का कालोनी के संतोष से प्रेम संबंध थे। इसका पता चलने पर जगदंबा ने बहन के घर से बाहर जाने पर रोक लगा दी। लेकिन वो भाई के मना करने के बावजूद प्रेमी से मिलती रही। दोनों ने शादी करने का मन बना लिया और कोर्ट में जाकर सात फेरे लेने वाले थे। इसकी भनक जगदम्बा को हुई तो उसने अपनी बहन को मार देने का प्लॉन बना डाला। जुलाई 2011 में आरोपी ने बहन की धारदार हथियार से हत्या कर दी और शव को मकान के आंगन में 14 फिट गहरे गड्डे में गाड़ दिया था। वर्ष 2013 में शव को निकालकर डपकेश्वर घाट पर जला दिया था, लेकिन शव के अवशेष और कपड़े रह गए थे, जो आरोपी ने फिर से आंगन में दफना दिया। पुलिस ने आरोपी के घर से मृतका के अवशेष सहित कई सुराग हाथ लगे हैं।

पुलिस को करता रहा गुमराह
जगदंबा ने संतोष पर अपनी बहन के अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस की विवेचना में संतोष को क्लीन चिट मिल गई थी। पुलिस ने उस केस को बंद नहीं किया, बल्कि उसके खुलासे के लिए पिछले सात सालों से लगी रही। इतना ही नहीं संध्या के प्रेमी संतोष भी पुलिस में जाकर खुलासे के लिए दबरव बनाया। संतोष ने बताया कि हमें पहले से ही जगदम्बा पर शक था। लेकिन पुलिस ने हमें ही आरोपी मानकर अरेस्ट कर लिया। लेकिन जांच के बाद हमें छोड़ दिया गया। इसी दौरान जगदम्बा ने आयाराम-गयाराम की दुनियावालों से दोस्ती बना ली और हमें भी खत्म करने की प्लॉनिंग करने लगा। हमने जगदम्बा के खौफ से शहर छोड़ दिया।

 

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