ये थानेदार कुछ इस तरह करते थे नेक काम कि स्थानांतरण विदाई पर आज रो पड़े लोग, जानिये किस तरह बने गरीबों के हमदर्द

Arvind Kumar Verma

Updated: 12 Jul 2019, 05:02:44 PM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

अरविंद वर्मा

कानपुर देहात-बेदर्द खाकी, ज़ालिम पुलिस, पुलिस की गुंडागर्दी , पुलिस का नाम आते ही जेहन में कुछ इसी तरह के सवाल उठते हैं, लेकिन कानपुर देहात के एक ऐसे पुलिस आफीसर, जिन्होंने इसके मायने ही बदल दिए हैं। हम बात कर रहे हैं मंगलपुर प्रभारी इंस्पेक्टर तुलसीराम पांडेय की। जो बखूबी अपने नाम की तरह ही अपनी ड्यूटी के दौरान दायित्वों का निर्वहन करते हैं। तुलसीराम जिले के पुलिस विभाग के ऐसे पुलिस कर्मी है, जो मित्र पुलिस के टैग को ज़िंदा किये हुए हैं। शासन के निर्देशों का पालन करते हुए पीड़ितों से मित्रवत पेश आकर समस्याओं का निराकरण करने वाले थानाध्यक्ष के स्थानांतरण के बाद आज उनकी विदाई पर स्थानीय लोग रो पड़े। इस मौके पर लोगों ने उन्हें ऐतिहासिक विदाई देकर नजीर पेश की। लोगों ने उन्हें दूल्हा बना रथ पर बैठाकर बैंड बाजे के साथ रसूलाबाद थाने के लिए विदा किया।

 

बैंड बाजे के साथ दी गई भावभीनी विदाई

बैंड बाजे की धुन पर नाचते लोग, शानो शौकत से जाती ये बारात और बग्घी पर विराजमान खाकी वर्दी पहने दूल्हा। ये नज़ारा है कानपुर देहात ज़िले के मंगलपुर थाना क्षेत्र का, जहां मंगलपुर थानाध्यक्ष तुलसीराम पांडेय का ट्रांसफर रसूलाबाद कोतवाली हो गया है। लिहाज़ा लोगों ने अपने चहेते अधिकारी की बिदाई एकदम नए अंदाज में की। इंस्पेक्टर तुलसीराम पांडेय को दूल्हा बनाकर बग्घी पर बैठाया गया और शानदार बैंड मंगाया गया। क्षेत्र की जनता बाराती बनी और पूरे क्षेत्र में बारात घुमाई गयी। फूलों की वर्षा के साथ बैंड बाजे की धुन पर लोग डांस करते हैं। जाहिर है कि इंस्पेक्टर तुलसीराम पांडेय की तरह अगर हर पुलिसकर्मी कार्यशैली को अंजाम दे तो इस तरह की अनोखी बारात आये दिन देखने को मिलेंगी।

 

इस तरह करते थे नेक काम

सच है कि लोगो के दिलो में अपने चहेते थानाध्यक्ष के ट्रांसफर होने का दुख है लेकिन खुशी इस बात की है कि लगभग 1 साल तुलसीराम पांडेय ने मंगलपुर क्षेत्र के लोगो के साथ इंसाफ किया। किसी के साथ अन्याय नही होने दिया। आपको बता दें कि मंगलपुर में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 12 गरीब बच्चों के स्कूलों का संचालन भली भांति कराया। यहां तक कि अपनी ड्यूटी के साथ उन बच्चों के स्कूल जाकर उन्हें समय दिया करते थे। समय समय पर निशुल्क पुस्तकें, कपड़े और जरूरतमंद सामान उपलब्ध कराते थे। स्कूल पहुंचकर उन्हें शिक्षा देते थे और त्यौहारों पर उपहार भेंट कर उनका मनोबल बढ़ाते थे। अभिभावकों को बच्चों को रोजाना स्कूल भेजने व देखरेख करने की नसीहत देने वाले इंस्पेक्टर की विदाई पर आज उन नन्हे मुन्ने बच्चों सहित अभिभावकों की आंखे डबडबा गयी। फिलहाल रसूलाबाद थाने पहुंचकर उन्होंने चार्ज संभाल लिया है।

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