प्रधानमंत्री मोदी के जनधन खाते बन गए इन गरीबों के लिए दुखदाई, खड़ी हो गयी बड़ी मुसीबत

प्रधानमंत्री मोदी के जनधन खाते बन गए इन गरीबों के लिए दुखदाई, खड़ी हो गयी बड़ी मुसीबत

Alok Pandey | Publish: Oct, 13 2018 03:12:36 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 03:12:37 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

केंद्र सरकार ने गरीबों को सीधे लाभ देने के लिये जनधन खाते खुलवाये थे। आज वही खाते गरीबों को मिलने वाले आवास में अडचन बन रहे हैं, आवास की दूसरी किश्त अधर मे लटकी।

अरविंद वर्मा

कानपुर देहात-केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के लिए चलाई गई जनधन योजना गरीबों के लिए ही मुसीबत बन गयी है। ऐसा ही मामला कानपुर देहात में सामने आया है। दरअसल केंद्र की सत्ता आते ही गरीबों के लिए जन धन योजना के तहत बैंक में खाते खुलवाए गए थे, जिससे सरकार की योजनाओं का गरीबों को सीधे लाभ मिल सके लेकिन वही जन धन खाते निर्धारित लिमिट की वजह से आज गरीबों को मिल रहे प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण में अड़चन बन गए है। बता दें कि अकबरपुर क्षेत्र के पुत्ती पुरवा गांव में माहुट प्रजाति के गरीब निवास करते हैं। माली हालत के चलते ये गरीब झोपड़ पट्टी में रहकर गुजारा करते हैं, जो बरसात एवं कड़ाके की ठंड में दुखदायी साबित होते हैं। ये गरीब परिवार जैसे तैसे मजदूरी करके परिवार पालते हैं। इसके चलते बीते जुलाई 2017 में गांव के इन गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिए गए थे।

 

प्रथम किश्त से खड़े हो गए अधूरे आवास

आवास बनवाने के भूमि प्रबंध समिति ने इनके लिए रोशनमऊ, तिंगाई मार्ग पर भूमि आवंटित कर दी। लिए सारी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद लाभार्थी नीतू, अजमीरा, खतीना, सज्ज़ाक, ममूलन, उमर अली, नीलम के परिवारों को आवास के लिए प्रथम किश्त में 40 हजार रुपये की धनराशि जनधन खाते में भेज दी गयी। खाते में पैसा आते ही इन लाभार्थियों ने आवास बनाना शुरू कर दिया। पैसा खत्म होने के बाद दूसरी किश्त के लिए इन लोगों ने ब्लाक से सत्यापन कराया। जिसके बाद दूसरी किश्त में 70 हजार रुपये की धनराशि जारी की गई लेकिन सरकार द्वारा जनधन खाते की लिमिट 50 हजार सीमित होने के चलते दूसरी किश्त अधर में लटक गई। क्योंकि जनधन खाते में अधिकतम 50 हजार की धनराशि स्थानांतरण करने की सीमा निश्चित है, इसके चलते दूसरी किश्त वापस हो गयी और अभी आवास सपना ही दिख रहा है।

 

आधे अधूरे खड़े रह गए लाभार्थियों के आवास

लाभार्थियों रवीना व कुइया का कहना है कि आवास के लिए पहली किश्त मिलने पर घर बनने का सपना पूरा होता दिख रहा था लेकिन खाते में दिक्कत आने से पैसा नही मिल पाया। अफसरों से शिकायत की लेकिन कई माह बीतने के बाद भी दूसरी किश्त का पैसा अभी तक नही मिला है। दूसरा खाते खुलवाने की प्रक्रिया की है अभी फिलहाल में आवास सपना ही दिख रहा है। देखा जाए तो अभी वही फूंस की झोपड़ी ही आशियाना बना है। इस संबंध में ग्राम पंचायत अधिकारी आकांक्षा त्रिपाठी ने बताया कि जनधन बैंक खाता होने की वजह से दूसरी किश्त लाभार्थियों को समय पर नहीं मिली है। बाद में इसकी जानकारी हुई। अब आवास के लाभार्थियों का दूसरा बैंक खाता खुलवाया गया है। दूसरी किश्त नये खाते में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।

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