फलों का राजा आम आदमी से हो सकता दूर, आम के बौर पर सर्दी का असर

उत्पादन कम होने पर आसमान पर होंगे दाम
दलहली और तिलहनी फसलों को भी नुकसान

कानपुर। इस बार कड़ाके की सर्दी ने आम की फसल पर भी असर डाला है। इस बार फलों का राजा आम आदमी की पहुंच से दूर जा सकता है। उत्पादन कम होने से आम के दाम खास होने के आसार हैं। सर्दी का असर आम के बौर पर पड़ रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक आम के साथ-साथ दूसरी फसलों को भी सर्दी ने प्रभावित किया है। विभिन्न फसलों के पौधों की लंबाई नहीं बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इसका फूलों और फलियों पर व्यापक असर पड़ेगा। वैज्ञानिकों का अनुमान लगाया है कि गेहूं को छोडक़र बाकी फसलों पर 30-40 फीसदी नुकसान की आशंका है।

धूप की कमी का असर
दलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. नरेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि पौधों की बाढ़ पर असर पड़ रहा है, अब धूप निकलने से ही राहत मिलेगी। उधर सब्जी फसलों में टमाटर, सब्जी मटर और फली वाली अन्य फसलों को नुकसान हो रहा है। सीएसए कृषि विश्वविद्यालय के हार्टीकल्चर विभाग के वैज्ञानिक डॉ. वीके त्रिपाठी के मुताबिक आम में बौर आने का यह समय है। अलग-अलग इलाकों में जनवरी के अंत तक बौर आ जाते हैं। कुछ इलाकों में कूची से कल्ले निकल गए हैं तो कुछ में आने वाले हैं। ऐसी स्थिति में बारिश काफी नुकसान कर सकती है।

फसल पर बीमारी का हमला
डॉ. वीके त्रिपाठी के मुताबिक बादलों की वजह से पाउडरी मिल्ड्यू व दहिया बीमारी पकड़ लेगी जो दिक्कत कर सकती है। अधिक नमी से गुम्मा और भुनगा रोग घेर सकता है। वैज्ञानिकों ने आम के बौर को रोगमुक्त करने की सलाह दी है। पेड़ पर पाउडरी रोग दिखाई दे तो घुलनशील गंधक दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। डाईनोकैप एक मिली प्रति लीटर पानी घोलकर प्रथम छिडक़ाव बौर आने के तुरंत बाद दूसरा छिडक़ाव 10 से 15 दिन बाद करना चाहिए।

दलहनी और तिलहनी फसल पर संकट
सीएसए कृषि विद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार के मुताबिक रबी की दलहनी और तिलहनी फसलों पर भी संकट है। पौधों की लंबाई थम गई है। इससे फसलों का बड़ा नुकसान होगा। फूल और फली दोनों देर में आएंगे और अगर समय से नहीं आए तो बीमारियों का हमला होगा इससे उत्पादन में बड़ा विपरीत असर पड़ेगा।

इस तरह करें बचाव
पैथोलॉजी विभाग के प्रो. समीर कुमार विश्वास के मुताबिक किसानों को मैंकोजेब की जगह करजेट, इक्वेटा प्रो और मेटको के घोल का छिडक़ाव करना चाहिए। शाक भाजी अनुभाग कल्याणपुर की आलू परियोजना के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एमआर डबास ने कहा है कि प्रथम छिडक़ाव क्लोरोथैलोनील ढाई ग्राम रसायन एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर खुले मौसम में पत्तियों पर छिडक़ाव करें।

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आलोक पाण्डेय Desk/Reporting
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