आईपीएस पत्नी रवीना को लेकर गए थे थियेटर, फिल्म स्त्री देखने के बाद शुरू हुई थी खटपट

Vinod Nigam | Publish: Sep, 09 2018 07:22:16 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

जहर खाने से दो दिन पहले पत्नी को लेकर थे फिल्म देखने, थियेटर के बाहर दोनों के बीच हुआ था विवाद, फिर खा लिया सल्फास

कानपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस के तेज-तर्राक व इमानदार 2014 बैच के आईपीएस सुरेंद्र दास का रविवार को कानपुर के रीजेंसी हॉस्पिटल में निधन हो गया। आईपीएस अफसर ने पत्नी से विवाद के बाद बुधवार को सल्फास गया था। पत्नी व सुरक्षाकर्मी उन्हें लेकर पहले उर्सला अस्पताल पहुंचे। यहां से डॉक्टर्स ने उन्हें रीजेंसी के लिए रेफर कर दिया। सुरेंद्र दास की मौत के बाद उनके जीवन के कई किस्से धीरे-धीरे कर सामने आ रहे हैं। जहर खाने के दो दिन पहले बीते रविवार को वह अपनी पत्नी डॉैटर रवीना सिंह के साथ रेव मोती मॉल में ’स्त्री’ फिल्म देखने गए थे। फिल्म देखने के बाद थियेटर के बाहर दोनों के बीच जमकर खटपट भी हुई थी। आईपीएस के एक डॉक्टर मित्र ने दोनों को समझा कर शांत कराया। इस दौरान पत्नी रवीना घर जाने के बजाए अपने खुद के सरकारी बंगले में चली गई थी। सोमवार की शाम पत्नी रवीना घर पहुंची, पर एसपी सुरेंद्र दास ऑफिस में थे। पत्नी ने उन्हें फोनकर घर बुलाया और फिर दोनों के बीच जमकर बहस हुई। इसी के बाद आईपीएस ने कर्मचारियों के जरिए जहर मंगवाया और खाकर खुदकुशी कर ली।

बुधवार को खत्म कर ली जिंदगी
आईपीएस सुरेंद्र दास की मौत के बाद उनकी मां, बहन, भाई और चार दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल है। एसएसपी अनंत देव ने आईपीएस के शव का पंचनामा भरवा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। डीएम विजय विश्वास पंत की मौजूदगी में डॉक्टर्स ने उनके शव का पोस्टमार्टम किया। पुलिस शव को लेकर पुलिस लाइन पहुंचे। यहां अपने अधिकारी को गार्ड-ऑफ-ऑनर देकर लखनऊ के लिए रवाना कर दिया। आईपीएस तो अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी जिंदगी के किस्से लोगों की जुबां पर हैं। आईपीएस सुरेंद्र दास के डॉक्टर दोस्त ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि एसपी जिंदादिल इंसान थे। वो पत्नी के लिए एक प्राईवेट अस्पताल खुलवाना चाहते थे। सुरेंद्र दास के पिता सेना में कर्नल पद से रिटायर्ड हुए थे। घर की आर्थिक स्थित बहुत अच्छी थी। बलिया में मकान और करीब पचास बीघे के खेत हैं। डॉक्टा ने बताया कि रविवार को सुरेंद्र दास ने हमें फोनकर घर बुलाया और फिल्म स्त्री देखने को कहा।

रेवमोती में देखी फिल्म
डॉक्टर ने बताया कि मैं अपनी पत्नी व बच्चों के साथ तो एसपी सुरेंद्र पत्नी रवीना के साथ रविवार की रात 10ः30 में रेवमोती पहुंचे। रात 10ः55 पर ’स्त्री’ फिल्म शुरू हुई। देर रात एक बजे के करीब जब फिल्म खत्म हुई तो सिनेमा हॉल में मौजूद लोग एक दूसरे से फिल्म की कहानी को लेकर बातचीत कर रहे थे। हम भी फिल्म देखने के बाद पत्नी से बात कर रहे थे, लेकिन एसपी सुरेंद्र दास और उनकी पत्नी डॉ. रवीना सिनेमाहॉल से बाहर निकलते हुए गुमसुम नजर आए। डॉक्टर ने बताया कि दोनों के बीच थियेटर के बाहर बहस होने लगी तो हम जाकर उन्हें शांत कराया। एसपी पत्नी रवीना को लेकर अपने सरकारी आवास की तरफ निकले तो हम भी कार से घर चले गए। दो दिन हमें आईपीएस के जहर खाने की जानकारी हुई तो हम भागकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन उनकी हालत खराब होने के चलते बातचीत नहीं हो सकी।

डरावनी मूवी का था सौख
आईपीएस के साथ काम कर चुके हैं एक इंस्पेक्टर ने बताया कि एसपी साहब को डरावनी मूवी देखने का बहुत सौख था। जब स्त्री फिल्म का पोस्टर जारी हुआ तो उन्होंने कहा कि यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है और इसे पुलिसबल को जरूर देखनी चाहिए। इंस्पेक्टर ने बताया कि एसपी साहब अक्सर इस फिल्म के बारे में चर्चा किया करते थे और रिलीज के बाद फिल्म देखने के लिए गए थे। इंस्पेक्टर की मानें तो पत्नी रवीना फिल्म स्त्री फल्म देखना नहीं चाहतीं, लेकिन पति के कहने पर वो राजी हुई और मूवी देखने के बाद और विवाद दोनों के बीच बड़ गया।

सच्ची घटना पर अधारित है स्त्री
’स्त्री’ फिल्म एक लड़की की आत्मा(चुड़ैल) के बारे में है जो हर साल शहर में आती है और मर्दों को मारकर सिर्फ उनके कपड़े छोड़ जाती है। ज्यादा डरावनी बात इस फिल्म की ये है कि ये कहानी सच्ची घटना पर आधारित बताई जाती है। दरसअल 1990 के आसपास कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में एक अफवाह फैली थी कि एक ‘चुड़ैल’ है जो शहर की गलियों में रात के वक्त घूमती है। वो चुड़ैल मर्दों की तलाश में रहती है। बताते हैं कि वो चुड़ैल लोगों के घरों का दरवाजा खटखटाती थी और बड़ी प्यारी सी आवाज में घर के मर्द को आवाज देती थी। खासकर मर्द की मां या पत्नी की आवाज में वो उन्हें पुकारती थी। अपने जानने वाले की आवाज सुनकर अगर मर्द बाहर जाता था तो फिर वो चुड़ैल अगले 24 घंटे के भीतर-भीतर उसे मार देती थी। ये अफवाह शहर में आग की तरह फैल चुकी थी, लोग डरे हुए रहते थे और रात में घरों से बाहर ही नहीं निकलते थे।

 

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