बेटी सिंगापुर में डॉक्टर और बेटा है IIT इंजीनियर, फिर भी फुटपाथ पर चलाते हैं क्लीनिक, गरीबों के लिए बने मसीहा

डॉक्टर बना गरीबों का मसीहा, तकिया वाले मेडिकल कॉलेज को लेनी चाहिए प्रेरणा...

विनोद निगम

 

कानपुर. झांसी में डॉक्टरों की संवेदनहीनता का एक हैरतअंगेज मामला सामने कुछ दिन पहले सामने आया था। यहां स्कूल बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचे घायल क्लीनर की टांग को काटकर डॉक्टरों ने तकिया बनाकर उसके ही सिर के नीचे लगा दिया। जिसकी गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक में सुनाई दी थी। लेकिन इसी पेशे से जुड़े एक डॉक्टर ने अपने पेशे की मिशाल पेश करते हुए गरीब लोगों के लिए सड़क पर अस्पताल खोलकर उनका इलाज कर रहा है। हादसे में घायल को तत्काल इलाज के साथ दवा निशुल्क देता है। सौ बेड के अस्पताल का मालिक होने के बावजूद वह हर रोज कानपुर कचहरी के बाहर फुटपाथ पर बैठकर गरीब बीमारों को देखते है और मुफ्त में दवा भी देते हैं। लोग डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी को धरती के भगवान के नाम से पुकारते हैं।


सड़क पर गरीबों के लिए खोला क्लीनिक

झांसी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की हैवानियत का चेहरा सामने आने के बाद लोग अब इस पेशे से जुड़े लोगों को इतवार नहीं रहा। सरकारी डॉक्टर पैसे के चलते अपने पेशे को बदमान और बेच रहे हैं। लेकिन सड़क पर गरीबों का अस्पताल चला रहे डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी आज भी डॉक्टर के पेशे को जिंदा किए हुए हैं। वह कहते हैं, काम करो ऐसा की पहचान जाए, हर कदम ऐसा चलो की निशां बन जाए, यंहा जिंदगी तो सभी काट ही लेते हैं, जिंदगी जियो ऐसी की मिसाल बन जाए। पर कुछ डॉक्टर पैसों के कारण इस काम को बदनाम कर दिया है। डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी ने बताया कि हमने अपने अपनी क्लीनिक से समय निकालकर यहां गरीब और असहाय लोगों का इलाज मुफ्त में करने की ठान ली। हमने चेतना चौराहे पर बने फुटपाथ को अपना ठिकाना बनाया और क्लिनिक खोल दी। हम रोजाना दो घंटे गरीबों और असहाय लोगों का मुफ्त में इलाज करते हैं। जांच करने के बाद अपने पास से दवा भी मुफ्त में देते हैं। डॉ चौधरी फुटपाथ पर शहीद हुए सैनिकों के परिवार के लिए एक दान पात्र भी रखते है जिसमें कोई भी मरीज अपने सामर्थ्य के हिसाब से पैसा डाल सकता है।


छोड़ फुटपाट में लगाई दुकान

डॉ चौधरी के परिवार में करीब सभी सदस्य डॉक्टर हैं और वह एक संपन्न परिवार से हैं, बावजूद इसके उनका समाज सेवा का यह जज्बा देख डॉक्टर पेशे के प्रति आदर और सम्मान का भाव जगाता है। डॉ चौधरी की बेटी सिंगापुर में डॉक्टर है, बेटा आईआईटी इंजिनियर है तो वहीं भाई और भाभी शहर के नामी डॉक्टर्स हैं। ऐसे संपन्न परिवार के होते हुए भी शहीद परिवारों के लिए डॉ चौधरी फुटपाथ पर अपना क्लीनिक चलाते हैं, जबकि उनका खुद का अपना 100 बेड का अस्पताल है। डॉ चौधरी के अनुसार उनके पास रोजाना 8 से 10 मरीज इलाज के लिए आते हैं और वो अपने दो घंटे के शेड्यूल में उनको देखते हैं। डॉक्टा चौधरी का कहना है कि शहीदों के परिवारों के सहयोग के लिए उन्होंने जो दानपात्र रखा है । वह यह देखने के लिए कि जनता शहीदों के परिवार के लिए क्या सहयोग करती है।


मरीजों के लिए धरती के भगवान

मंदिर के ठीक बगल में फुटपाथ पर बने क्लीनिक पर रोजाना कई मरीज अपना इलाज करवाने आते हैं। शुगर का इलाज करवाने आये शिव प्रकाश शुक्ला ने बताया कि मैं रोजाना मंदिर में दर्शन करने आता हूं, तो डाक्टर साहब को इलाज करते देखता था। डाक्टर साहब बड़े सजह भाव से लोगो का इलाज करते हैं। आज डाक्टर साहब से शुगर का इलाज करवाने आया हूं। डाक्टर साहब से चेकअप करवाके काफी अच्छा लगा। उन्होंने बहुत सही जानकारी दी। डाक्टर को फुटपाथ पर इलाज करते देख लोगों को कौतूहल भी होता है की इतने बड़े अस्पताल के संचालक होते हुए भी डाक्टर फुटपाथ पर मुफ्त में मरीजों का इलाज करते हैं। मरीज रामअवतार ने बताया कि हम कई सालों से पेट की तकलीफ से पीड़ित थे। प्राईवेट अस्पतलों में इलाज करवाया, लेकिन फाएदा नहीं हुआ। हैलट और उर्सला में भी गए, जहां जांच और दवा के नाम पर हजारों रूपए हमसे ऐंठ लिए गए। पर डॉक्टर साहब को दिखाने के बाद हमें अराम मिल गया है।


झांसी की घटना को याद कर रो पड़े डॉक्टर

डॉक्टर चौधरी ने बताया कि कुछ साल पहले हैलट में डॉक्टरों ने एक बच्चे के साथ गलत कार्य किया, जिसके चलते वहां के डॉक्टरों के साथ हमारे जैसे अन्य डॉक्टरों की बदमानी हुई। झांसी की घटना के बारे में जब हमने अखबरों में पढ़ा तो आंख में आसू आ गए थे। डॉ चौधरी कहते हैं कि पिछले सद सालों से डॉक्टर के पेशे से जुड़े लोग व्यवसायिक हो गए हैं। वह इलाज के नाम पर गरीबों से पैसे लेकर अपना घर चमकाते हैं। जबकि उन्हें सबसे पहले अपना धर्म निभाना चाहिए। डॉक्टर चौधरी ने बताया कि जब हमारी पहली पोस्टिंग एक अस्पताल में हुई तक हम पैदल लोगों के घर-घर जाकर उनका इलाज करते थे, पर सरकारी अस्पतलों के हालात बदल गए हैं। डॉक्टर अस्पतलों में समय न देकर अपनी प्राईवेट क्लीनिकों में बैठकर मरीजों का इलाज करते हैं।

नितिन श्रीवास्तव
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