मानसिक तनाव ने दे दिया भोजन की नली में कैंसर

एसिडिटी की समय से जांच न कराने का नतीजा
लगातार तनाव में रहने से हो जाती है एसिडिटी

कानपुर। सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन जिन लोगों को लगातार एसिडिटी की शिकायत रहती है उनमें भोजन की नली के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में एक मरीज को भोजन की नली में कैंसर निकला। जबकि वह मरीज पान मसाला, तंबाकू, शराब, मांसाहारी भोजन नहीं लेता है। डॉक्टरों के मुताबिक यह कैंसर एसिडिटी के कारण हुए घाव से बना है। समय से इलाज न होने के चलते यह कैंसर एडवांस स्टेज का बन जाता है।

तनाव बनता प्रमुख कारण
भले ही भोजन की नली में घाव एसिडिटी से बनते हों, लेकिन एसिडिटी का प्रमुख कारण भी तनाव ही है। ज्यादा तनाव में रहने से एडरीनलीन नामक न्यूरो केमिकल का रिसाव बढ़ जाता है और पेट व आंत की ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं। जिसमें पेराटाइल नामक ग्रंथि से एचसीएल का रिसाव अधिक होने लगता है और डकार के साथ यह एसिड गले तक आता है, जिससे गले में छोटे-छोटे घाव हो जाते हैं। लगातार एसिड के संपर्क में रहने से ये घाव कैंसर में तब्दील हो जाते हैं।

इस कैंसर के पांच सौ रोगी
जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में इस तरह के कैंसर वाले पांच सौ रोगी हैं, जिन्हें मानसिक तनाव ने यह रोग दे दिया। पिछले पांच साल की रिपोर्ट के आधार पर इस तरह के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बीमारी का पता तभी चल पाता है जब मरीज एडवांस स्टेज पर पहुंच जाता है। तब न तो सर्जरी हो सकती है और न ही सिंकाई। बस दवा से ही काम चलाया जा सकता है।

जागरूकता और तनाव मुक्ति से बचाव
डॉक्टरों का कहना है कि तनावमुक्त रहकर इस बीमारी से बचा जा सकता है। इसके लिए जागरूकता की भी जरूरत है। अगर समय से एसिडिटी की जांच करा ली जाए तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। जेके कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. एम पी मिश्र ने बताया कि जा संस्थाएं हमसे संपर्क में रहती हैं उनसे कहा जा रहा है कि लोगों को इसके बारे में बताएं ताकि लोगों को समय रहते समझ में आ जाए।

आलोक पाण्डेय
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned