यहां मगरमच्छों की सुरक्षा करती हैं मछलियां

चिड़ियाघर स्थित झील में आक्सीजन कम होने से दम तोड़ देते थे जलीय जीव, ग्रासकॉर्प मछलियों ने बढ़ा दी आक्सीजन की मात्रा, कुछ इस प्रकार बोले डॉक्टर आरके सिंह।

By: Vinod Nigam

Published: 07 Jan 2019, 09:14 AM IST

कानपुर। कहते हैं कि जंगल के राजा शेर अगर पानी के सबसे ताकतवर मगरमच्छ के जबड़े में आ जाए तो उसका बचना मुमकिन ही नहीं नामुकिन है। लेकिन कानपुर के चिड़ियाघर में स्थित झील में मछलियां इस विकराल जीव की सुरक्षा पिछले एक साल से कर रही हैं। डॉक्टर आरके सिंह ने बताया कि 18 हेक्टेयर में फैली झील में पिछले साल बढ़ते प्रदूषण, खरपतवार और शैवाल की संख्या अधिक होने की वजह से ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगी थी। इसका असर जलीय जीवों की सेहत पर पड़ रहा था। इसी के चलते हमलोगों ने एक लाख ग्रासकॉर्प मछलियां झील में छोड़ी, जिसके बाद ऑक्सीजन की मात्रा पहले की तरह हो गई।

मौत के बाद उठाया कदम
यूपी का सबसे बड़े चिड़ियाघर में अधिकतर सभी वन्य-जीवजन्तु मौजूद हैं। जिन्हें देखने के लिए हरदिन सैकड़ों दर्शक आते हैं। इसके वजूद को बचाए रखने के लिए जू के अधिकारी व डॉक्टरों के अलावा अन्य कर्मचारी दिनरात मेहनत करते हैं। यहां पर स्थित झील अपने आप में अगल है। दर्शक यहां आकर अनेक प्रकार की मछलियों के अलावा मगरमच्छ को देखते हैं। लेकिन एक साल पहले प्रदूषण, खरपतवार और शैवाल की संख्या झील के पानी में हो गई। जिसके कारण कछुए और मगरमच्छ समेत सिल्वर कॉर्प, रोहू, कतला आदि कई मछलियों ने दम तोड़ दिया था। एक साथ कई जलीय जीवों की मौत पर प्राणि उद्यान के चिकित्सक व प्रशासनिक अफसरों ने झील में ऑक्सीजन की मात्रा बरकरार रखने के लिए कार्ययोजना बनाई और एक लाख ग्रासकॉर्प मछलियों को छोड़ा। डॉक्टरों का ये नुशखा काम कर गया।

मिला नया जीवनदान
मछलियों को झील में छोड़े जाने के बाद मगरमच्छ को फरपूर ऑक्सीजन मिलने लगी और उनकी सेहत में जबरदस्त सुधार आया। इस दौरान एक भी जलीव जीव की मौत नहीं हुई। मगरमच्छों की संख्या में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। उनकी प्रजनन क्षमता बढ़ी। जू के डॉक्टर आरके सिंह ने बताया कि उन्होंने कई मछली विशेषज्ञों से बात की तो सामने आया कि झील में ग्रासकॉर्प मछलियों को छोड़ देने से ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य हो जाएगी। एक लाख ग्रासकॉर्प मछलियों को छोड़ा गया और ये प्रयोग सफल रहा। डॉक्टर आरके सिंह बताते हैं कि इसके लिए हमने मछली विशेषज्ञों को कई दिनों तक जू में रखा और पहले चरण में एक छोटे से पानी के गड्डे में इसका प्रयोग किया।

इस लिए कारगर हैं ग्रासकॉर्प मछली
डॉक्टर आरके सिंह बताते हैं कि इन मछलियों के थूथन मजबूत होते हैं और ये मिड्ढट्टी को लगभग खोद देती है। इससे मिट्टी के अंदर दबी जहरीली गैसें बाहर निकल गई और पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम नहीं हुई। यही नहीं ग्रासकॉर्प मछलियों ने झील के आसपास उगे खरपतवार और शैवाल को भी खा लिया। डॉक्टर आरके सिंह ने बताया कि ये झील बहुत सुंदर थी और कई प्रकार के जलीव जीव इसमें निवास करते थे। लेकिन पिछले साल लीकेज के चलते यहां नाले का पानी आ जाता था, जिससे प्रदूषण में वृद्धि होती थी। अब लीकेज ठीक करा दिया गया है। इससे झील का पानी साफ रहता है।

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